{"_id":"5c62fac1bdec222ee073798d","slug":"61549990593-una-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"लंबित मांगों को लेकर अधिवक्ताओं का प्रदर्शन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लंबित मांगों को लेकर अधिवक्ताओं का प्रदर्शन
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
ऊना। लंबित मांगों को लेकर बार काउंसिल ऊना ने रोष प्रदर्शन किया। अधिवक्ताओं ने पूरा दिन दिन कामकाज ठप रखा। अधिवक्ताओं ने डीसी कार्यालय के बाहर मांगों को लेकर जोरदार नारेबाजी कर विरोध जताया।
अधिवक्ताओं मोहन लाल शर्मा, मंगत राम शर्मा, वीरेंद्र धर्माणी, खड़ग सिंह, वाईके पाठक, ओपी वर्मा, सुनील वर्मा, अभिनव शर्मा, सागर शर्मा, मुकुल बाली, एमके बाली, आरसी सेठ, पीसी शर्मा, सीमा शर्मा, विजय शर्मा, रोहित जोशी, संजीव शर्मा, संदीप ठाकुर और मुनीष शर्मा ने कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने साल 2014 से उठाई जा रही ज्वलंत मांगों पर सरकार अभी तक कोई कदम नहीं उठा सकी है। इसके चलते बार काउंसिल ऑफ इंडिया को देशव्यापी आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है।
बार काउंसिल ऊना के सदस्यों ने एकमत से इस कॉल में शामिल होने का प्रस्ताव पारित किया है। उन्होंने कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने सभी एडवोकेट के लिए चैंबर्स, ई-लाइब्रेरी, एडवोकेट और उनके परिवार के लिए इंश्योरेंस कवर, नए वकीलों के लिए 5 साल तक 10000 का स्टायफंड देने, वकीलों के लिए उनकी मृत्यु या किसी अन्य बीमारी के कारण प्रेक्टिस न कर पाने की हालत में फाइनेंशियल प्रोटेक्शन, एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट को इन एक्ट करने, लीगल सर्विस अथॉरिटी एक्ट को अमेंड कर उसमें तब्दील लाने, एडवोकेट को पेंशन और सोशल सिक्योरिटी स्कीम लाने, जरूरत पड़ने पर एडवोकेट को देश और विदेश में हर तरह के रोग का मुफ्त इलाज कराने और मेडिक्लेम देने की जैसी मांगें रखी थी। केंद्र सरकार ने इनमें से किसी भी मांग पर कोई निर्णय नहीं लिया है। इसको लेकर बार काउंसिल ऑफ इंडिया सरकार के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन छेड़ने को मजबूर हुई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
ऊना। लंबित मांगों को लेकर बार काउंसिल ऊना ने रोष प्रदर्शन किया। अधिवक्ताओं ने पूरा दिन दिन कामकाज ठप रखा। अधिवक्ताओं ने डीसी कार्यालय के बाहर मांगों को लेकर जोरदार नारेबाजी कर विरोध जताया।
अधिवक्ताओं मोहन लाल शर्मा, मंगत राम शर्मा, वीरेंद्र धर्माणी, खड़ग सिंह, वाईके पाठक, ओपी वर्मा, सुनील वर्मा, अभिनव शर्मा, सागर शर्मा, मुकुल बाली, एमके बाली, आरसी सेठ, पीसी शर्मा, सीमा शर्मा, विजय शर्मा, रोहित जोशी, संजीव शर्मा, संदीप ठाकुर और मुनीष शर्मा ने कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने साल 2014 से उठाई जा रही ज्वलंत मांगों पर सरकार अभी तक कोई कदम नहीं उठा सकी है। इसके चलते बार काउंसिल ऑफ इंडिया को देशव्यापी आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है।
विज्ञापन
बार काउंसिल ऊना के सदस्यों ने एकमत से इस कॉल में शामिल होने का प्रस्ताव पारित किया है। उन्होंने कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने सभी एडवोकेट के लिए चैंबर्स, ई-लाइब्रेरी, एडवोकेट और उनके परिवार के लिए इंश्योरेंस कवर, नए वकीलों के लिए 5 साल तक 10000 का स्टायफंड देने, वकीलों के लिए उनकी मृत्यु या किसी अन्य बीमारी के कारण प्रेक्टिस न कर पाने की हालत में फाइनेंशियल प्रोटेक्शन, एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट को इन एक्ट करने, लीगल सर्विस अथॉरिटी एक्ट को अमेंड कर उसमें तब्दील लाने, एडवोकेट को पेंशन और सोशल सिक्योरिटी स्कीम लाने, जरूरत पड़ने पर एडवोकेट को देश और विदेश में हर तरह के रोग का मुफ्त इलाज कराने और मेडिक्लेम देने की जैसी मांगें रखी थी। केंद्र सरकार ने इनमें से किसी भी मांग पर कोई निर्णय नहीं लिया है। इसको लेकर बार काउंसिल ऑफ इंडिया सरकार के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन छेड़ने को मजबूर हुई है।
विज्ञापन