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दियोली सभा घोटाला : फैसले के खिलाफ कमेटी करेगी अपील
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गगरेट(ऊना)। दियोली सहकारी सभा में घोटाले को लेकर सहकारिता विभाग के फैसले के विरोध में सभा कमेटी अपील करेगी। दियोली सहकारी सभा में 13.20 करोड़ के घपले में सहकारिता विभाग ने 2013 से 2018 की कमेटी को खाताधारकों के पैसे लौटाने का आदेश दिए है। इसके लिए तीन माह का समय दिया है।
सहकारिता विभाग के इस फैसले के खिलाफ कमेटी अपील करने जा रही है। कमेटी का कहना है कि मामले की जांच विभाग ने सही ढंग से नहीं की है। एक ही कमेटी पर 13 करोड़ 20 लाख के गबन का आरोप विभाग ने लगाया है। कमेटी का सभा में ऋण मामलों में दखल होता है।
सभा की जांच में सामने आया है कि गबन एफडीआर में है। कमेटी को एफडीआर की कैसे जानकारी होगी, जब वो सभा में दर्ज ही नहीं हुई। सभा में दर्ज एफडीआर के लिए सभा उत्तरदायी हो सकती है, लेकिन उसमें भी सभा सचिव ही पैसे के लेन-देन का हिसाब रखता है। ऋण सभा सदस्य जरूर हस्ताक्षर करते हैं और उस पर भी अंतिम फैसला सचिव का होता है। पांच साल में इतना पैसा सभा में न आया न सभा से निकल सकता है। ऐसे में विभाग ने आधी-अधूरी जांच करके एक ही कमेटी पर आरोप लगाया है।
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सभा से कुछ पैसे गैर सदस्यों और फैक्टरी के अकाउंट में भी गए। उसके लिए विभाग ने क्या कार्रवाई की। नियमानुसार सभा में गैर सदस्य लेन-देन नहीं कर सकते हैं। सभा की जांच में पक्षपात किया जा रहा है। इस फैसले के खिलाफ कमेटी अपील करेगी।
सहकारिता सभा के पूर्व अध्यक्ष अनिल डढवाल ने कहा कि सहकारिता विभाग एक ही कमेटी पर गबन कैसे डाल सकता है। सभा की जांच अधूरी हुई है। फैसले के खिलाफ अपील की जाएगी।
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सहकारिता विभाग के इस फैसले के खिलाफ कमेटी अपील करने जा रही है। कमेटी का कहना है कि मामले की जांच विभाग ने सही ढंग से नहीं की है। एक ही कमेटी पर 13 करोड़ 20 लाख के गबन का आरोप विभाग ने लगाया है। कमेटी का सभा में ऋण मामलों में दखल होता है।
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सभा की जांच में सामने आया है कि गबन एफडीआर में है। कमेटी को एफडीआर की कैसे जानकारी होगी, जब वो सभा में दर्ज ही नहीं हुई। सभा में दर्ज एफडीआर के लिए सभा उत्तरदायी हो सकती है, लेकिन उसमें भी सभा सचिव ही पैसे के लेन-देन का हिसाब रखता है। ऋण सभा सदस्य जरूर हस्ताक्षर करते हैं और उस पर भी अंतिम फैसला सचिव का होता है। पांच साल में इतना पैसा सभा में न आया न सभा से निकल सकता है। ऐसे में विभाग ने आधी-अधूरी जांच करके एक ही कमेटी पर आरोप लगाया है।
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सभा से कुछ पैसे गैर सदस्यों और फैक्टरी के अकाउंट में भी गए। उसके लिए विभाग ने क्या कार्रवाई की। नियमानुसार सभा में गैर सदस्य लेन-देन नहीं कर सकते हैं। सभा की जांच में पक्षपात किया जा रहा है। इस फैसले के खिलाफ कमेटी अपील करेगी।
सहकारिता सभा के पूर्व अध्यक्ष अनिल डढवाल ने कहा कि सहकारिता विभाग एक ही कमेटी पर गबन कैसे डाल सकता है। सभा की जांच अधूरी हुई है। फैसले के खिलाफ अपील की जाएगी।