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Una News: मक्की की बिजाई का बदला तरीका, अब हाथ से बिजाई को किसान दे रहे प्राथमिकता

Fri, 03 Jul 2026 05:37 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना Updated Fri, 03 Jul 2026 05:37 AM IST
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Shift in maize sowing method: Farmers now prioritizing manual sowing.
परांपगत तरीके से मक्की की बिजाई करते किसान।
बडूही (ऊना)। खेती-किसानी में समय के साथ तकनीक ने बड़े बदलाव किए हैं। कभी बैलों के सहारे होने वाली खेती आज ट्रैक्टर और आधुनिक कृषि यंत्रों तक पहुंच चुकी है लेकिन आधुनिक संसाधनों के इस दौर में भी क्षेत्र के अनेक किसान मक्की की बिजाई के लिए फिर से पारंपरिक हाथ से बिजाई की पद्धति अपना रहे हैं। किसानों का मानना है कि यह तरीका न केवल बीज की बचत करता है बल्कि बेहतर अंकुरण, संतुलित पौध संख्या और अधिक उत्पादन में भी मददगार साबित हो रहा है।
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पहले किसान बैलों से खेत जोतकर पारंपरिक तरीके से मक्की की बिजाई करते थे। उस समय खेती पूरी तरह पशुओं पर निर्भर थी और लगभग हर किसान के घर बैल होते थे। हालांकि इस पद्धति में समय और मेहनत अधिक लगती थी लेकिन यही सबसे भरोसेमंद तरीका माना जाता था।
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बाद में ट्रैक्टर और सीड ड्रिल जैसी आधुनिक मशीनों के आने से खेती में बड़ा बदलाव आया। इसके साथ ही अधिकांश किसानों ने बैल पालना भी बंद कर दिया लेकिन अब वर्षों के अनुभव के आधार पर कई किसान फिर से हाथ से मक्की की बिजाई को अधिक लाभकारी मानने लगे हैं।
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वर्तमान में किसान पहले खेत को अच्छी तरह तैयार करते हैं। इसके बाद लोहे के विशेष फरमे से खेत में सीधी और समान दूरी वाली लाइनें बनाई जाती हैं। फिर प्रत्येक स्थान पर हाथ से एक या दो बीज डाले जाते हैं। इस विधि से पौधों के बीच उचित दूरी बनी रहती है, जिससे उन्हें पर्याप्त धूप, हवा और पोषक तत्व मिलते हैं तथा उनका विकास बेहतर होता है।

टकारला के किसान कृष्ण कुमार ने बताया कि वे पिछले पांच वर्षों से हाथ से ही मक्की की बिजाई कर रहे हैं। उनके अनुसार इस विधि से बीज कम लगता है, अंकुरण बेहतर होता है और पौधों के बीच उचित दूरी होने से फसल मजबूत बनती है।

कृषि अधिकारी अंब डॉ. लेखराज संधू ने बताया कि किसान मक्की की बिजाई के लिए पारंपरिक तकनीक को फिर से अपना रहे हैं। इस विधि में पौधों के बीच निर्धारित दूरी और उचित गहराई बनी रहती है जिससे पौधों का विकास बेहतर होता है। फसल के गिरने की संभावना कम रहती है। बेहतर परिणामों के कारण अनेक किसान आधुनिक मशीनों के बावजूद हाथ से बिजाई को प्राथमिकता दे रहे हैं।
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