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Una News: बंगाणा में सेब की फसल बनी किसानों की नई उम्मीद
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बंगाणा की तनोह पंचायत के गांव सासण में सेब की फसल दिखाता किसान। स्रोत स्वयं
सासण गांव में सुभाष शर्मा ने सेब की खेती में पाई सफलता
संवाद न्यूज एजेंसी
थानाकलां (ऊना)। उपमंडल बंगाणा की तनोह पंचायत के गांव सासण में सेब की खेती किसानों के लिए नई उम्मीद लेकर आई है। गांव के प्रगतिशील किसान सुभाष शर्मा ने बताया कि उन्होंने अपने खेत में गोल्डन प्रजाति के सेब के दस पौधे लगाए थे। छह पौधे पूरी तरह से सफल रहे हैं और अब फल देना शुरू कर चुके हैं। तनोह पंचायत के गांव सासण में औसतन अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस रहता है। समय-समय पर बारिश होती रहती है। इससे तैयार सेब में मिठास है। अमूमन गर्म इलाकों में पैदा होने वाले सेब में खटास होती है।
यह पहल उन्होंने केवल अपने परिवार के उपयोग के लिए की थी लेकिन जब पौधे फलने लगे तो यह प्रयास उनके लिए आत्मसंतोष और प्रेरणा का स्रोत बन गया। इन पौधों से जो सेब मिल रहे हैं, वे पूरी तरह से जैविक हैं और अपने स्वाद में बेमिसाल हैं। हालांकि, हाल ही में हुई ओलावृष्टि के कारण फसल को कुछ हद तक नुकसान भी पहुंचा है। सुभाष शर्मा ने बताया कि ओलों के कारण कुछ फल प्रभावित हुए हैं, लेकिन अभी फसल की स्थिति संतोषजनक है।
इस सफलता से अन्य किसान भी प्रेरित हो रहे हैं और इस पहाड़ी क्षेत्र में सेब की खेती को एक नए विकल्प के रूप में देखने लगे हैं। स्थानीय कृषि विभाग ने भी किसानों को ऐसे प्रयोगों के लिए प्रोत्साहित करने की बात कही है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
थानाकलां (ऊना)। उपमंडल बंगाणा की तनोह पंचायत के गांव सासण में सेब की खेती किसानों के लिए नई उम्मीद लेकर आई है। गांव के प्रगतिशील किसान सुभाष शर्मा ने बताया कि उन्होंने अपने खेत में गोल्डन प्रजाति के सेब के दस पौधे लगाए थे। छह पौधे पूरी तरह से सफल रहे हैं और अब फल देना शुरू कर चुके हैं। तनोह पंचायत के गांव सासण में औसतन अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस रहता है। समय-समय पर बारिश होती रहती है। इससे तैयार सेब में मिठास है। अमूमन गर्म इलाकों में पैदा होने वाले सेब में खटास होती है।
यह पहल उन्होंने केवल अपने परिवार के उपयोग के लिए की थी लेकिन जब पौधे फलने लगे तो यह प्रयास उनके लिए आत्मसंतोष और प्रेरणा का स्रोत बन गया। इन पौधों से जो सेब मिल रहे हैं, वे पूरी तरह से जैविक हैं और अपने स्वाद में बेमिसाल हैं। हालांकि, हाल ही में हुई ओलावृष्टि के कारण फसल को कुछ हद तक नुकसान भी पहुंचा है। सुभाष शर्मा ने बताया कि ओलों के कारण कुछ फल प्रभावित हुए हैं, लेकिन अभी फसल की स्थिति संतोषजनक है।
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इस सफलता से अन्य किसान भी प्रेरित हो रहे हैं और इस पहाड़ी क्षेत्र में सेब की खेती को एक नए विकल्प के रूप में देखने लगे हैं। स्थानीय कृषि विभाग ने भी किसानों को ऐसे प्रयोगों के लिए प्रोत्साहित करने की बात कही है।
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