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Una News: चिंतपूर्णी में राजकीय महाविद्यालय बंद करने के फैसले पर विरोध बढ़ा
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मांग : नए कोर्स शुरू कर बढ़ाई जाए छात्र संख्या
संवाद न्यूज एजेंसी
भरवाईं (ऊना)। मां भगवती के पावन नाम पर स्थापित राजकीय महाविद्यालय चिंतपूर्णी को बंद करने के प्रदेश सरकार के फैसले को लेकर क्षेत्र में लगातार विरोध बढ़ रहा है। स्थानीय लोग, अभिभावक और सामाजिक संगठन इसे उचित नहीं मान रहे हैं। हिमाचल प्रदेश ब्राह्मण सभा ने भी सरकार के इस निर्णय पर आपत्ति जताई है। यह कॉलेज पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की देन है। उनके कार्यकाल के दौरान ही इस कॉलेज का सरकारीकरण किया गया था। चिंतपूर्णी में स्थित इस संस्थान से आसपास के गांवों के सैकड़ों छात्रों को वर्षों से उच्च शिक्षा का लाभ मिल रहा है। स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि कॉलेज बंद हो गया तो दूरदराज पंचायतों के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी, जिससे खासकर गरीब परिवारों के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी।
क्षेत्रवासियों ने सरकार से अपील की है कि कॉलेज को बंद करने के बजाय इसे मजबूत बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि शिक्षा सुविधाएं क्षेत्र में बनी रहें और छात्रों का भविष्य सुरक्षित हो सके।
महेश कुमार पाराशर का कहना है कि यदि कॉलेज में विद्यार्थियों की संख्या कम है तो सरकार को इसे बंद करने के बजाय यहां नए रोजगारपरक और तकनीकी कोर्स शुरू करने चाहिए। पॉलिटेक्निक और व्यावसायिक ट्रेड शुरू होने से अधिक छात्र यहां प्रवेश लेंगे और कॉलेज की छात्र संख्या स्वतः बढ़ जाएगी।
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कॉलेज की छात्रा अंजलि ने बताया कि राजकीय महाविद्यालय, चिंतपूर्णी धार्मिक नगरी चिंतपूर्णी का मात्र इकलौता कॉलेज है। उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों की पढ़ाई के अवसर बढ़ाने चाहिए, ना कि कॉलेज को बंद करने का फैसला लेना चाहिए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
भरवाईं (ऊना)। मां भगवती के पावन नाम पर स्थापित राजकीय महाविद्यालय चिंतपूर्णी को बंद करने के प्रदेश सरकार के फैसले को लेकर क्षेत्र में लगातार विरोध बढ़ रहा है। स्थानीय लोग, अभिभावक और सामाजिक संगठन इसे उचित नहीं मान रहे हैं। हिमाचल प्रदेश ब्राह्मण सभा ने भी सरकार के इस निर्णय पर आपत्ति जताई है। यह कॉलेज पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की देन है। उनके कार्यकाल के दौरान ही इस कॉलेज का सरकारीकरण किया गया था। चिंतपूर्णी में स्थित इस संस्थान से आसपास के गांवों के सैकड़ों छात्रों को वर्षों से उच्च शिक्षा का लाभ मिल रहा है। स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि कॉलेज बंद हो गया तो दूरदराज पंचायतों के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी, जिससे खासकर गरीब परिवारों के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी।
क्षेत्रवासियों ने सरकार से अपील की है कि कॉलेज को बंद करने के बजाय इसे मजबूत बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि शिक्षा सुविधाएं क्षेत्र में बनी रहें और छात्रों का भविष्य सुरक्षित हो सके।
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महेश कुमार पाराशर का कहना है कि यदि कॉलेज में विद्यार्थियों की संख्या कम है तो सरकार को इसे बंद करने के बजाय यहां नए रोजगारपरक और तकनीकी कोर्स शुरू करने चाहिए। पॉलिटेक्निक और व्यावसायिक ट्रेड शुरू होने से अधिक छात्र यहां प्रवेश लेंगे और कॉलेज की छात्र संख्या स्वतः बढ़ जाएगी।
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कॉलेज की छात्रा अंजलि ने बताया कि राजकीय महाविद्यालय, चिंतपूर्णी धार्मिक नगरी चिंतपूर्णी का मात्र इकलौता कॉलेज है। उन्होंने कहा कि सरकार को छात्रों की पढ़ाई के अवसर बढ़ाने चाहिए, ना कि कॉलेज को बंद करने का फैसला लेना चाहिए।