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हिमाचल: फार्मा उद्योगों को लाइसेंस लेना होगा आसान, सीडीएससीओ ने ड्रग लाइसेंसिंग प्रणाली लागू करने के लिए कहा
Sat, 25 Apr 2026 12:01 PM IST
Ankesh Dogra
रविंद्र शर्मा, ऊना।
रविंद्र शर्मा, ऊना।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Sat, 25 Apr 2026 12:01 PM IST
सार
सीडीएससीओ ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लाइसेंसिंग प्राधिकरणों को डोजियर आधारित ड्रग लाइसेंसिंग लागू करने के दिशा-निर्देश दिए हैं। इससे दवा निर्माण लाइसेंस प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सरल और एक समान होगी, जिसका सीधा लाभ हिमाचल प्रदेश में स्थापित फार्मा उद्योगों को मिलेगा। पढ़ें पूरी खबर...
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डिजाइन फोटो।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लाइसेंसिंग प्राधिकरणों को डोजियर आधारित ड्रग लाइसेंसिंग लागू करने के दिशा-निर्देश दिए हैं। यह कदम दवाओं के निर्माण लाइसेंस की प्रक्रिया को एक समान और पारदर्शी बनाने की दिशा में अहम साबित होगा।
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इससे दवा निर्माण लाइसेंस प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सरल और एक समान होगी, जिसका सीधा लाभ हिमाचल प्रदेश में स्थापित फार्मा उद्योगों को मिलेगा। हिमाचल प्रदेश के बल्क ड्रग पार्क परियोजना को केंद्र सरकार के नए फैसले से बड़ी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
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डोजियर प्रणाली को लेकर भारत के औषधि महानियंत्रक राजीव सिंह रघुवंशी ने हिमाचल प्रदेश सहित सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के को पत्र जारी किया है। इसमें देशभर में दवाओं के निर्माण लाइसेंस की प्रक्रिया को एक समान और पारदर्शी बनाने की दिशा में सीडीएससीओ ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लाइसेंसिंग प्राधिकरणों को डोजियर आधारित ड्रग लाइसेंसिंग प्रणाली अपनाने को कहा है।
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यह गाइडेंस डॉक्यूमेंट पहले ही राज्यों के नियामक अधिकारियों की बैठक में प्रस्तुत किया जा चुका है और अधिकांश राज्यों ने इसे सिद्धांत रूप में मंजूरी दे दी है। अब इसे ऑनलाइन नेशनल ड्रग लाइसेंसिंग सिस्टम (ओएनडीएलएस) पोर्टल पर भी लागू किया जा चुका है।
दवा निर्माण लाइसेंस लेने के लिए आवेदन करने वाले उद्योगों को अब विस्तृत डोजियर जमा करना होगा। इसमें कंपनी से जुड़ी प्रशासनिक जानकारी के साथ-साथ उत्पाद से संबंधित तकनीकी जानकारी भी शामिल रहेगी। इस प्रणाली के लागू होने से देश में ऐ जैसी लाइसेंसिंग प्रक्रिया रहेगी । उद्योगों को अलग-अलग राज्यों में अलग नियमों का सामना न करना पड़े।
यह होता हे डोजियर : यह एक आवश्यक दस्तावेज है, जिसमें दवा की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावकारिता की जानकारी होती है, जो बाजार में दवा उतारने के लिए नियामक प्राधिकरणों को सौंपा जाता है। फार्मा उद्योगों को अपने उत्पादों बाजार में उतारने से पहले इसी के मध्यम से मंजूरी मिलेगी।