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Una News: शिमला आसपास के लिए जरूरी बिना कारण पति को छोड़ा, कोर्ट ने कहा ये मानसिक क्रूरता, तलाक सही
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अदालत
2007 में हुई थी बंगाणा के युवक की शिमला की युवती से शादी
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। ऊना फैमिली कोर्ट ने एक अहम फैसले में पति को तलाक की डिक्री (अदालती दस्तावेज) जारी की है। अदालत ने प्रतिवादी पत्नी की ओर से बिना किसी कारण पति को छोड़ना क्रूरता माना और आदेश दिया कि आदेश की तिथि से दोनों पक्ष पति-पत्नी नहीं रहेंगे। बंगाणा तहसील के गांव बाउस निवासी युवक की शादी 10 सितंबर 2007 को शिमला जिले के ठियोग के गांव बधूम की युवती से हुई थी। दंपती के दो बच्चे हैं। 15 वर्षीय बेटी और 11 वर्षीय बेटा। पति का आरोप था कि मई 2018 में पत्नी ससुराल यह कहकर गई कि उसकी मां बीमार है। वह तीन-चार दिन में वापस आ जाएगी। जब मैंने उसके साथ चलकर उनका हाल जानने को कहा तो पत्नी ने कहा कि अगर उनकी हालत ठीक नहीं होगी तो वह फोन करेगी। पति का आरोप है कि उसने सास के स्वास्थ्य की चिंता में कई बार पत्नी को फोन किए लेकिन उसने फोन नहीं उठाया। फिर ससुर को फोन किया और पूछा कि वह फोन क्यों नहीं उठा रही। बाद में ससुर ने गालियां देकर दोबारा फोन न करने की धमकी दी। आरोप है कि जब वह पूछताछ करने ससुराल गया तो वहां उसे मिलने नहीं दिया। इसके बाद उसने अदालत में याचिका दायर की थी।
16 सितंबर 2019 को अदालत ने वैवाहिक अधिकारों की बहाली का आदेश पारित किया और पत्नी को शामिल होने के लिए एक माह का समय दिया। इसके बावजूद पत्नी ने आदेश का पालन नहीं किया और 2 अक्तूबर 2021 को अपने घर जाकर दोनों बच्चों को जबरन अपने पास ले लिया।
अपर प्रधान न्यायाधीश कांता वर्मा ने 19 सितंबर 2025 को फैसला सुनाते हुए कहा कि याचिकाकर्ता की याचिका स्वीकार की जाती है। अदालत ने प्रतिवादी की ओर से क्रूरता, परित्याग और वैवाहिक अधिकारों के आदेश का पालन न करने के आधार पर तलाक का आदेश दिया। आदेश की तिथि से दोनों पक्ष पति-पत्नी नहीं रहेंगे।
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2007 में हुई थी बंगाणा के युवक की शिमला की युवती से शादी
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। ऊना फैमिली कोर्ट ने एक अहम फैसले में पति को तलाक की डिक्री (अदालती दस्तावेज) जारी की है। अदालत ने प्रतिवादी पत्नी की ओर से बिना किसी कारण पति को छोड़ना क्रूरता माना और आदेश दिया कि आदेश की तिथि से दोनों पक्ष पति-पत्नी नहीं रहेंगे। बंगाणा तहसील के गांव बाउस निवासी युवक की शादी 10 सितंबर 2007 को शिमला जिले के ठियोग के गांव बधूम की युवती से हुई थी। दंपती के दो बच्चे हैं। 15 वर्षीय बेटी और 11 वर्षीय बेटा। पति का आरोप था कि मई 2018 में पत्नी ससुराल यह कहकर गई कि उसकी मां बीमार है। वह तीन-चार दिन में वापस आ जाएगी। जब मैंने उसके साथ चलकर उनका हाल जानने को कहा तो पत्नी ने कहा कि अगर उनकी हालत ठीक नहीं होगी तो वह फोन करेगी। पति का आरोप है कि उसने सास के स्वास्थ्य की चिंता में कई बार पत्नी को फोन किए लेकिन उसने फोन नहीं उठाया। फिर ससुर को फोन किया और पूछा कि वह फोन क्यों नहीं उठा रही। बाद में ससुर ने गालियां देकर दोबारा फोन न करने की धमकी दी। आरोप है कि जब वह पूछताछ करने ससुराल गया तो वहां उसे मिलने नहीं दिया। इसके बाद उसने अदालत में याचिका दायर की थी।
16 सितंबर 2019 को अदालत ने वैवाहिक अधिकारों की बहाली का आदेश पारित किया और पत्नी को शामिल होने के लिए एक माह का समय दिया। इसके बावजूद पत्नी ने आदेश का पालन नहीं किया और 2 अक्तूबर 2021 को अपने घर जाकर दोनों बच्चों को जबरन अपने पास ले लिया।
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अपर प्रधान न्यायाधीश कांता वर्मा ने 19 सितंबर 2025 को फैसला सुनाते हुए कहा कि याचिकाकर्ता की याचिका स्वीकार की जाती है। अदालत ने प्रतिवादी की ओर से क्रूरता, परित्याग और वैवाहिक अधिकारों के आदेश का पालन न करने के आधार पर तलाक का आदेश दिया। आदेश की तिथि से दोनों पक्ष पति-पत्नी नहीं रहेंगे।
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