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गांवों की समृद्धि के लिए जरूरी है भू-एकत्रीकरण : मोदगिल
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राष्ट्रीय किसान संगठन हिमाचल प्रदेश के नेता ने उठाई आवाज
संवाद न्यूज एजेंसी
थानाकलां (ऊना)। राष्ट्रीय किसान संगठन हिमाचल प्रदेश के नेता देशराज मोदगिल ने सरकार से मांग की है कि किसानों की समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए राज्य में भू-एकत्रीकरण (कन्सोलिडेशन) की प्रक्रिया को दोबारा आरंभ किया जाए।उन्होंने कहा कि वर्तमान में हजारों तकसीम (भूमि विभाजन) के मामले लटके हुए हैं, जिनका कारण पिछली दो पीढ़ियों में हुए बंटवारे और भू-एकत्रीकरण विभाग का समाप्त किया जाना है। मोदगिल ने बताया कि एक-एक खसरा नंबर में छह-छह मालिक हो गए हैं, जिससे विवाद और झगड़े बढ़ते जा रहे हैं। यह भी बताया कि पिछले भू-एकत्रीकरण के दौरान गांव के लोगों ने व्यक्तिगत लाभ के चलते गांव की सामूहिक आवश्यकताओं के लिए भूमि नहीं छोड़ी। इसके कारण सड़कें, रास्ते, खेल मैदान, सराय और युवा भवन जैसी सुविधाओं के लिए आज गांवों को भारी अभाव का सामना करना पड़ रहा है।
मोदगिल ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार भू-एकत्रीकरण की प्रक्रिया दोबारा शुरू करती है तो जमीनों का वैज्ञानिक और संतुलित वितरण संभव होगा। इसके साथ ही गांवों में रास्ते, सड़कें और अन्य आवश्यक भूमि भी सुगमता से उपलब्ध हो सकेगी, जिससे आपसी झगड़े और अदालती विवाद खत्म होंगे। राष्ट्रीय किसान संगठन ने लोकहित में यह मांग की है कि हिमाचल प्रदेश में भू-एकत्रीकरण की प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से दोबारा प्रारंभ किया जाए, ताकि गांवों में शांति, विकास और सुव्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।
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संवाद न्यूज एजेंसी
थानाकलां (ऊना)। राष्ट्रीय किसान संगठन हिमाचल प्रदेश के नेता देशराज मोदगिल ने सरकार से मांग की है कि किसानों की समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए राज्य में भू-एकत्रीकरण (कन्सोलिडेशन) की प्रक्रिया को दोबारा आरंभ किया जाए।उन्होंने कहा कि वर्तमान में हजारों तकसीम (भूमि विभाजन) के मामले लटके हुए हैं, जिनका कारण पिछली दो पीढ़ियों में हुए बंटवारे और भू-एकत्रीकरण विभाग का समाप्त किया जाना है। मोदगिल ने बताया कि एक-एक खसरा नंबर में छह-छह मालिक हो गए हैं, जिससे विवाद और झगड़े बढ़ते जा रहे हैं। यह भी बताया कि पिछले भू-एकत्रीकरण के दौरान गांव के लोगों ने व्यक्तिगत लाभ के चलते गांव की सामूहिक आवश्यकताओं के लिए भूमि नहीं छोड़ी। इसके कारण सड़कें, रास्ते, खेल मैदान, सराय और युवा भवन जैसी सुविधाओं के लिए आज गांवों को भारी अभाव का सामना करना पड़ रहा है।
मोदगिल ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार भू-एकत्रीकरण की प्रक्रिया दोबारा शुरू करती है तो जमीनों का वैज्ञानिक और संतुलित वितरण संभव होगा। इसके साथ ही गांवों में रास्ते, सड़कें और अन्य आवश्यक भूमि भी सुगमता से उपलब्ध हो सकेगी, जिससे आपसी झगड़े और अदालती विवाद खत्म होंगे। राष्ट्रीय किसान संगठन ने लोकहित में यह मांग की है कि हिमाचल प्रदेश में भू-एकत्रीकरण की प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से दोबारा प्रारंभ किया जाए, ताकि गांवों में शांति, विकास और सुव्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।
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