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सच्ची श्रद्धा और तप से असंभव भी संभव : शास्त्री
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संवाद न्यूज एजेंसी
नंदपुर (ऊना)। श्री शिव महापुराण कथा ज्ञान महायज्ञ के छठे दिवस पर आचार्य श्री सुरेंद्र शास्त्री जी ने माता पार्वती की कठोर तपस्या और भगवान शिव से उनके विवाह की कथा का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि यह प्रसंग आत्मबल, समर्पण और साधना की सर्वोच्च मिसाल है। आचार्य ने बताया कि माता पार्वती ने पूर्व जन्म में सती रूप में जन्म लेकर शिव जी को पति रूप में प्राप्त किया था। दक्ष प्रजापति की ओर से शिवजी का अपमान किए जाने के बाद सती ने अपने प्राण त्याग दिए थे। अगले जन्म में हिमाचल के राजा हिमवान के घर पार्वती के रूप में जन्म लेकर उन्होंने पुनः शिव को प्राप्त करने का संकल्प लिया। नारद जी की प्रेरणा से पार्वती ने गहन तपस्या की और कठोर साधना से शिवजी को प्रसन्न किया। अंततः भगवान शिव ने पार्वती की भक्ति को स्वीकार कर उन्हें पत्नी रूप में अपनाया। यह प्रसंग दर्शाता है कि सच्ची श्रद्धा और तप से असंभव को भी संभव किया जा सकता है। कथा में बताया गया कि पार्वती की तपस्या से ग्वालगिरि क्षेत्र पवित्र हुआ और उन्हें तपस्या की देवी कहा गया। यह प्रसंग न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि जीवन में साधना, धैर्य और निष्ठा का भी अनुपम उदाहरण है। कथा के दौरान श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे और पूरा वातावरण ‘हर हर महादेव’ और ‘ओम नमः शिवाय’ के जयकारों से गूंज उठा। श्री शिव महापुराण कथा 10 जुलाई से 19 जुलाई तक प्रतिदिन प्रातः 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक देवी मंदिर अंब में आयोजित की जा रही है।
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नंदपुर (ऊना)। श्री शिव महापुराण कथा ज्ञान महायज्ञ के छठे दिवस पर आचार्य श्री सुरेंद्र शास्त्री जी ने माता पार्वती की कठोर तपस्या और भगवान शिव से उनके विवाह की कथा का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि यह प्रसंग आत्मबल, समर्पण और साधना की सर्वोच्च मिसाल है। आचार्य ने बताया कि माता पार्वती ने पूर्व जन्म में सती रूप में जन्म लेकर शिव जी को पति रूप में प्राप्त किया था। दक्ष प्रजापति की ओर से शिवजी का अपमान किए जाने के बाद सती ने अपने प्राण त्याग दिए थे। अगले जन्म में हिमाचल के राजा हिमवान के घर पार्वती के रूप में जन्म लेकर उन्होंने पुनः शिव को प्राप्त करने का संकल्प लिया। नारद जी की प्रेरणा से पार्वती ने गहन तपस्या की और कठोर साधना से शिवजी को प्रसन्न किया। अंततः भगवान शिव ने पार्वती की भक्ति को स्वीकार कर उन्हें पत्नी रूप में अपनाया। यह प्रसंग दर्शाता है कि सच्ची श्रद्धा और तप से असंभव को भी संभव किया जा सकता है। कथा में बताया गया कि पार्वती की तपस्या से ग्वालगिरि क्षेत्र पवित्र हुआ और उन्हें तपस्या की देवी कहा गया। यह प्रसंग न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि जीवन में साधना, धैर्य और निष्ठा का भी अनुपम उदाहरण है। कथा के दौरान श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे और पूरा वातावरण ‘हर हर महादेव’ और ‘ओम नमः शिवाय’ के जयकारों से गूंज उठा। श्री शिव महापुराण कथा 10 जुलाई से 19 जुलाई तक प्रतिदिन प्रातः 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक देवी मंदिर अंब में आयोजित की जा रही है।