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Una News: स्कूलों में घट रही विशेष जरूरतों वाले बच्चों की संख्या, अध्यापक करेंगे स्क्रीनिंग

Tue, 26 Nov 2024 07:52 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 26 Nov 2024 07:52 PM IST
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Number of children with special needs is decreasing in schools, teachers will screen
अध्यापकों को प्रशस्त एप पर करना होगा पंजीकरण
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स्क्रीनिंग से जुड़ी जानकारी की ऑनलाइन जमा होगी रिपोर्ट
दिव्यांग विद्यार्थियों की घटती संख्या पर शिक्षा निदेशालय ने जताई चिंता

संवाद न्यूज एजेंसी

ऊना। स्कूलों में विशेष जरूरतों वाले बच्चों (चिल्ड्रन विद स्पेशल नीड्स) की संख्या लगातार घटती जा रही है। तेजी से कम हो रहे इस आंकड़े पर शिक्षा निदेशालय ने चिंता जाहिर की है। दरअसल यू डायस पोर्टल पर विद्यार्थियों की संख्या से जुड़े आंकड़े में यह सामने आया है कि आठवीं कक्षा से विशेष जरूरतों वाले बच्चों का दाखिला घटता जा रहा है। कई विद्यार्थी स्कूली पढ़ाई को बड़ी कक्षाओं तक पहुंचने से पहले छोड़ रहे हैं। अब शिक्षा निदेशालय ने ऐसे बच्चों की स्क्रीनिंग करने और उनका मार्गदर्शन करने के निर्देश दिए हैं।
जानकारी के अनुसार सभी स्कूलों में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों से जुड़ा आंकड़ा यू डायस पोर्टल पर सभी शिक्षण संस्थान हर वर्ष जमा करवाते हैं। समय-समय पर उसे अपडेट भी किया जाता है। इस आंकड़े में विशेष जरूरतों वाले बच्चों की कमी ने निदेशालय को भी सोचने पर मजबूर किया है कि किन कारणों से ऐसा हो रहा है। इसके लिए अब शिक्षा निदेशालय ने सभी स्कूल प्रधानाचार्यों, मुख्याध्यापकों व अध्यापकों को निर्देश दिए हैं कि अपने मोबाइल पर प्रशस्त एप डाउनलोड कर अपना पंजीकरण करवाएं। इसके बाद विशेष जरूरतों वाले बच्चों की स्क्रीनिंग की जाएगी। इसमें पता लगाया जाएगा कि उनके स्कूल छोड़ने या बदलने के क्या कारण रहे हैं। अगर कोई ऐसा बच्चा पढ़ाई छोड़ गया होगा तो उसे भी दोबारा स्कूलों में दाखिला लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
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प्रशिक्षण पाने वाले 13 प्रतिशत ने कराया पंजीकरण
प्रशस्त एप के प्रभावी उपयोग के लिए बीते दिनों कई अध्यापकों को वेबिनार, प्रशिक्षण सत्रों सहित अन्य माध्यमों से प्रशिक्षित किया गया। इसके बावजूद अभी तक 13 प्रतिशत ऐसे लोगों ने एप पर पंजीकरण कराया है, जिनको इससे जुड़ा प्रशिक्षण दिया गया है। शिक्षा निदेशालय ने उक्त एप में पंजीकरण का हर जिले के आंकड़ा भी मांगा है।
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कोट्स
प्रशस्त एप में पंजीकरण करने के साथ विशेष जरूरतों वाले बच्चों की स्क्रीनिंग से जुड़े निर्देश सभी स्कूल अध्यापकों को दिए गए हैं। विशेषकर प्रशस्त एप से जुड़ा प्रशिक्षण पाने वाले अध्यापक इसमें पंजीकरण जरूर करवाएं। साथ ही विशेष जरूरतों वाले बच्चों का दाखिला बढ़ाने और पढ़ाई छोड़ने वाले विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करने में अध्यापक अहम भूमिका निभाएं।

सोमलाल धीमान, उपनिदेशक, जिला प्रारंभिक शिक्षा विभाग।
विशेष जरूरतों वाले 450 बच्चे कर रहे पढ़ाई
डाइट के प्रधानाचार्य राकेश अरोड़ा ने बताया कि वर्तमान में जिला के स्कूलों में करीब 450 विशेष जरूरतों वाले बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। बीते साल यह संख्या 485 के आसपास रही है। उन्होंने बताया कि ऐसे विद्यार्थियों की संख्या में हर साल अंतर आता है। जिसका मुख्य कारण है कि कई बच्चों के अभिभावक इससे जुड़ा प्रमाण पत्र नहीं बनवाते। कहा कि दिव्यांग विद्यार्थियों का मेडिकल प्रमाण पत्र हर शनिवार को क्षेत्रीय अस्पताल ऊना में बनता है। लेकिन, इसकी प्रक्रिया थोड़ी पेचीदा है और अधिकतर अभिभावक समय खराब होने का सोचकर अस्पताल ही नहीं जाते। उन्होंने बताया कि ऐसे मामले सबसे अधिक प्रवासी बच्चों को लेकर सामने आते हैं।
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