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दियोली सहकारी सभा गबन मामले में सहायक रजिस्ट्रार शिमला तलब
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Deoli Cooperative society embazzlement case : Distt assistant registrar called with record at Shimla
गगरेट (ऊना)। दियोली सहकारी सभा में गबन मामले में जिला सहायक रजिस्ट्रार अधिकारी को रिकॉर्ड सहित रजिस्ट्रार सहकारी सभा शिमला में 29 नवंबर को तलब किया गया है।
सहायक रजिस्ट्रार अधिकारी ने दियोली सहकारी सभा में 13 करोड़ 20 लाख रुपये के गबन मामले में 2013 से 2018 की कमेटी के सात सदस्यों सहित सचिव को दोषी माना था। इसकी जांच पुलिस और सहकारिता विभाग ने की।
सहकारिता विभाग की जांच अनुसार 2013 की कमेटी ने ही गबन किया और कमेटी सदस्यों को दोषी मानते हुए सभी की संपत्ति अटैच करके गबन के पैसे वसूलने की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। आरोपी कमेटी के सदस्यों ने इस फैसले के खिलाफ अपील की थी। उसी की सुनवाई के लिए सहायक पंजीयक अधिकारी को शिमला में रिकॉर्ड सहित बुलाया गया है।
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सहकारिता विभाग की जांच पर आंच
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि सहकारी सभा का रिकॉर्ड पुलिस ने जब्त किया हुआ है। ऐसे में सहकारी सभा रजिस्ट्रार अधिकारी ने कमेटी को दोषी किस आधार पर माना। दूसरा सबसे बड़ा प्रश्न यह भी है कि कमेटी उस पैसे के लिए दोषी मानी जा सकती है जो सभा में आया।
शुरुआती जांच में खुलासा हुआ कि एफडीआर का पैसा तो खाताधारकों से लिया गया, लेकिन बदले में उसका रिकॉर्ड सहकारी सभा को नहीं बताया गया। ऐसे में जो पैसे सहकारी सभा में दर्ज ही नहीं हुए, उनके लिए कमेटी कैसे दोषी मानी जा सकती है। बहरहाल मामला रजिस्ट्रार शिमला की अदालत में है।
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सहायक रजिस्ट्रार अधिकारी ने दियोली सहकारी सभा में 13 करोड़ 20 लाख रुपये के गबन मामले में 2013 से 2018 की कमेटी के सात सदस्यों सहित सचिव को दोषी माना था। इसकी जांच पुलिस और सहकारिता विभाग ने की।
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सहकारिता विभाग की जांच अनुसार 2013 की कमेटी ने ही गबन किया और कमेटी सदस्यों को दोषी मानते हुए सभी की संपत्ति अटैच करके गबन के पैसे वसूलने की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। आरोपी कमेटी के सदस्यों ने इस फैसले के खिलाफ अपील की थी। उसी की सुनवाई के लिए सहायक पंजीयक अधिकारी को शिमला में रिकॉर्ड सहित बुलाया गया है।
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सहकारिता विभाग की जांच पर आंच
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि सहकारी सभा का रिकॉर्ड पुलिस ने जब्त किया हुआ है। ऐसे में सहकारी सभा रजिस्ट्रार अधिकारी ने कमेटी को दोषी किस आधार पर माना। दूसरा सबसे बड़ा प्रश्न यह भी है कि कमेटी उस पैसे के लिए दोषी मानी जा सकती है जो सभा में आया।
शुरुआती जांच में खुलासा हुआ कि एफडीआर का पैसा तो खाताधारकों से लिया गया, लेकिन बदले में उसका रिकॉर्ड सहकारी सभा को नहीं बताया गया। ऐसे में जो पैसे सहकारी सभा में दर्ज ही नहीं हुए, उनके लिए कमेटी कैसे दोषी मानी जा सकती है। बहरहाल मामला रजिस्ट्रार शिमला की अदालत में है।