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Una News: पीडब्ल्यूडी ने रायपुर बाड़ेयां को बना दिया फत्तेवाल
Mon, 30 Sep 2024 01:35 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Mon, 30 Sep 2024 01:35 AM IST
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मैहतपुर (ऊना)। लोक निर्माण विभाग का कार्य वैसे तो सड़कों, पुलों तथा भवनों का निर्माण करवाना है, लेकिन विभाग ने राजस्व विभाग का हाथ बंटाते हुए गांवों का भूगोल बदलना भी शुरू कर दिया।
इसकी एक मिसाल निकटवर्ती गांव रायपुर सहोड़ा (बाड़ेयां) में देखने को मिलती है। यहां लोक निर्माण विभाग ने रायपुर बाड़ेयां को फत्तेवाल गांव में तब्दील कर दिया है। रायपुर संतोषगढ संपर्क मार्ग पर सड़क किनारे लगाए गए इस बोर्ड पर हालांकि जनसंख्या का कोई जिक्र नहीं है। हैरत की बात यह कि इस विलेज बोर्ड का पंचायत प्रतिनिधियों से लेकर जिला परिषद तथा गांव के प्रमुख नागरिकों ने भी कोई एतराज नहीं जताया है। राजस्व रिकॉर्ड में भले ही गांव का भूगोल न बदला हो, लेकिन लोक निर्माण विभाग ने रायपुर को फत्तेवाल गांव में बदलने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी है। विभाग की इस बड़ी कोताही पर भले ही किसी जागरूक अथवा पढ़े लिखे नागरिक की नजर न पड़ी हो, लेकिन फत्तेवाल की एक छोटी बच्ची की संतोषगढ़ से आते समय जब नजर पड़ी तो उसने अपने पापा से पूछा कि हमारा गांव यहां पर भी है? बड़ा सवाल यह कि लोक निर्माण विभाग की एक बड़ी भूल पर जब एक छोटी बच्ची की नजर जा सकती है, तो आए दिन इस रोड से आने जाने वाले गांव के प्रबुद्ध लोगों की नजर क्यों नहीं पड़ी? और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने इस संपर्क मार्ग पर कार्य भी करवाया है, तब भी अपनी इस बड़ी भूल को सुधारने में कोई कदम क्यों नहीं उठाए गए।
यही नहीं, गांव रायपुर सहोड़ा की आयुर्वेदिक डिस्पेंसरी के निकट विभाग ने विलेज बोर्ड तो लगा दिया, लेकिन विलेज बोर्ड पर विभाग जनसंख्या लिखना ही भूल गया। इस बोर्ड पर केवल गांव का नाम जनसंख्या और प्राणी ही लिख दिया गया है। सूत्रों ने बताया कि न केवल रायपुर सहोड़ा, बल्कि कई अन्य गांवों में भी विलेज बोर्डों का यही हाल है। शिवसेना प्रमुख शिवदत्त वशिष्ठ, हरीश अटवाल, शंभूनाथ शर्मा, गौरव सहोड़, अभिषेक तथा शिव कुमार ने कहा कि यह लोकनिर्माण की बहुत बड़ी चूक है। इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्यवाई अमल में लानी चाहिए।
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कोट्स
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता कुलदीप सिंह ने कहा कि उनकी जानकारी में यह बात नहीं है। उन्होंने कहा कि संबंधित कनिष्ठ अभियंता से जानकारी लेंगे और इन खामियों को जल्द दूर करवाया जाएगा।
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इसकी एक मिसाल निकटवर्ती गांव रायपुर सहोड़ा (बाड़ेयां) में देखने को मिलती है। यहां लोक निर्माण विभाग ने रायपुर बाड़ेयां को फत्तेवाल गांव में तब्दील कर दिया है। रायपुर संतोषगढ संपर्क मार्ग पर सड़क किनारे लगाए गए इस बोर्ड पर हालांकि जनसंख्या का कोई जिक्र नहीं है। हैरत की बात यह कि इस विलेज बोर्ड का पंचायत प्रतिनिधियों से लेकर जिला परिषद तथा गांव के प्रमुख नागरिकों ने भी कोई एतराज नहीं जताया है। राजस्व रिकॉर्ड में भले ही गांव का भूगोल न बदला हो, लेकिन लोक निर्माण विभाग ने रायपुर को फत्तेवाल गांव में बदलने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी है। विभाग की इस बड़ी कोताही पर भले ही किसी जागरूक अथवा पढ़े लिखे नागरिक की नजर न पड़ी हो, लेकिन फत्तेवाल की एक छोटी बच्ची की संतोषगढ़ से आते समय जब नजर पड़ी तो उसने अपने पापा से पूछा कि हमारा गांव यहां पर भी है? बड़ा सवाल यह कि लोक निर्माण विभाग की एक बड़ी भूल पर जब एक छोटी बच्ची की नजर जा सकती है, तो आए दिन इस रोड से आने जाने वाले गांव के प्रबुद्ध लोगों की नजर क्यों नहीं पड़ी? और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने इस संपर्क मार्ग पर कार्य भी करवाया है, तब भी अपनी इस बड़ी भूल को सुधारने में कोई कदम क्यों नहीं उठाए गए।
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यही नहीं, गांव रायपुर सहोड़ा की आयुर्वेदिक डिस्पेंसरी के निकट विभाग ने विलेज बोर्ड तो लगा दिया, लेकिन विलेज बोर्ड पर विभाग जनसंख्या लिखना ही भूल गया। इस बोर्ड पर केवल गांव का नाम जनसंख्या और प्राणी ही लिख दिया गया है। सूत्रों ने बताया कि न केवल रायपुर सहोड़ा, बल्कि कई अन्य गांवों में भी विलेज बोर्डों का यही हाल है। शिवसेना प्रमुख शिवदत्त वशिष्ठ, हरीश अटवाल, शंभूनाथ शर्मा, गौरव सहोड़, अभिषेक तथा शिव कुमार ने कहा कि यह लोकनिर्माण की बहुत बड़ी चूक है। इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्यवाई अमल में लानी चाहिए।
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कोट्स
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता कुलदीप सिंह ने कहा कि उनकी जानकारी में यह बात नहीं है। उन्होंने कहा कि संबंधित कनिष्ठ अभियंता से जानकारी लेंगे और इन खामियों को जल्द दूर करवाया जाएगा।