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Una News: गेहूं की कटाई के बाद मक्की और सब्जियों की बिजाई की तैयारी
Mon, 06 May 2024 04:38 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Mon, 06 May 2024 04:38 AM IST
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ऊना। जिला में गेहूं की फसल की कटाई होने के साथ ही अब मक्की और सब्जियों की बिजाई की तैयारियों का कार्य शुरू हो गया है। इस बार भी अधिकतर किसानों के पारंपरिक खेती को जारी रखते हुए मक्की की खेती करने पर भरोसा जताया। वहीं, कई किसानों ने हरी सब्जियों की खेती तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की है।
जिला ऊना के सिंचित इलाकों में गेहूं कटने के साथ ही मक्की और हरी सब्जियों की खेती शुरू हो जाती है। इसके विपरीत गैर-सिंचित इलाकों में बरसात का मौसम आने तक खेत खाली रहते हैं। जिन इलाकों में सिंचाई सुविधा है वहां किसानों ने मक्की की बिजाई के लिए खेत तैयार करने शुरू कर दिए हैं। इसके लिए खेतों में सफाई की जा रही है।
इसके अलावा जिले के किसान हरी सब्जियों में मुख्यतः बैंगन की खेती को तरजीह मिल रही है। बीते दो साल बैंगन की खेती ने किसानों को अच्छा लाभ दिया है। यही कारण है कि किसानों का इस खेती की ओर रुझान बढ़ा है। इसके अलावा फ्रांसबीन, खीरा, टमाटर, घीया, कद्दू सहित अन्य सब्जियां भी तैयार होती हैं। वहीं, अगेती मक्की भी करीब 1500 हेक्टेयर जमीन पर तैयार होती है।
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एक साल में तीन फसलें होती हैं तैयार
जिला ऊना के सिंचित इलाकों में एक वर्ष के भीतर किसान तीन फसलें तैयार होती हैं। इसमें गेहूं के बाद मक्का या हरी सब्जियां और उसके बाद दो माह वाला आलू सितंबर से नवंबर माह के बीच तैयार होता है। मगर गेहूं और मक्की जैसी पारंपरिक खेती से किसानों को मौसम और कीड़े की मार से नुकसान हो रहा है। इसके बाद कुछ किसान वैकल्पिक फसलों पर भी ध्यान दे रहे हैं।
जिला ऊना के सिंचित इलाकों के किसान काफी सक्रिय और जागरूक हैं। उन्हें इस बात की पूरी जानकारी है कि बाजार का रुझान क्या है और किस मौसम में कौन-सी फसल तैयार करना फायदे का सौदा होगा। वर्तमान में बड़े स्तर पर मक्की और हरी सब्जियों की खेती हो रही है। हालांकि गर्मी के मौसम में फसलें तैयार करना काफी चुनौती पूर्ण होता है।
-डॉ. कुलभूषण धीमान, उपनिदेशक, कृषि विभाग ऊना
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जिला ऊना के सिंचित इलाकों में गेहूं कटने के साथ ही मक्की और हरी सब्जियों की खेती शुरू हो जाती है। इसके विपरीत गैर-सिंचित इलाकों में बरसात का मौसम आने तक खेत खाली रहते हैं। जिन इलाकों में सिंचाई सुविधा है वहां किसानों ने मक्की की बिजाई के लिए खेत तैयार करने शुरू कर दिए हैं। इसके लिए खेतों में सफाई की जा रही है।
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इसके अलावा जिले के किसान हरी सब्जियों में मुख्यतः बैंगन की खेती को तरजीह मिल रही है। बीते दो साल बैंगन की खेती ने किसानों को अच्छा लाभ दिया है। यही कारण है कि किसानों का इस खेती की ओर रुझान बढ़ा है। इसके अलावा फ्रांसबीन, खीरा, टमाटर, घीया, कद्दू सहित अन्य सब्जियां भी तैयार होती हैं। वहीं, अगेती मक्की भी करीब 1500 हेक्टेयर जमीन पर तैयार होती है।
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एक साल में तीन फसलें होती हैं तैयार
जिला ऊना के सिंचित इलाकों में एक वर्ष के भीतर किसान तीन फसलें तैयार होती हैं। इसमें गेहूं के बाद मक्का या हरी सब्जियां और उसके बाद दो माह वाला आलू सितंबर से नवंबर माह के बीच तैयार होता है। मगर गेहूं और मक्की जैसी पारंपरिक खेती से किसानों को मौसम और कीड़े की मार से नुकसान हो रहा है। इसके बाद कुछ किसान वैकल्पिक फसलों पर भी ध्यान दे रहे हैं।
जिला ऊना के सिंचित इलाकों के किसान काफी सक्रिय और जागरूक हैं। उन्हें इस बात की पूरी जानकारी है कि बाजार का रुझान क्या है और किस मौसम में कौन-सी फसल तैयार करना फायदे का सौदा होगा। वर्तमान में बड़े स्तर पर मक्की और हरी सब्जियों की खेती हो रही है। हालांकि गर्मी के मौसम में फसलें तैयार करना काफी चुनौती पूर्ण होता है।
-डॉ. कुलभूषण धीमान, उपनिदेशक, कृषि विभाग ऊना