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Una News: बैंगन के पांच रुपये प्रति किलो मिल रहे दाम, किसान परेशान
Wed, 31 Jul 2024 04:17 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Wed, 31 Jul 2024 04:17 AM IST
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ऊना। जिले में बैंगन की खेती करने वाले किसानों को आर्थिक तौर पर बड़ा नुकसान झेलना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि एक किलो बैंगन पांच रुपये के आसपास बिक रहा है। किसानों का कहना है कि बैंगन की कीटों व खरपतवरों से बचाने के लिए एक बार की कीटनाशक स्प्रे 1500 रुपये के आसपास आती है, लेकिन इसके मुकाबले फसल की कीमत देखी जाए तो बेहद कम है।
जानकारी के अनुसार ऊना जिला में 500 हेक्टेयर के करीब बैंगन की खेती होती है। इस फसल को तैयार करने में किसानों का काफी मेहनत करनी पड़ी है। खासकर सुंडी और जहरीली मक्खियों से बचाव के लिए किसानों को समय समय पर कीटनाशकों का छिड़काव करना पड़ता है। इस फसल के तैयार होने पर शुरुआती दिनों में 20 से 25 रुपये प्रतिकिलो तक दाम मिल रहे थे, लेकिन एक माह के भीतर कीमत आधी से भी कम हो चुकी है।
किसान विनोद कुमार, सुनील, प्रेम चंद, अमनदीप ने बताया कि बैंगन का तुड़ान करने के लिए मजदूरों को लगाना पड़ता है। यह अकेले व्यक्ति का काम नहीं है। इसके अलावा समय-समय पर सिंचाई और कीटनाशकों का छिड़काव करना पड़ता है। इस फसल से अच्छी आय की उम्मीद थी, लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा। कहा कि अगर सारे खर्च को जोड़ें तो अभी तक लागत ही वापस नहीं आई।
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कोट्स
ऊना की जलवायु के मुताबिक बैंगन एक अच्छी फसल मानी जाती है। इस बार पैदावार भी बेहतर है। हालांकि मंडियों में कई बार मांग से अधिक किसी सब्जी की आमद हो जाए, तो कीमतों पर असर होता है। हालांकि कीमतें अस्थाई रहती हैं। कम या ज्यादा होती रहती हैं।
भूपेंद्र सिंह, एपीएमसी सचिव, ऊना
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जानकारी के अनुसार ऊना जिला में 500 हेक्टेयर के करीब बैंगन की खेती होती है। इस फसल को तैयार करने में किसानों का काफी मेहनत करनी पड़ी है। खासकर सुंडी और जहरीली मक्खियों से बचाव के लिए किसानों को समय समय पर कीटनाशकों का छिड़काव करना पड़ता है। इस फसल के तैयार होने पर शुरुआती दिनों में 20 से 25 रुपये प्रतिकिलो तक दाम मिल रहे थे, लेकिन एक माह के भीतर कीमत आधी से भी कम हो चुकी है।
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किसान विनोद कुमार, सुनील, प्रेम चंद, अमनदीप ने बताया कि बैंगन का तुड़ान करने के लिए मजदूरों को लगाना पड़ता है। यह अकेले व्यक्ति का काम नहीं है। इसके अलावा समय-समय पर सिंचाई और कीटनाशकों का छिड़काव करना पड़ता है। इस फसल से अच्छी आय की उम्मीद थी, लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा। कहा कि अगर सारे खर्च को जोड़ें तो अभी तक लागत ही वापस नहीं आई।
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ऊना की जलवायु के मुताबिक बैंगन एक अच्छी फसल मानी जाती है। इस बार पैदावार भी बेहतर है। हालांकि मंडियों में कई बार मांग से अधिक किसी सब्जी की आमद हो जाए, तो कीमतों पर असर होता है। हालांकि कीमतें अस्थाई रहती हैं। कम या ज्यादा होती रहती हैं।
भूपेंद्र सिंह, एपीएमसी सचिव, ऊना