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Una News: रिजर्व प्राइस से 17 लाख रुपये अधिक पर बिके प्रवेश शुल्क नाके
Tue, 03 Mar 2026 06:59 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Tue, 03 Mar 2026 06:59 AM IST
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गगरेट (ऊना)। प्रदेश सरकार का राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से प्रदेश की सीमाओं पर लगे प्रवेश शुल्क नाकों पर बेशक शुल्क बढ़ाने का एलान किया हो लेकिन जिस प्रकार जिला ऊना में नाके नीलाम हुए, उससे कई सवाल उठ खड़े हुए हैं।
जिला ऊना में इस बार प्रवेश शुल्क नाकों के दो यूनिट बनाए गए थे जिनका रिजर्व प्राइस 14 करोड़ 68 लाख, 82 हजार 34 रुपये व 22 करोड़ तीन लाख 23 हजार 51 रुपये रखा गया था। मजेदार बात यह कि दोनों यूनिट महज 17 लाख रुपये की बढ़ोतरी के साथ दे दिए गए हैं। ऐसे में जिले की जनता ने सवाल उठाना शुरू कर दिए कि क्या महज ठेकेदारों को लाभ देने के लिए ही प्रवेश शुल्क पर्ची की दरें बढ़ाई गई।
द विशाल हिमाचल गुड्स ट्रांसपोर्ट सोसायटी के प्रधान सतीश कुमार गोगी, पवन कुमार, बलकार सिंह सहित सोसायटी के कई सदस्यों ने सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसी क्या वजह रही कि जिले के प्रवेश शुल्क नाके रिजर्व प्राइस से महज 17 लाख रुपये अधिक पर ही बिक गए।
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बद्दी व बिलासपुर के प्रवेश शुल्क नाके रिजर्व प्राइस से करोड़ों रुपये अधिक में बिके हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार के प्रवेश शुल्क बढ़ाने से ट्रांसपोर्टर्स पर तो बोझ बढ़ा ही है लेकिन अगर इसका लाभ सीधा सरकार को होता तो ज्यादा अच्छा था। ऐसा लग रहा है कि प्रवेश शुल्क बढ़ाने का प्रदेश सरकार को कम और इन यूनिट को लेने वालों को ज्यादा फायदा होगा।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री शिमला में बैठकर प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए तो कई निर्णय लेते हैं लेकिन धरातल पर इन्हें अमलीजामा नहीं पहनाया जा रहा है। जिस तरह रिजर्व प्राइस से महज 17 लाख रुपये अधिक पर ये यूनिट बिके हैं, उन्हें देखकर तो यही लग रहा है।
उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की है कि इसका अवलोकन करें कि आखिर क्यों सरकारी खजाने में पैसे नहीं आ पा रहे हैं।
उधर राज्य कर एवं आबकारी विभाग के उपायुक्त विशाल गोरला का कहना है कि इस बार जिले के प्रवेश शुल्क नाके रिजर्व प्राइस से 17 लाख रुपये अधिक में बिके हैं। प्रदेश सरकार को इससे 36 करोड़ 89 लाख पांच हजार 85 रुपये का राजस्व प्राप्त होगा।
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जिला ऊना में इस बार प्रवेश शुल्क नाकों के दो यूनिट बनाए गए थे जिनका रिजर्व प्राइस 14 करोड़ 68 लाख, 82 हजार 34 रुपये व 22 करोड़ तीन लाख 23 हजार 51 रुपये रखा गया था। मजेदार बात यह कि दोनों यूनिट महज 17 लाख रुपये की बढ़ोतरी के साथ दे दिए गए हैं। ऐसे में जिले की जनता ने सवाल उठाना शुरू कर दिए कि क्या महज ठेकेदारों को लाभ देने के लिए ही प्रवेश शुल्क पर्ची की दरें बढ़ाई गई।
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द विशाल हिमाचल गुड्स ट्रांसपोर्ट सोसायटी के प्रधान सतीश कुमार गोगी, पवन कुमार, बलकार सिंह सहित सोसायटी के कई सदस्यों ने सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसी क्या वजह रही कि जिले के प्रवेश शुल्क नाके रिजर्व प्राइस से महज 17 लाख रुपये अधिक पर ही बिक गए।
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बद्दी व बिलासपुर के प्रवेश शुल्क नाके रिजर्व प्राइस से करोड़ों रुपये अधिक में बिके हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार के प्रवेश शुल्क बढ़ाने से ट्रांसपोर्टर्स पर तो बोझ बढ़ा ही है लेकिन अगर इसका लाभ सीधा सरकार को होता तो ज्यादा अच्छा था। ऐसा लग रहा है कि प्रवेश शुल्क बढ़ाने का प्रदेश सरकार को कम और इन यूनिट को लेने वालों को ज्यादा फायदा होगा।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री शिमला में बैठकर प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए तो कई निर्णय लेते हैं लेकिन धरातल पर इन्हें अमलीजामा नहीं पहनाया जा रहा है। जिस तरह रिजर्व प्राइस से महज 17 लाख रुपये अधिक पर ये यूनिट बिके हैं, उन्हें देखकर तो यही लग रहा है।
उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की है कि इसका अवलोकन करें कि आखिर क्यों सरकारी खजाने में पैसे नहीं आ पा रहे हैं।
उधर राज्य कर एवं आबकारी विभाग के उपायुक्त विशाल गोरला का कहना है कि इस बार जिले के प्रवेश शुल्क नाके रिजर्व प्राइस से 17 लाख रुपये अधिक में बिके हैं। प्रदेश सरकार को इससे 36 करोड़ 89 लाख पांच हजार 85 रुपये का राजस्व प्राप्त होगा।