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Una News: एक दशक में 75 फीसदी घट गई धान की खेती

Sun, 22 Jun 2025 02:00 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 22 Jun 2025 02:00 AM IST
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Paddy cultivation decreased by 75 percent in a decade
अनियमित बरसात से किसान नहीं उगा रहे फसल
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आलू क्रांति का भी धान पर हुआ असर, अब सब्जियां और मक्की उगाना बेहतर मान रहे किसान
कहा- गैर सिंचित इलाकों में अब नहीं होती पर्याप्त बारिश, कैसे तैयार हो धान

विकास चौधरी

ऊना। प्रदेश के कृषि प्रधान जिलों में अग्रणी ऊना में बीते एक दशक के भीतर धान (चावल) की खेती तेजी से सिमटी है। अब नाममात्र किसान ही इस फसल को तैयार करते हैं। विशेषज्ञों और किसानों की मानें को अनियमित बारिश, आलू क्रांति और भौगोलिक बदलाव के कारण धान के खेती में 75 फीसदी कमी आ गई। किसान मक्की और हरी सब्जियों ज्यादा उगा रहे हैं।
कृषि विभाग के प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में एक दशक पहले करीब 1800 हेक्टेयर में धान की फसल तैयार होती थी। प्रमुख तौर पर हरोली, संतोषगढ़, गगरेट और अंब के कई गांवों में किसान इस फसल को अहम मानते थे। जबकि, गुजारे लायक मक्की का उत्पादन भी होता था। अब जिले में कृषि की क्रांति में धान की फसल पिछड़ गई है। मुश्किल से 500 हेक्टेयर में यह फसल तैयार हो रही है। किसानों की मानें तो धान की फसल में नियमित सिंचाई एक अहम पहलू है। खेतों में पानी जमा रखना पड़ता है। जबकि, मक्की व हरी सब्जियों में इतनी जहमत नहीं उठानी पड़ती। इसके अलावा बीते कुछ सालों में अनियमित बारिश से भी किसानों को धान उगाने में नुकसान हुआ है। किसानों का कहना है कि सिंचाई सुविधा से वंचित इलाकों में भी पहले बरसात का पानी इतना एकत्रित हो जाता था कि आसानी से धान की फसल तैयार होती थी। खेतों में पानी खड़ा रहता था तो किसी और फसल का विकल्प ही नहीं बचता था। बीते कुछ साल से नियमित अंतराल में बारिश का होना घटा है। इससे कई बार फसल बिना पानी के बर्बाद हो गई। मक्की और हरी सब्जियों को सिंचाई कुछ दिन न मिले, तब भी फसल बर्बाद नहीं होती।
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त्यूड़ी गांव के किसान संदीप कुमार ने बताया कि कुछ समय पहले उनके खेतों में बरसात का पानी जमा होता था। तब धान तैयार करना एकमात्र विकल्प था। अब खेतों में अतिरिक्त मिट्टी डालकर भू स्तर ऊंचा कर लिया है। पानी खेतों में नहीं घुसता। अब मक्की और हरी सब्जियां तैयार करते हैं और सर्दियों में आलू की फसल भी अच्छी होती है।
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पंडोगा के किसान विनोद कुमार ने कहा कि धान की फसल सिंचाई पर आधारित होती है। खेतों में लगातार पानी खड़ा रहना जरूरी है। जबकि आजकल मानसून में जिस दिन बारिश होगी, जरूरत से अधिक हो जाएगी और जब नहीं होगी तो कई दिन निकल जाते हैं। ऐसे मौसम में धान तभी तैयार हो पाएगा, अगर आपके पास सिंचाई सुविधा है। पहले अधिकतर गैर सिंचित इलाकों में यह फसल तैयार होती थी।
किसान रोहित कुमार ने बताया कि पहले खेतों में बारिश का पानी जमा होता था। किसान धान उगाना बेहतर मानते थे। लेकिन, आलू क्रांति आने के बाद अधिकतर किसानों ने खेतों में अतिरिक्त मिट्टी डलवा दी ताकि आलू की फसल में पानी जमा न हो। आलू की फसल का प्रभाव धान पर पड़ा है। मक्की और हरी सब्जियां आलू वाले खेतों में अच्छी तैयार होती हैं, लेकिन धान लगातार सिंचाई मांगेगा। ---
किसान बलवीर चंद ने बताया कि धान की बिजाई से लेकर उसे मंडी तक पहुंचाने की प्रक्रिया जटिल है। जबकि, मक्की और हरी सब्जियां आसानी से तुड़ान के बाद मंडी पहुंचा दी जाती हैं। कहा कि धान की कीमत बेशक मक्की से अधिक है, लेकिन मक्की हमारे क्षेत्र का मुख्य आहार है। इसके मुकाबले चावल कम खाया जाता है। इसलिए किसान अब अपने गुजारे लायक धान भी नहीं उगाते। ---
मौसम विशेषज्ञ विनोद शर्मा ने बताया कि ऐसा नहीं कह सकते कि एक दशक में बरसात में गिरावट आई है। हालांकि, किसी सीजन में बरसात में नियमित अंतराल में बारिश का होना घट सकता है।

कृषि विभाग ऊना के उपनिदेशक कुलभूषण धीमान ने बताया कि राजस्व विभाग के आंकड़ों में चावल की खेती करीब 1700 हेक्टेयर में हुआ करती थी। अब ऐसा नहीं रहा। धान की खेती तेजी से सिमटी है। ऊना के किसानों के लिए अब खेती आय का साधन बन चुकी है। कई किसानों ने आलू को अपनी प्राथमिक फसल बना लिया। उसी अनुसार खेतों और अन्य फसलों को तैयार किया जाता है। अब किसान बरसाती पानी का खेतों में संचय करना बेहतर नहीं मानते। शायद यही वजह है कि धान की खेती तेजी से घट गई।
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