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मंदिरों में संस्कृत गुरुकुलों की स्थापना की उठाई मांग
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चिंतपूर्णी में संस्कृत सम्मेलन में मुख्यातिथि को सम्मानित करते हुए।
- फोटो : Una
भरवाईं (ऊना)। चिंतपूर्णी में हिमाचल संस्कृत अकादमी के द्वारा दो दिवसीय संस्कृत सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का शुभारंभ शुक्रवार शाम को कवि सम्मेलन तथा सांस्कृतिक गीत संध्या से प्रारंभ हुआ। इसमें संस्कृत गीतकारों एवं संस्कृत काव्यकारों ने विशेष प्रस्तुतियां दीं।
इस दौरान मंदिर न्यासों के गठन, संस्कृत एवं संस्कृति के संरक्षण में मंदिरों की भूमिका पर शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। प्रथम सत्र की अध्यक्षता करते हुए डॉ. लेखराम शर्मा ने मंदिरों में संस्कृत गुरुकुलों की स्थापना का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश मंदिरों की भूमि है और यहां का समाज सांस्कृतिक दृष्टि से बहुत समृद्ध है। भारतीय संस्कृति में संपादित किए जाने वाले 16 प्रकार के संस्कारों की पोषकता तभी सिद्ध हो सकती है जब उचित मार्गदर्शन करने वाले प्रकांड कर्मकांड के विद्वान समाज को मिल सकें। हालांकि संस्कृत महाविद्यालय भी हिमाचल में हैं, परंतु वैदिक कर्मकांड एवं ज्योतिष के उच्चतम ज्ञान के लिए मंदिरों में गुरुकुलों का संचालन भी करना चाहिए।
कार्यक्रम में मुख्यातिथि के रूप में पधारे अंब के मंदिर एवं उपमंडल अधिकारी मनीष यादव ने सभी संस्कृत विद्वानों का चिंतपूर्णी पधारने पर अभिनंदन किया। संस्कृत के संवर्धन के लिए न्यास की तरफ से हर संभव प्रयत्न करने का आश्वासन दिया। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. अमनदीप शर्मा ने कहा हिमाचल संस्कृत अकादमी के प्रचार एवं प्रसार के लिए सभी जिलों में इस प्रकार के भव्य कार्यक्रमों का आयोजन कर रही है। कार्यक्रम में केंद्रीय विश्वविद्यालय से डॉ. बृहस्पति मिश्र, गुरुनानक देव विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. लेखराम शर्मा, चिंतपूर्णी मंदिर अधिकारी रोहित जाल्टा, संस्कृत अकादमी के पूर्व सचिव मस्तराम शर्मा, संस्कृत शिक्षक परिषद के डॉ मनोज शैल, अमित कुमार, बलबीर, शिव कुमार उपस्थित रहे।
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इस दौरान मंदिर न्यासों के गठन, संस्कृत एवं संस्कृति के संरक्षण में मंदिरों की भूमिका पर शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। प्रथम सत्र की अध्यक्षता करते हुए डॉ. लेखराम शर्मा ने मंदिरों में संस्कृत गुरुकुलों की स्थापना का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश मंदिरों की भूमि है और यहां का समाज सांस्कृतिक दृष्टि से बहुत समृद्ध है। भारतीय संस्कृति में संपादित किए जाने वाले 16 प्रकार के संस्कारों की पोषकता तभी सिद्ध हो सकती है जब उचित मार्गदर्शन करने वाले प्रकांड कर्मकांड के विद्वान समाज को मिल सकें। हालांकि संस्कृत महाविद्यालय भी हिमाचल में हैं, परंतु वैदिक कर्मकांड एवं ज्योतिष के उच्चतम ज्ञान के लिए मंदिरों में गुरुकुलों का संचालन भी करना चाहिए।
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कार्यक्रम में मुख्यातिथि के रूप में पधारे अंब के मंदिर एवं उपमंडल अधिकारी मनीष यादव ने सभी संस्कृत विद्वानों का चिंतपूर्णी पधारने पर अभिनंदन किया। संस्कृत के संवर्धन के लिए न्यास की तरफ से हर संभव प्रयत्न करने का आश्वासन दिया। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. अमनदीप शर्मा ने कहा हिमाचल संस्कृत अकादमी के प्रचार एवं प्रसार के लिए सभी जिलों में इस प्रकार के भव्य कार्यक्रमों का आयोजन कर रही है। कार्यक्रम में केंद्रीय विश्वविद्यालय से डॉ. बृहस्पति मिश्र, गुरुनानक देव विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. लेखराम शर्मा, चिंतपूर्णी मंदिर अधिकारी रोहित जाल्टा, संस्कृत अकादमी के पूर्व सचिव मस्तराम शर्मा, संस्कृत शिक्षक परिषद के डॉ मनोज शैल, अमित कुमार, बलबीर, शिव कुमार उपस्थित रहे।
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