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Una News: बारिश का न होना फसलों के लिए बना खतरा, मक्की और हरी सब्जियों की वृद्धि पर असर
Sun, 14 Jul 2024 02:10 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Sun, 14 Jul 2024 02:10 AM IST
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किसानों के लिए धान की फसल में पानी खड़ा रखना भी बना चुनौती
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिला में बीते करीब एक सप्ताह से बारिश नहीं होने के कारण फसलों पर भारी खतरा मंडराने लगा है। पानी की कमी के कारण गैरसिंचित इलाकों में मक्की जैसी फैसले अंकुरित नहीं हो पा रही हैं। वहीं, सिंचित इलाकों में भी किसानों को फसलों की लगातार सिंचाई करनी पड़ रही है, लेकिन सिंचाई का अपनी फसल की वृद्धि के लिए नाकाफी साबित हो रहा है।
किसानों की मानें तो इस समय फसलों को बारिश की सख्त जरूरत है। जानकारी के अनुसार जिला में करीब 25000 हेक्टेयर भूमि पर मक्की की खेती हो रही है। वहीं, 500 हेक्टेयर से अधिक जमीन पर हरी सब्जियां उगाई गई हैं। इसके अलावा धान जैसी फैसले भी रोपी गई है। वर्तमान में सभी फसलों के लिए बारिश का पानी महत्वपूर्ण माना जाता है। क्षेत्र में शुक्रवार और शनिवार को बारिश का अलर्ट जारी होने के बावजूद बूंदाबांदी भी नहीं हुई, जिससे किसानों का हौसला टूटा है। किसानों में रणजीत सिंह, राकेश कुमार, रविंद्र कुमार, अमनजीत सैनी, भूपेंद्र सिंह ने कहा कि मानसून इस बार ऊना में बेहद कम बरसा है। यह फसलों के लिहाज से चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि अगर यही हालत रही तो फसलों की वृद्धि रुक जाएगी और आने वाले दिनों में भारी नुकसान भी होगा।
कृषि विभाग उपनिदेशक कुलभूषण दीवान ने कहा कि बेशक बारिश का पानी फसलों के लिए किसी वरदान से काम नहीं है। इस समय फसलों को सिंचाई के साथ बारिश की सख्त जरूरत है। हालांकि किसान अपने स्तर पर प्रयास कर रहे हैं, लेकिन बिन बारिश फसलों को बड़ा करना अपने आप में एक चुनौती है। विशेष कर गैरसिंचित इलाकों में तो बिना बारिश के मक्की जैसी फसल को उगाना नामुमकिन है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिला में बीते करीब एक सप्ताह से बारिश नहीं होने के कारण फसलों पर भारी खतरा मंडराने लगा है। पानी की कमी के कारण गैरसिंचित इलाकों में मक्की जैसी फैसले अंकुरित नहीं हो पा रही हैं। वहीं, सिंचित इलाकों में भी किसानों को फसलों की लगातार सिंचाई करनी पड़ रही है, लेकिन सिंचाई का अपनी फसल की वृद्धि के लिए नाकाफी साबित हो रहा है।
किसानों की मानें तो इस समय फसलों को बारिश की सख्त जरूरत है। जानकारी के अनुसार जिला में करीब 25000 हेक्टेयर भूमि पर मक्की की खेती हो रही है। वहीं, 500 हेक्टेयर से अधिक जमीन पर हरी सब्जियां उगाई गई हैं। इसके अलावा धान जैसी फैसले भी रोपी गई है। वर्तमान में सभी फसलों के लिए बारिश का पानी महत्वपूर्ण माना जाता है। क्षेत्र में शुक्रवार और शनिवार को बारिश का अलर्ट जारी होने के बावजूद बूंदाबांदी भी नहीं हुई, जिससे किसानों का हौसला टूटा है। किसानों में रणजीत सिंह, राकेश कुमार, रविंद्र कुमार, अमनजीत सैनी, भूपेंद्र सिंह ने कहा कि मानसून इस बार ऊना में बेहद कम बरसा है। यह फसलों के लिहाज से चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि अगर यही हालत रही तो फसलों की वृद्धि रुक जाएगी और आने वाले दिनों में भारी नुकसान भी होगा।
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कृषि विभाग उपनिदेशक कुलभूषण दीवान ने कहा कि बेशक बारिश का पानी फसलों के लिए किसी वरदान से काम नहीं है। इस समय फसलों को सिंचाई के साथ बारिश की सख्त जरूरत है। हालांकि किसान अपने स्तर पर प्रयास कर रहे हैं, लेकिन बिन बारिश फसलों को बड़ा करना अपने आप में एक चुनौती है। विशेष कर गैरसिंचित इलाकों में तो बिना बारिश के मक्की जैसी फसल को उगाना नामुमकिन है।
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