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Una News: गर्मी की मार... तपती जमीन में मुरझाने लगीं फसलें
Mon, 27 May 2024 03:19 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Mon, 27 May 2024 03:19 AM IST
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ऊना। जिला में गेहूं की कटाई के बाद सिंचित इलाकों में मक्की और हरी सब्जियां उगाई जा रही हैं, लेकिन क्षेत्र में लगातार पड़ रही तेज धूप ने फसलों की वृद्धि रोक दी है। वहीं, मक्की की अगेती फसल तो झुलसने लगी है। किसान हर दूसरे से तीसरे दिन फसलों की सिंचाई कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद फसलें मुरझाती ही जा रही हैं।
किसानों ने कहा कि इस समय बारिश का होना बहुत जरूरी है, क्योंकि बारिश से जहां पौधों की वृद्धि में तेजी आती है, तो वहीं तापमान भी कुछ दिन के लिए कम होगा। जानकारी के अनुसार जिला का अधिकतम तापमान इस समय 44 डिग्री के आसपास चल रहा है। दोपहर के समय लू और तेज धूप का प्रकोप इतना बढ़ जाता है कि फसलों को हरा-भरा रखना भी किसानों के लिए बेहद मुश्किल हो चुका है। क्षेत्र में इस समय 2000 हेक्टेयर के आसपास अगेती मक्की उगाई गई है, जबकि इतने ही इलाके में भिंडी, शिमला मिर्च, बैंगन, खीरा, घीया-कद्दू सहित अन्य फसलें तैयार हो रही हैं। यह फसलें किसानों की आय का अच्छा स्रोत मानी जाती हैं। हालांकि बीते वर्ष समय-समय पर हुई बारिश ने किसानों को राहत दी और उक्त फसलें भी अच्छे तरीके से तैयार हुईं, लेकिन इस बार बारिश के आसार नहीं लग रहे और तापमान बढ़ता जा रहा है।
किसान तरसेम सैनी, अजय कुमार, संजय ठाकुर ने कहा कि बेशक हम अपने स्तर पर फसलों की सिंचाई कर रहे हैं, लेकिन बारिश से होने वाला असर अलग ही होता है। उससे फसलें तेज गति से वृद्धि करती हैं। बारिश से तापमान कम होने का लाभ भी मिलता है। उन्होंने कहा कि एक ओर जहां तपती जमीन पर फसल तैयार करना चुनौती बना हुआ है तो वहीं कीड़े की मार भी रुक नहीं रही। जरूरी दवाइयों का छिड़काव भी बेअसर साबित हो रहा है।
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किसान शाम के समय करें कीटनाशक का छिड़काव
फसलों के लिहाज से वर्तमान में बारिश का होना बेहद जरूरी है। बारिश का पानी फसलों के लिए सबसे उत्तम है। इसके साथ ही कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव शाम के समय करना बेहतर रहता है, क्योंकि कीड़ा रात के ठंडे मौसम में फसल पर कहर बरपाता है।
डाॅक्टर कुलभूषण धीमान, उपनिदेशक, कृषि विभाग, ऊना
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किसानों ने कहा कि इस समय बारिश का होना बहुत जरूरी है, क्योंकि बारिश से जहां पौधों की वृद्धि में तेजी आती है, तो वहीं तापमान भी कुछ दिन के लिए कम होगा। जानकारी के अनुसार जिला का अधिकतम तापमान इस समय 44 डिग्री के आसपास चल रहा है। दोपहर के समय लू और तेज धूप का प्रकोप इतना बढ़ जाता है कि फसलों को हरा-भरा रखना भी किसानों के लिए बेहद मुश्किल हो चुका है। क्षेत्र में इस समय 2000 हेक्टेयर के आसपास अगेती मक्की उगाई गई है, जबकि इतने ही इलाके में भिंडी, शिमला मिर्च, बैंगन, खीरा, घीया-कद्दू सहित अन्य फसलें तैयार हो रही हैं। यह फसलें किसानों की आय का अच्छा स्रोत मानी जाती हैं। हालांकि बीते वर्ष समय-समय पर हुई बारिश ने किसानों को राहत दी और उक्त फसलें भी अच्छे तरीके से तैयार हुईं, लेकिन इस बार बारिश के आसार नहीं लग रहे और तापमान बढ़ता जा रहा है।
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किसान तरसेम सैनी, अजय कुमार, संजय ठाकुर ने कहा कि बेशक हम अपने स्तर पर फसलों की सिंचाई कर रहे हैं, लेकिन बारिश से होने वाला असर अलग ही होता है। उससे फसलें तेज गति से वृद्धि करती हैं। बारिश से तापमान कम होने का लाभ भी मिलता है। उन्होंने कहा कि एक ओर जहां तपती जमीन पर फसल तैयार करना चुनौती बना हुआ है तो वहीं कीड़े की मार भी रुक नहीं रही। जरूरी दवाइयों का छिड़काव भी बेअसर साबित हो रहा है।
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किसान शाम के समय करें कीटनाशक का छिड़काव
फसलों के लिहाज से वर्तमान में बारिश का होना बेहद जरूरी है। बारिश का पानी फसलों के लिए सबसे उत्तम है। इसके साथ ही कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव शाम के समय करना बेहतर रहता है, क्योंकि कीड़ा रात के ठंडे मौसम में फसल पर कहर बरपाता है।
डाॅक्टर कुलभूषण धीमान, उपनिदेशक, कृषि विभाग, ऊना