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Una News: सड़क किनारे बिखरी चीड़ की सूखी पत्तियां बनी खतरे की घंटी
Tue, 16 Apr 2024 02:01 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Tue, 16 Apr 2024 02:01 AM IST
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अमलैहड़ जंगल को एक चिंगारी कर सकती है सब स्वाह, आखिर कब संजीदा होगा विभाग
संवाद न्यूज एजेंसी
मुबारिकपुर (ऊना)। बारूद के ढेर पर जंगलों की हरियाली की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। वनों को आग से बचाने की पूरी तैयारी की हुंकार तो विभाग द्वारा भरी जाती है, लेकिन धरातल पर कितनी तीव्रता व सतर्कता से उसे अमलीजामा पहनाया जाता है, उसका अंदाजा हरे भरे वन क्षेत्रों और जंगलों के आसपास देखा जा सकता है।
मुख्य सड़कों और संपर्क मार्गों के दोनों किनारों पर चीड़ की सूखी पत्तियां अभी तक बिखरी पड़ी हैं। ग्रामीणों में सुखविंदर, आशीष कुमार, शिव कुमार, मनोज शर्मा का कहना है कि विभाग समय रहते अमलैहड़ जंगल क्षेत्र में सड़कों के किनारों से सटी इन चीड़ की पत्तियों को तुरंत हटाने के लिए युद्ध स्तर पर अभियान चलाएं, अन्यथा गर्मी के बढ़ते प्रकोप के चलते मानव भूल से हरे-भरे वनों की हरियाली एक बार फिर आग के तांडव का शिकार बन सकती है। एक छोटी सी चूक हरियाली को आग के तांडव का ग्रास बना सकती है, जिस पर विभाग को संजीदा होना समय की मांग है।
गर्मियों के मौसम में पारा निरन्तर बढ़ना शुरू हो गया है। जहां गर्मी बढ़ना शुरू हो गई है, ऐसे में वन क्षेत्रों से होकर गुजरने वाली सड़कों के किनारे चीड़ की सूखी पत्तियां दोनों तरफ बिखरी हुई हैं। फायर सीजन शुरू होने के बाद भी वन विभाग ने वनों को आग से बचाने के लिए बड़े-बड़े दावे किए, लेकिन वास्तविकता के धरातल पर अगर वन क्षेत्रों से गुजरने वाली सड़कों के किनारों पर नजर दौड़ाई जाए तो सूखी चीड़ की पत्तियां सीधा आगजनी की घटना की आशंका को बढ़ाती नजर आ रही हैं।
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उधर, वन विभाग ऊना के वनमंडलाधिकारी सुशील राणा का कहना है कि क्षेत्र के बीट अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि ऐसे क्षेत्रों में समय रहते चीड़् की पत्तियों की साफ-सफाई करवाएं, ताकि आग की कोई अप्रिय घटना घटित न हाे सके। इसमें ग्रामीणों का भी सहयोग सर्वोपरि है।
फोटो-- अमलैहड़ जंगल क्षेत्र में सड़क के किनारे बिखरी पत्तियां
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संवाद न्यूज एजेंसी
मुबारिकपुर (ऊना)। बारूद के ढेर पर जंगलों की हरियाली की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। वनों को आग से बचाने की पूरी तैयारी की हुंकार तो विभाग द्वारा भरी जाती है, लेकिन धरातल पर कितनी तीव्रता व सतर्कता से उसे अमलीजामा पहनाया जाता है, उसका अंदाजा हरे भरे वन क्षेत्रों और जंगलों के आसपास देखा जा सकता है।
मुख्य सड़कों और संपर्क मार्गों के दोनों किनारों पर चीड़ की सूखी पत्तियां अभी तक बिखरी पड़ी हैं। ग्रामीणों में सुखविंदर, आशीष कुमार, शिव कुमार, मनोज शर्मा का कहना है कि विभाग समय रहते अमलैहड़ जंगल क्षेत्र में सड़कों के किनारों से सटी इन चीड़ की पत्तियों को तुरंत हटाने के लिए युद्ध स्तर पर अभियान चलाएं, अन्यथा गर्मी के बढ़ते प्रकोप के चलते मानव भूल से हरे-भरे वनों की हरियाली एक बार फिर आग के तांडव का शिकार बन सकती है। एक छोटी सी चूक हरियाली को आग के तांडव का ग्रास बना सकती है, जिस पर विभाग को संजीदा होना समय की मांग है।
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गर्मियों के मौसम में पारा निरन्तर बढ़ना शुरू हो गया है। जहां गर्मी बढ़ना शुरू हो गई है, ऐसे में वन क्षेत्रों से होकर गुजरने वाली सड़कों के किनारे चीड़ की सूखी पत्तियां दोनों तरफ बिखरी हुई हैं। फायर सीजन शुरू होने के बाद भी वन विभाग ने वनों को आग से बचाने के लिए बड़े-बड़े दावे किए, लेकिन वास्तविकता के धरातल पर अगर वन क्षेत्रों से गुजरने वाली सड़कों के किनारों पर नजर दौड़ाई जाए तो सूखी चीड़ की पत्तियां सीधा आगजनी की घटना की आशंका को बढ़ाती नजर आ रही हैं।
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उधर, वन विभाग ऊना के वनमंडलाधिकारी सुशील राणा का कहना है कि क्षेत्र के बीट अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि ऐसे क्षेत्रों में समय रहते चीड़् की पत्तियों की साफ-सफाई करवाएं, ताकि आग की कोई अप्रिय घटना घटित न हाे सके। इसमें ग्रामीणों का भी सहयोग सर्वोपरि है।
फोटो