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Una News: प्राथमिक स्कूलों में टीजीटी की प्रतिनियुक्ति की मांग
Wed, 28 Oct 2026 12:19 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Wed, 28 Oct 2026 12:19 AM IST
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नारी (ऊना)। प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाने के लिए प्राथमिक शिक्षक संघ ने क्लस्टर स्कूलों से टीजीटी अध्यापकों की प्रतिनियुक्ति करने की मांग उठाई है।
संघ और स्कूल प्रबंधन समिति के सदस्यों का कहना है कि शिक्षा विभाग की ओर से क्लस्टर स्कूलों को संसाधन साझा करने के निर्देश दिए गए हैं लेकिन इनका लाभ जरूरतमंद प्राथमिक स्कूलों तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुंच पा रहा है।
शिक्षा विभाग ने क्लस्टर स्कूलों के प्रमुखों को अपने अधीन आने वाले उन प्राथमिक स्कूलों के साथ संसाधन साझा करने के निर्देश दिए हैं, जहां अध्यापकों की कमी है।
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हालांकि, संघ का आरोप है कि इन निर्देशों के अनुरूप विषय विशेषज्ञ अध्यापक भेजने के बजाय कई बार शारीरिक शिक्षक, कला अध्यापक, प्रयोगशाला सहायक और चपरासी तक को प्रतिनियुक्ति पर भेज दिया जाता है।
इससे प्राथमिक स्कूलों में पढ़ाई की जरूरत पूरी नहीं हो पा रही है। संघ के सदस्यों का कहना है कि वर्तमान में प्राथमिक स्कूलों में सभी विषय अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाए जा रहे हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को बेहतर ढंग से पढ़ाने के लिए संबंधित विषयों के जानकार अध्यापकों की आवश्यकता है।
उनका तर्क है कि यदि प्रतिनियुक्ति पर भेजे जाने वाले कर्मचारी संबंधित विषय को पढ़ाने में दक्ष नहीं होंगे तो विद्यार्थियों को सरकारी शिक्षा व्यवस्था के तहत निर्धारित सुविधाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पाएगा।
प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष संदेश कुमार ने कहा कि क्लस्टर स्कूलों के प्रमुखों को एक या दो सप्ताह की समयसारिणी तैयार कर प्राथमिक स्कूलों में कम से कम टीजीटी अध्यापकों की प्रतिनियुक्ति करनी चाहिए। इससे जरूरतमंद स्कूलों में विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ विद्यार्थियों की पढ़ाई को भी बेहतर बनाया जा सकेगा।
उधर, स्कूल प्रबंधन समिति के सदस्यों ममता रानी, सुशील कुमार, सत्या देवी, जसपाल और हरीश कुमार ने भी प्राथमिक स्कूलों में विषय विशेषज्ञ अध्यापकों की प्रतिनियुक्ति की मांग का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि बच्चों को पढ़ाने के लिए ऐसे अध्यापक भेजे जाने चाहिए, जो संबंधित विषय को प्रभावी ढंग से पढ़ा सकें।
उपनिदेशक जिला प्रारंभिक शिक्षा विभाग सोमलाल धीमान ने बताया कि स्कूलों में आवश्यकता अनुसार अध्यापकों की तैनाती को लेकर प्रयास जारी हैं। जिन स्कूलों में अभी भी अध्यापकों की कमी खल रही है, वहां आवश्यक इंतजाम किए जाएंगे।
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संघ और स्कूल प्रबंधन समिति के सदस्यों का कहना है कि शिक्षा विभाग की ओर से क्लस्टर स्कूलों को संसाधन साझा करने के निर्देश दिए गए हैं लेकिन इनका लाभ जरूरतमंद प्राथमिक स्कूलों तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुंच पा रहा है।
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शिक्षा विभाग ने क्लस्टर स्कूलों के प्रमुखों को अपने अधीन आने वाले उन प्राथमिक स्कूलों के साथ संसाधन साझा करने के निर्देश दिए हैं, जहां अध्यापकों की कमी है।
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हालांकि, संघ का आरोप है कि इन निर्देशों के अनुरूप विषय विशेषज्ञ अध्यापक भेजने के बजाय कई बार शारीरिक शिक्षक, कला अध्यापक, प्रयोगशाला सहायक और चपरासी तक को प्रतिनियुक्ति पर भेज दिया जाता है।
इससे प्राथमिक स्कूलों में पढ़ाई की जरूरत पूरी नहीं हो पा रही है। संघ के सदस्यों का कहना है कि वर्तमान में प्राथमिक स्कूलों में सभी विषय अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाए जा रहे हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को बेहतर ढंग से पढ़ाने के लिए संबंधित विषयों के जानकार अध्यापकों की आवश्यकता है।
उनका तर्क है कि यदि प्रतिनियुक्ति पर भेजे जाने वाले कर्मचारी संबंधित विषय को पढ़ाने में दक्ष नहीं होंगे तो विद्यार्थियों को सरकारी शिक्षा व्यवस्था के तहत निर्धारित सुविधाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पाएगा।
प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष संदेश कुमार ने कहा कि क्लस्टर स्कूलों के प्रमुखों को एक या दो सप्ताह की समयसारिणी तैयार कर प्राथमिक स्कूलों में कम से कम टीजीटी अध्यापकों की प्रतिनियुक्ति करनी चाहिए। इससे जरूरतमंद स्कूलों में विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ विद्यार्थियों की पढ़ाई को भी बेहतर बनाया जा सकेगा।
उधर, स्कूल प्रबंधन समिति के सदस्यों ममता रानी, सुशील कुमार, सत्या देवी, जसपाल और हरीश कुमार ने भी प्राथमिक स्कूलों में विषय विशेषज्ञ अध्यापकों की प्रतिनियुक्ति की मांग का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि बच्चों को पढ़ाने के लिए ऐसे अध्यापक भेजे जाने चाहिए, जो संबंधित विषय को प्रभावी ढंग से पढ़ा सकें।
उपनिदेशक जिला प्रारंभिक शिक्षा विभाग सोमलाल धीमान ने बताया कि स्कूलों में आवश्यकता अनुसार अध्यापकों की तैनाती को लेकर प्रयास जारी हैं। जिन स्कूलों में अभी भी अध्यापकों की कमी खल रही है, वहां आवश्यक इंतजाम किए जाएंगे।