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अनुसंधान पेशा नहीं, रुचि और शौक के रूप में अपनाने से मिलेंगे अच्छे परिणाम : प्रो. भट्टाचार्य
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ट्रिपल आईटी ऊना में अनुसंधान अनुकूल वातावरण निर्माण पर सजी कार्यशाला
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। आईआईटी ऊना ने अनुसंधान, नवाचार और दृश्यता पर क्षमता निर्माण विषय पर मंगलवार को एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। इसका उद्देश्य शिक्षकों और विद्यार्थियों में अनुसंधान, नवाचार और सहयोग की भावना को प्रोत्साहित करना था। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय अनुसंधान निधि (पेयर्स परियोजना) के अंतर्गत आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. शंतनु भट्टाचार्य, निदेशक सीएसआईओ चंडीगढ़ रहे। उन्होंने अपने उद्बोधन में अनुसंधान में जिज्ञासा, नवाचार और नैतिकता को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि अनुसंधान को केवल पेशा नहीं, बल्कि रुचि और शौक के रूप में अपनाने से उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। उन्होंने सीएसआईओ में चल रहे नवीन अनुसंधान कार्यों और उपलब्ध फंडिंग अवसरों की जानकारी भी साझा की।
कार्यशाला का संचालन प्रो. मनीष गौर, निदेशक आईआईटी ऊना ने किया। उन्होंने संस्थान में अनुसंधान आधारित वातावरण विकसित करने और विभिन्न विषयों में सहयोग बढ़ाने के प्रयासों पर प्रकाश डाला। आईआईटी कानपुर के एसोसिएट प्रोफेसर एवं पेयर्स परियोजना के प्रधान अन्वेषक डॉ. शुभम सहाय ने परियोजना के उद्देश्यों और एएनआरएफ फंडिंग की महत्ता पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आईआईटी ऊना, आईआईटी कानपुर (हब) के स्पोक संस्थान के रूप में, परियोजना की सफलता में संयुक्त अनुसंधान, फैकल्टी सहयोग और छात्र भागीदारी के माध्यम से अहम भूमिका निभा सकता है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। आईआईटी ऊना ने अनुसंधान, नवाचार और दृश्यता पर क्षमता निर्माण विषय पर मंगलवार को एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। इसका उद्देश्य शिक्षकों और विद्यार्थियों में अनुसंधान, नवाचार और सहयोग की भावना को प्रोत्साहित करना था। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय अनुसंधान निधि (पेयर्स परियोजना) के अंतर्गत आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. शंतनु भट्टाचार्य, निदेशक सीएसआईओ चंडीगढ़ रहे। उन्होंने अपने उद्बोधन में अनुसंधान में जिज्ञासा, नवाचार और नैतिकता को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि अनुसंधान को केवल पेशा नहीं, बल्कि रुचि और शौक के रूप में अपनाने से उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं। उन्होंने सीएसआईओ में चल रहे नवीन अनुसंधान कार्यों और उपलब्ध फंडिंग अवसरों की जानकारी भी साझा की।
कार्यशाला का संचालन प्रो. मनीष गौर, निदेशक आईआईटी ऊना ने किया। उन्होंने संस्थान में अनुसंधान आधारित वातावरण विकसित करने और विभिन्न विषयों में सहयोग बढ़ाने के प्रयासों पर प्रकाश डाला। आईआईटी कानपुर के एसोसिएट प्रोफेसर एवं पेयर्स परियोजना के प्रधान अन्वेषक डॉ. शुभम सहाय ने परियोजना के उद्देश्यों और एएनआरएफ फंडिंग की महत्ता पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आईआईटी ऊना, आईआईटी कानपुर (हब) के स्पोक संस्थान के रूप में, परियोजना की सफलता में संयुक्त अनुसंधान, फैकल्टी सहयोग और छात्र भागीदारी के माध्यम से अहम भूमिका निभा सकता है।
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