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Una News: दियोली स्कूल की उड़ी छत फर्नीचर, दस्तावेजों को नुकसान
Tue, 12 May 2026 12:54 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Tue, 12 May 2026 12:54 AM IST
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घनारी(ऊना)। राजकीय उच्च विद्यालय दियोली में रविवार देर रात आए अंधड़ ने शिक्षा व्यवस्था की बदहाल तस्वीर उजागर कर दी। अचानक चले अंधड़ से स्कूल भवन की छत उड़ गई।
राहत की बात यह रही कि घटना रात के समय हुई नहीं तो बड़ा हादसा हो सकता था। इस हादसे में स्कूल के कमरों में रखा फर्नीचर, जरूरी दस्तावेज और शैक्षणिक सामग्री भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।
स्थानीय लोगों ने बताया कि यह स्कूल भवन काफी पुराना हो चुका है। लंबे समय से भवन जर्जर हालत में खड़ा है। इतना ही नहीं भवन का एक कमरा लोक निर्माण विभाग द्वारा पहले ही असुरक्षित घोषित किया जा चुका है।
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इसके बावजूद बच्चों की पढ़ाई इसी खस्ताहाल भवन में चलती रही। सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि जब स्कूल भवन के निर्माण के लिए करीब 56 लाख रुपये मंजूर हो चुके हैं तो आखिर अब तक काम शुरू क्यों नहीं हुआ।
लोगों का आरोप है कि विभागीय सुस्ती और प्रशासनिक लापरवाही के कारण बच्चों की सुरक्षा को लगातार नजरअंदाज किया गया। अब तूफान ने उस लापरवाही की पोल खोलकर रख दी है।
पूर्व उपप्रधान संदीप कुमार ने कहा कि सरकार को इस ओर जल्द ध्यान देना चाहिए। क्योंकि अगर बच्चों के बैठने का स्थान ही सुरक्षित नहीं तो बच्चों अच्छी शिक्षा कैसे प्राप्त करेंगे।
स्थानीय वरिष्ठ नागरिक तरसेम जसवाल ने कहा कि वर्ष 1951 में यह भवन बना था। स्कूल बच्चों की सुरक्षित को देखते हुए जल्द ही प्रशासन को इस तरह ध्यान देना चाहिए। स्कूल भवन समय पर बनना चाहिए।
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राहत की बात यह रही कि घटना रात के समय हुई नहीं तो बड़ा हादसा हो सकता था। इस हादसे में स्कूल के कमरों में रखा फर्नीचर, जरूरी दस्तावेज और शैक्षणिक सामग्री भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।
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स्थानीय लोगों ने बताया कि यह स्कूल भवन काफी पुराना हो चुका है। लंबे समय से भवन जर्जर हालत में खड़ा है। इतना ही नहीं भवन का एक कमरा लोक निर्माण विभाग द्वारा पहले ही असुरक्षित घोषित किया जा चुका है।
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इसके बावजूद बच्चों की पढ़ाई इसी खस्ताहाल भवन में चलती रही। सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि जब स्कूल भवन के निर्माण के लिए करीब 56 लाख रुपये मंजूर हो चुके हैं तो आखिर अब तक काम शुरू क्यों नहीं हुआ।
लोगों का आरोप है कि विभागीय सुस्ती और प्रशासनिक लापरवाही के कारण बच्चों की सुरक्षा को लगातार नजरअंदाज किया गया। अब तूफान ने उस लापरवाही की पोल खोलकर रख दी है।
पूर्व उपप्रधान संदीप कुमार ने कहा कि सरकार को इस ओर जल्द ध्यान देना चाहिए। क्योंकि अगर बच्चों के बैठने का स्थान ही सुरक्षित नहीं तो बच्चों अच्छी शिक्षा कैसे प्राप्त करेंगे।
स्थानीय वरिष्ठ नागरिक तरसेम जसवाल ने कहा कि वर्ष 1951 में यह भवन बना था। स्कूल बच्चों की सुरक्षित को देखते हुए जल्द ही प्रशासन को इस तरह ध्यान देना चाहिए। स्कूल भवन समय पर बनना चाहिए।