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Una News: पंडोगा में किसान बोले, मजबूरी में खरीदनी पड़ रही नैनो खाद
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पंडोगा सोसाइटी में इफको शिविर के दौरान गरमाया नैनो खाद का मुद्दा
लोगों ने कहा- बोरी वाली खाद के साथ जबरदस्ती दे रहे नैनो की बोतल
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। हरोली विधानसभा क्षेत्र के पंडोगा गांव स्थित सहकारी सभा कार्यालय में मंगलवार को इफको की ओर से किसान प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। शिविर के दौरान बोरी वाली दानेदार खाद के साथ नैनो तरल खाद की बोतल दिए जाने का मुद्दा किसानों के बीच गरमा गया। किसानों का कहना था कि जब उन्हें नैनो खाद की आवश्यकता ही नहीं है तो इसे जबरन क्यों दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो वे इसे स्वयं खरीद लेंगे। किसानों ने आरोप लगाया कि एक बोरी खाद के साथ नैनो खाद लेना अनिवार्य किया जा रहा है, जिससे उनकी लागत दोगुनी हो रही है। किसानों ने मांग उठाई कि अगर इफको नैनो खाद का प्रचलन बढ़ाना चाहता है तो शुरुआत में इसे किसानों को मुफ्त उपलब्ध कराना चाहिए। किसानों ने बताया कि वर्तमान में यूरिया की एक बोरी लगभग 265 रुपये और नैनो यूरिया की एक बोतल लगभग 240 रुपये की है। दोनों लेने पर लागत 500 रुपये से अधिक हो जाती है, ऐसे में किसान की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
इधर, शिविर में मौजूद इफको के क्षेत्रीय प्रबंधक माशोक अहमद ने कहा कि नैनो खाद खेती का भविष्य है। यह न केवल बेहतर उत्पादन देती है बल्कि पर्यावरण के लिए भी लाभकारी है। उन्होंने कहा कि शुरुआत में किसानों को झिझक हो सकती है, लेकिन जल्द ही यह कृषि क्षेत्र का बड़ा उत्पाद साबित होगा। अहमद ने बताया कि बोरी वाली खाद पर सरकार को करोड़ों रुपये की सब्सिडी देनी पड़ती है, जबकि नैनो खाद पर सब्सिडी की आवश्यकता नहीं है। किसानों को सलाह दी गई कि वे अपनी शंकाओं के समाधान के लिए इफको पदाधिकारियों से संपर्क करें और आवश्यकता अनुसार नैनो खाद का उपयोग करें।
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लोगों ने कहा- बोरी वाली खाद के साथ जबरदस्ती दे रहे नैनो की बोतल
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। हरोली विधानसभा क्षेत्र के पंडोगा गांव स्थित सहकारी सभा कार्यालय में मंगलवार को इफको की ओर से किसान प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। शिविर के दौरान बोरी वाली दानेदार खाद के साथ नैनो तरल खाद की बोतल दिए जाने का मुद्दा किसानों के बीच गरमा गया। किसानों का कहना था कि जब उन्हें नैनो खाद की आवश्यकता ही नहीं है तो इसे जबरन क्यों दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो वे इसे स्वयं खरीद लेंगे। किसानों ने आरोप लगाया कि एक बोरी खाद के साथ नैनो खाद लेना अनिवार्य किया जा रहा है, जिससे उनकी लागत दोगुनी हो रही है। किसानों ने मांग उठाई कि अगर इफको नैनो खाद का प्रचलन बढ़ाना चाहता है तो शुरुआत में इसे किसानों को मुफ्त उपलब्ध कराना चाहिए। किसानों ने बताया कि वर्तमान में यूरिया की एक बोरी लगभग 265 रुपये और नैनो यूरिया की एक बोतल लगभग 240 रुपये की है। दोनों लेने पर लागत 500 रुपये से अधिक हो जाती है, ऐसे में किसान की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
इधर, शिविर में मौजूद इफको के क्षेत्रीय प्रबंधक माशोक अहमद ने कहा कि नैनो खाद खेती का भविष्य है। यह न केवल बेहतर उत्पादन देती है बल्कि पर्यावरण के लिए भी लाभकारी है। उन्होंने कहा कि शुरुआत में किसानों को झिझक हो सकती है, लेकिन जल्द ही यह कृषि क्षेत्र का बड़ा उत्पाद साबित होगा। अहमद ने बताया कि बोरी वाली खाद पर सरकार को करोड़ों रुपये की सब्सिडी देनी पड़ती है, जबकि नैनो खाद पर सब्सिडी की आवश्यकता नहीं है। किसानों को सलाह दी गई कि वे अपनी शंकाओं के समाधान के लिए इफको पदाधिकारियों से संपर्क करें और आवश्यकता अनुसार नैनो खाद का उपयोग करें।
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