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केंद्र सरकार द्वारा डीए रोकने पर भड़के कर्मचारी
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ऊना। हिमाचल प्रदेश अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ जिला ऊना ने केंद्र सरकार की ओर से कर्मचारियों का डीए रोकने पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि यह फरमान तुरंत प्रभाव से रद्द होना चाहिए। संघ के प्रधान रमेश सिंह ठाकुर ने कहा कि महंगाई भत्ता रोकना सरकार की कर्मचारियों को मानसिक उत्पीड़न करने वाली एक सोची समझी चाल है।
हाल ही में जब सरकार की ओर से कर्मचारियों और पेंशनरों के डीए पर जो कैंची फेरी जा रही थी, तब भी उक्त नेताओं ने सरकार पर ऐसा काम न करने के लिए दबाव नहीं डाला। रमेश ठाकुर ने कहा कि नेता लोग अपने फायदे के लिए ही तैयार रहते हैं, जिसका उदाहरण अभी हाल ही में 7.4.2020 के केंद्र सरकार के राजपत्र में माननीयों के बड़े हुए भत्तों का जिक्र है। जबकि, कोरोना तो मार्च के महीने में ही अपना रौद्र रूप दिखाने लग गया था तब भी सरकार ने माननीयों के बारे में विचारशील रही और कर्मचारियों के विरोधी है।
दूसरी ओर कर्मचारी अपनी तनख्वाह से इस महंगाई के जमाने में अपने परिवार के पालन पोषण कर रहे हैं। अगर केंद्र सरकार पूंजीपतियों से यह लोन की रिकवरी कर ले तो कर्मचारियों के वेतन भत्तों को रोकने की जरूरत ही न पड़े। यहां तक हिमाचल सरकार का सवाल है जहां पर तो अभी छठे वेतन आयोग की रिपोर्ट ही लागू नहीं हुई है, जो 01/01/2016 से देय है।
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संघ ने केंद्र सरकार से मांग की है कि पहले पूंजीपतियों को दिया कर्जा वसूले, ताकि इस संकट की घड़ी में माननीयों को दिए गए भत्ते 07/04/2020 की अधिसूचना रद्द करे। फिर केंद्रीय कर्मचारियों व पेंशनरों का महंगाई भत्ता रोके।
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हाल ही में जब सरकार की ओर से कर्मचारियों और पेंशनरों के डीए पर जो कैंची फेरी जा रही थी, तब भी उक्त नेताओं ने सरकार पर ऐसा काम न करने के लिए दबाव नहीं डाला। रमेश ठाकुर ने कहा कि नेता लोग अपने फायदे के लिए ही तैयार रहते हैं, जिसका उदाहरण अभी हाल ही में 7.4.2020 के केंद्र सरकार के राजपत्र में माननीयों के बड़े हुए भत्तों का जिक्र है। जबकि, कोरोना तो मार्च के महीने में ही अपना रौद्र रूप दिखाने लग गया था तब भी सरकार ने माननीयों के बारे में विचारशील रही और कर्मचारियों के विरोधी है।
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दूसरी ओर कर्मचारी अपनी तनख्वाह से इस महंगाई के जमाने में अपने परिवार के पालन पोषण कर रहे हैं। अगर केंद्र सरकार पूंजीपतियों से यह लोन की रिकवरी कर ले तो कर्मचारियों के वेतन भत्तों को रोकने की जरूरत ही न पड़े। यहां तक हिमाचल सरकार का सवाल है जहां पर तो अभी छठे वेतन आयोग की रिपोर्ट ही लागू नहीं हुई है, जो 01/01/2016 से देय है।
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संघ ने केंद्र सरकार से मांग की है कि पहले पूंजीपतियों को दिया कर्जा वसूले, ताकि इस संकट की घड़ी में माननीयों को दिए गए भत्ते 07/04/2020 की अधिसूचना रद्द करे। फिर केंद्रीय कर्मचारियों व पेंशनरों का महंगाई भत्ता रोके।