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कैंसर पीड़ित बलबीर को मदद की दरकार
Updated Fri, 16 Feb 2018 05:36 PM IST
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कैंसर पीड़ित को मदद की दरकार
पीजीआई में तीन साल में पांच ऑपरेशन पर लाखों खर्च, नहीं मिला स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ
ऋण लेकर करवा रहा उपचार, न स्मार्ट कार्ड न ही मुख्यमंत्री राहत कोष से मिली मदद
रविंद्र कुमार
ऊना।
भटोली गांव के कैंसर पीड़ित बलबीर सिंह को मदद की दरकार है। बलबीर और उसका परिवार कैंसर के उपचार के लिए दर-दर भटक रहा है। फिलहाल बलवीर जैसे-तैसे अपना उपचार पीजीआई चंडीगढ़ में करवा रहा है। बलबीर तीन साल से कैंसर से पीड़ित है। तीन साल पहले जब बलबीर को बीमारी का पता चला तो स्थानीय चिकित्सकों ने उनको पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया। उपचार के लिए चिकित्सकों ने लाखों के खर्च का अनुमान बताया। खर्च उठाने में गरीब परिवार असमर्थ है। यहां तक कि बलवीर ने तीन साल में उपचार पर करीब चार से पांच लाख रुपया खर्च किया है। बलबीर ने बताया कि उन्होंने बैंक से स्वरोजगार के लिए दो लाख का ऋण लिया लेकिन जब उनको बीमारी का पता चला तो उनका सारा लोन बीमारी पर खर्च हो गया। अब उनको बैंक से किश्तों की अदायगी न करने पर नोटिस आ रहे हैं जिससे वह मानसिक रूप से परेशान हैं। वहीं, पीजीआई के चिकित्सकों ने उनको आगामी इलाज के लिए लाखों का खर्च बताया है। बलवीर कारपेंटर का काम करता था लेकिन बीमारी ने उनका कामकाज छुड़वा दिया। उनके परिवार में उनकी पत्नी आंगनबाड़ी में कार्यरत हैं जिससे घर का गुजारा चल रहा है।
नहीं मिला स्मार्ट कार्ड का लाभ
पीड़ित बलबीर की पत्नी के नाम का स्मार्ट कार्ड तो बना है लेकिन इसका लाभ उनको आज दिन तक नहीं मिल पाया। लाभ लेने के लिए उनको अस्पताल में 15 से 20 दिनों तक भर्ती होने की अनिवार्यता की शर्त रखी है लेकिन चिकित्सक उनको ऑपरेशन के कुछ समय बाद ही छुट्टी दे देते हैं। पीजीआई में हिमाचल के रोगियों की सहायता के लिए कोई विशेष टीम भी नहीं है ताकि आने वाले रोगियों को मदद मिल सके।
स्वास्थ्य मंत्री के ध्यान में लाएंगे मामला
ऊना सदर से विधायक सतपाल सिंह रायजादा ने कहा कि पीड़ित बलबीर के इलाज के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष से राशि दिलवाने का प्रयास किया जाएगा। केंद्रीय और प्रदेश स्वास्थ्य मंत्री के ध्यान में भी मामला लाया जाएगा ताकि पीड़ित को लाभ मिले।
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क्या कहते हैं कैंसर केयर ऑफिसर
ऊना अस्पताल के डॉ. पीएस राणा ने कहा कि ऊना अस्पताल में कैंसर केयर केंद्र है। इसमें कैंसर से पीड़ित रोगियों के टेस्ट और अन्य दवाइयां निशुल्क दी जाती हैं जिनका रोगी लाभ उठा सकते हैं।
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पीजीआई में तीन साल में पांच ऑपरेशन पर लाखों खर्च, नहीं मिला स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ
ऋण लेकर करवा रहा उपचार, न स्मार्ट कार्ड न ही मुख्यमंत्री राहत कोष से मिली मदद
रविंद्र कुमार
ऊना।
भटोली गांव के कैंसर पीड़ित बलबीर सिंह को मदद की दरकार है। बलबीर और उसका परिवार कैंसर के उपचार के लिए दर-दर भटक रहा है। फिलहाल बलवीर जैसे-तैसे अपना उपचार पीजीआई चंडीगढ़ में करवा रहा है। बलबीर तीन साल से कैंसर से पीड़ित है। तीन साल पहले जब बलबीर को बीमारी का पता चला तो स्थानीय चिकित्सकों ने उनको पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया। उपचार के लिए चिकित्सकों ने लाखों के खर्च का अनुमान बताया। खर्च उठाने में गरीब परिवार असमर्थ है। यहां तक कि बलवीर ने तीन साल में उपचार पर करीब चार से पांच लाख रुपया खर्च किया है। बलबीर ने बताया कि उन्होंने बैंक से स्वरोजगार के लिए दो लाख का ऋण लिया लेकिन जब उनको बीमारी का पता चला तो उनका सारा लोन बीमारी पर खर्च हो गया। अब उनको बैंक से किश्तों की अदायगी न करने पर नोटिस आ रहे हैं जिससे वह मानसिक रूप से परेशान हैं। वहीं, पीजीआई के चिकित्सकों ने उनको आगामी इलाज के लिए लाखों का खर्च बताया है। बलवीर कारपेंटर का काम करता था लेकिन बीमारी ने उनका कामकाज छुड़वा दिया। उनके परिवार में उनकी पत्नी आंगनबाड़ी में कार्यरत हैं जिससे घर का गुजारा चल रहा है।
नहीं मिला स्मार्ट कार्ड का लाभ
पीड़ित बलबीर की पत्नी के नाम का स्मार्ट कार्ड तो बना है लेकिन इसका लाभ उनको आज दिन तक नहीं मिल पाया। लाभ लेने के लिए उनको अस्पताल में 15 से 20 दिनों तक भर्ती होने की अनिवार्यता की शर्त रखी है लेकिन चिकित्सक उनको ऑपरेशन के कुछ समय बाद ही छुट्टी दे देते हैं। पीजीआई में हिमाचल के रोगियों की सहायता के लिए कोई विशेष टीम भी नहीं है ताकि आने वाले रोगियों को मदद मिल सके।
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स्वास्थ्य मंत्री के ध्यान में लाएंगे मामला
ऊना सदर से विधायक सतपाल सिंह रायजादा ने कहा कि पीड़ित बलबीर के इलाज के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष से राशि दिलवाने का प्रयास किया जाएगा। केंद्रीय और प्रदेश स्वास्थ्य मंत्री के ध्यान में भी मामला लाया जाएगा ताकि पीड़ित को लाभ मिले।
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क्या कहते हैं कैंसर केयर ऑफिसर
ऊना अस्पताल के डॉ. पीएस राणा ने कहा कि ऊना अस्पताल में कैंसर केयर केंद्र है। इसमें कैंसर से पीड़ित रोगियों के टेस्ट और अन्य दवाइयां निशुल्क दी जाती हैं जिनका रोगी लाभ उठा सकते हैं।