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Una News: चिकित्सकों की हड़ताल, मरीजों पर पड़ रही मार
Wed, 06 Mar 2024 12:15 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Wed, 06 Mar 2024 12:15 AM IST
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ऊना। चिकित्सकों की पेन डाउन हड़ताल मरीजों पर भारी पड़ती नजर आई है। क्षेत्रीय अस्पताल में दोपहर 12 बजे के बाद ओपीडी के बाहर कतारों में अपनी बारी का इंतजार करते रहे। अस्पताल में रोजाना 400 से 500 मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। इसके अलावा गायनी ओपीडी के बाहर भी मरीजों की काफी संख्या रहती है।
वर्तमान में पेन डाउन स्ट्राइक के चलते मरीज की दिक्कतें बढ़ती जा रही है। दूसरी तरफ चिकित्सक भी अपनी मांगों को लेकर पेन डाउन स्ट्राइक पर डटे हुए हैं। चिकित्सकों की मांगों को लेकर अभी तक सरकार की तरफ से कोई फैसला नहीं लिया गया है। ऐसे में आम जन स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करने के लिए अस्पतालों में इंतजार करने के लिए मजबूर हैं। क्षेत्रीय अस्पताल में कुछ मरीज तो पेन डाउन स्ट्राइक की जानकारी होने पर अस्पताल में स्ट्राइक खत्म करने के लिए पहुंचते हैं। दूसरी तरफ जानकारी के अभाव में दूरदराज क्षेत्रों से आने वाले मरीज काफी परेशान हो रहे हैं। आलम यह है कि मरीज को चिकित्सक के पास ओपीडी में जांच करवाने, टेस्ट करवाने और अन्य प्रक्रिया पूरा करने के लिए एक दिन का समय लग जा रहा है। ऐसे में कई बार टेस्ट रिपोर्ट देरी से मिलने या अगले दिन मिलने से दूसरे दिन भी अस्पताल के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। इससे मरीजों की परेशानी भी बढ़ती जा रही है।
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वर्तमान में पेन डाउन स्ट्राइक के चलते मरीज की दिक्कतें बढ़ती जा रही है। दूसरी तरफ चिकित्सक भी अपनी मांगों को लेकर पेन डाउन स्ट्राइक पर डटे हुए हैं। चिकित्सकों की मांगों को लेकर अभी तक सरकार की तरफ से कोई फैसला नहीं लिया गया है। ऐसे में आम जन स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करने के लिए अस्पतालों में इंतजार करने के लिए मजबूर हैं। क्षेत्रीय अस्पताल में कुछ मरीज तो पेन डाउन स्ट्राइक की जानकारी होने पर अस्पताल में स्ट्राइक खत्म करने के लिए पहुंचते हैं। दूसरी तरफ जानकारी के अभाव में दूरदराज क्षेत्रों से आने वाले मरीज काफी परेशान हो रहे हैं। आलम यह है कि मरीज को चिकित्सक के पास ओपीडी में जांच करवाने, टेस्ट करवाने और अन्य प्रक्रिया पूरा करने के लिए एक दिन का समय लग जा रहा है। ऐसे में कई बार टेस्ट रिपोर्ट देरी से मिलने या अगले दिन मिलने से दूसरे दिन भी अस्पताल के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। इससे मरीजों की परेशानी भी बढ़ती जा रही है।
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