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Una News: बिना बारिश रबी फसलें प्रभावित, धुंध से वायरल की चपेट में आ रहे लोग
Tue, 12 Nov 2024 05:01 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Tue, 12 Nov 2024 05:01 AM IST
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ऊना। जिला ऊना में लगभग दो माह से बारिश न होने के कारण सूखे जैसे हालात हैं। लंबे समय से बारिश न होने के कारण गेहूं की बिजाई सहित रबी सीजन की अन्य फसलों की बिजाई के कार्य प्रभावित हो रहे हैं। किसानों को लंबे समय से बारिश का वहीं, शुष्क ठंड के कारण लोग वायरल की चपेट में भी आ रहे हैं। हालांकि सूखे जैसे हालात के बावजूद जिला ऊना में पेयजल योजनाओं की स्थिति संतोषजनक है।
कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. कुलभूषण धीमान ने बताया कि दो महीने से बारिश न होने के कारण गेहूं, सरसों, मटर, चना आदि की फसलें प्रभावित हो रही हैं। किसान बीज और खाद की खरीद तो कर चुके हैं, लेकिन जिन इलाकों में सिंचाई की सुविधा नहीं है, वहां बिजाई संभव नहीं हो पा रही है। इस कारण किसान पिछले 10 दिनों से बारिश का इंतजार कर रहे हैं।
सिंचित क्षेत्रों में आलू और हरी सब्जियों की खेती की जा रही है, लेकिन यहां भी किसानों को हर सप्ताह सिंचाई की जरूरत पड़ रही है। आगामी दिनों में भी बारिश की संभावनाएं कम होने से किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
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सभी पेयजल योजनाएं सक्रिय, सिंचाई की भी मिल रही सुविधा
जिले में सिंचाई के 590 ट्यूबवैल और पेयजल के लिए 220 योजनाएं पूरी तरह से सक्रिय हैं। इससे लोगों को पेयजल और सिंचाई योग्य पानी की पर्याप्त आपूर्ति हो रही है। जल शक्ति विभाग के सीनियर हाइड्रोलॉजिस्ट भुवनेश शर्मा के अनुसार, जिले में पानी की आपूर्ति के लिए ब्यास, सतलुज और हम सहित तीन घाटियां हैं, जो सूखे से प्रभावित नहीं हैं और सभी पेयजल स्रोत सामान्य स्थिति में हैं। विभाग के एसई ई. नरेश कुमार धीमान ने कहा कि जिले में फिलहाल सूखे जैसी स्थिति नहीं है।
धंधु से बढ़ रहे वायरल फीवर के मरीज
इन दिनों जिला ऊना में सुबह-शाम धुंध के आगोश में रह रहा है। इस कारण वायरल फीवर, सर्दी और जुकाम के मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। क्षेत्रीय अस्पताल ऊना के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संजय मनकोटिया ने बताया कि रोजाना 60 से 70 मरीज वायरल फीवर की शिकायत लेकर अस्पताल आ रहे हैं। दिन में गर्मी और सुबह-शाम की ठंड और धुंध के कारण लोग बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। मौसम के बदलाव के कारण त्वचा रोग के मामलों में भी वृद्धि हो रही है, जिसमें डैंड्रफ, त्वचा का सूखना और बाल झड़ने जैसी समस्याएं स्किन ओपीडी में सामने आ रही हैं।
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कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. कुलभूषण धीमान ने बताया कि दो महीने से बारिश न होने के कारण गेहूं, सरसों, मटर, चना आदि की फसलें प्रभावित हो रही हैं। किसान बीज और खाद की खरीद तो कर चुके हैं, लेकिन जिन इलाकों में सिंचाई की सुविधा नहीं है, वहां बिजाई संभव नहीं हो पा रही है। इस कारण किसान पिछले 10 दिनों से बारिश का इंतजार कर रहे हैं।
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सिंचित क्षेत्रों में आलू और हरी सब्जियों की खेती की जा रही है, लेकिन यहां भी किसानों को हर सप्ताह सिंचाई की जरूरत पड़ रही है। आगामी दिनों में भी बारिश की संभावनाएं कम होने से किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
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सभी पेयजल योजनाएं सक्रिय, सिंचाई की भी मिल रही सुविधा
जिले में सिंचाई के 590 ट्यूबवैल और पेयजल के लिए 220 योजनाएं पूरी तरह से सक्रिय हैं। इससे लोगों को पेयजल और सिंचाई योग्य पानी की पर्याप्त आपूर्ति हो रही है। जल शक्ति विभाग के सीनियर हाइड्रोलॉजिस्ट भुवनेश शर्मा के अनुसार, जिले में पानी की आपूर्ति के लिए ब्यास, सतलुज और हम सहित तीन घाटियां हैं, जो सूखे से प्रभावित नहीं हैं और सभी पेयजल स्रोत सामान्य स्थिति में हैं। विभाग के एसई ई. नरेश कुमार धीमान ने कहा कि जिले में फिलहाल सूखे जैसी स्थिति नहीं है।
धंधु से बढ़ रहे वायरल फीवर के मरीज
इन दिनों जिला ऊना में सुबह-शाम धुंध के आगोश में रह रहा है। इस कारण वायरल फीवर, सर्दी और जुकाम के मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। क्षेत्रीय अस्पताल ऊना के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संजय मनकोटिया ने बताया कि रोजाना 60 से 70 मरीज वायरल फीवर की शिकायत लेकर अस्पताल आ रहे हैं। दिन में गर्मी और सुबह-शाम की ठंड और धुंध के कारण लोग बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। मौसम के बदलाव के कारण त्वचा रोग के मामलों में भी वृद्धि हो रही है, जिसमें डैंड्रफ, त्वचा का सूखना और बाल झड़ने जैसी समस्याएं स्किन ओपीडी में सामने आ रही हैं।