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जिले के कुछ निजी स्कूलों ने बस किराए में की बढ़ोतरी 15-41-25
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जिले के कुछ निजी स्कूलों ने बस किराये में की बढ़ोतरी
अभिभावकों नेकिराया बढ़ाने की शिक्षा विभाग के पास की शिकायत
विभाग ने बिना सहमति किराया बढ़ाने पर दी चेतावनी
अभिभावक-शिक्षक संघ की बैठक के बिना न लें फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिले के कई निजी स्कूल बसों और छोटे वाहनों का मनमर्जी मुताबिक किराया वसूल रहे हैं। इसको लेकर कुछ अभिभावकों ने शिक्षा विभाग को शिकायत दी है। विभाग ने सभी स्कूलों को तय मानकों के तहत किराये को लेकर फैसला लेने की हिदायत दी है।
जानकारी के अनुसार नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने के बाद कई स्कूलों ने बसों के किराये में भी बढ़ोतरी की है। इसके पीछे बढ़ती महंगाई और तेल की कीमतों में आए उछाल का तर्क दिया जा रहा है। वहीं, अभिभावकों का कहना है कि उन्हें बिना सूचित किए अचानक किराये में बढ़ोतरी की गई है। इस बारे में शिकायत मिलने के बाद शिक्षा विभाग ने सभी निजी स्कूलों को हिदायत दी है कि किराये को लेकर कोई भी फैसला अभिभावक-शिक्षक संघ की बैठक के बाद ही लिया जाए। कहा कि अभिभावकों को सूचित किए बिना किराया बढ़ाना उचित नहीं है। विभाग ने कहा है कि अगर ऐसे मामले पकड़ में आते हैं तो उन पर कार्रवाई की जाएगी।
अभिभावक जतिंद्र कुमार, राजेश कुमार, रिपन कुमार, अजय स्याल ने बताया कि निजी स्कूल प्रबंधन बसों में बच्चों को स्कूल ले जाने और घर छोड़ने का ज्यादा मासिक शुल्क ले रहे हैं। कहा कि महंगाई के दौर में अभिभावकों की जेब ढीली हो रही है। इस पर जल्द संज्ञान लिया जाना चाहिए।
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कोट्स
जिला सीबीएसई स्कूल संघ के अध्यक्ष सुमेश शर्मा ने कहा कि वाहनों का किराया निजी स्कूलों की आयस्रोत में शामिल नहीं है। कहा कि वाहनों के इस्तेमाल से प्रति माह स्कूलों को उल्टा नुकसान उठाना पड़ता है। महंगाई और अन्य कारणों से स्कूली वाहनों का किराया बढ़ाया जाता है, लेकिन इस साल किन स्कूलों ने किराये में बढ़ोतरी की, यह उनकी जानकारी में नहीं है।
कोट्स
उपनिदेशक जिला उच्च शिक्षा विभाग जनक सिंह ने कहा कि निजी स्कूल मनमर्जी से किराया नहीं बढ़ा सकते। कहा कि इसको लेकर दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
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अभिभावकों नेकिराया बढ़ाने की शिक्षा विभाग के पास की शिकायत
विभाग ने बिना सहमति किराया बढ़ाने पर दी चेतावनी
अभिभावक-शिक्षक संघ की बैठक के बिना न लें फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिले के कई निजी स्कूल बसों और छोटे वाहनों का मनमर्जी मुताबिक किराया वसूल रहे हैं। इसको लेकर कुछ अभिभावकों ने शिक्षा विभाग को शिकायत दी है। विभाग ने सभी स्कूलों को तय मानकों के तहत किराये को लेकर फैसला लेने की हिदायत दी है।
जानकारी के अनुसार नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने के बाद कई स्कूलों ने बसों के किराये में भी बढ़ोतरी की है। इसके पीछे बढ़ती महंगाई और तेल की कीमतों में आए उछाल का तर्क दिया जा रहा है। वहीं, अभिभावकों का कहना है कि उन्हें बिना सूचित किए अचानक किराये में बढ़ोतरी की गई है। इस बारे में शिकायत मिलने के बाद शिक्षा विभाग ने सभी निजी स्कूलों को हिदायत दी है कि किराये को लेकर कोई भी फैसला अभिभावक-शिक्षक संघ की बैठक के बाद ही लिया जाए। कहा कि अभिभावकों को सूचित किए बिना किराया बढ़ाना उचित नहीं है। विभाग ने कहा है कि अगर ऐसे मामले पकड़ में आते हैं तो उन पर कार्रवाई की जाएगी।
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अभिभावक जतिंद्र कुमार, राजेश कुमार, रिपन कुमार, अजय स्याल ने बताया कि निजी स्कूल प्रबंधन बसों में बच्चों को स्कूल ले जाने और घर छोड़ने का ज्यादा मासिक शुल्क ले रहे हैं। कहा कि महंगाई के दौर में अभिभावकों की जेब ढीली हो रही है। इस पर जल्द संज्ञान लिया जाना चाहिए।
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जिला सीबीएसई स्कूल संघ के अध्यक्ष सुमेश शर्मा ने कहा कि वाहनों का किराया निजी स्कूलों की आयस्रोत में शामिल नहीं है। कहा कि वाहनों के इस्तेमाल से प्रति माह स्कूलों को उल्टा नुकसान उठाना पड़ता है। महंगाई और अन्य कारणों से स्कूली वाहनों का किराया बढ़ाया जाता है, लेकिन इस साल किन स्कूलों ने किराये में बढ़ोतरी की, यह उनकी जानकारी में नहीं है।
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उपनिदेशक जिला उच्च शिक्षा विभाग जनक सिंह ने कहा कि निजी स्कूल मनमर्जी से किराया नहीं बढ़ा सकते। कहा कि इसको लेकर दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।