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महिला दिवस पर काले दुपट्टे से जताएंगी विरोध
Updated Sun, 04 Mar 2018 11:11 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
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ऊना।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने आठ दिवस को विश्व भर में मनाए जा रहे महिला दिवस को काले दिवस के रूप में मनाने का एलान कर दिया है। महिला दिवस पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिका काले दुपट्टे से अपना विरोध जताएंगी। उन्होंने आरोप जड़ा कि महिला सशक्तीकरण के नाम पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का शोषण किया जा रहा है। सरकार कोई भी इस वर्ग की महिलाओं पर काम का बोझ लादने के अलावा किसी ने कुछ नहीं किया।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका यूनियन की जिलाध्यक्ष नरेश शर्मा, महासचिव नरेश भुल्लर, उपाध्यक्ष रमा शर्मा और मुख्य सलाहकार निर्मल सैणी ने कहा है कि अपने विभाग के अलावा करीब आधा दर्जन विभागों के काम भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से करवाए जाते हैं। लेकिन बदले में उन्हें 1450 रुपये मासिक मानदेय देकर सभी उनसे मुंह मोड़ लेते हैं। उन्होंने कहा कि पड़ोसी राज्यों की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय हिमाचल से कहीं अधिक हैं जिससे उन्हें आर्थिक बल मिल सके। हिमाचल में कई महिलाएं ऐसी हैं जिन्हें एक मात्र कमाई और परिवारों के पालन-पोषण का जरिया मात्र आंगनबाड़ी केंद्र ही हैं। ऐसी कार्यकर्ताओं को 1400 और सहायिकाओं को मात्र 600 रुपये मासिक मानदेय में परिवारों का पालन पोषण बेहद मुश्किल हो चुका है।
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उन्होंने कहा कि हर काम के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को आगे कर दिया जाता है। जब बारी मानदेय बढ़ाने की बात आती है तो खजाना खाली होने का रोना रोया जाता है। सरकार अन्य कर्मचारियों, अधिकारियों, मंत्रियों, सांसदों और विधायकों के वेतन और मानदेय को सर्वसम्मति से बढ़ा देती है। अरसे से आर्थिक समस्याओं से जूझ रही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए महिला दिवस काले दिवस के अलावा कुछ नहीं है। उन्होंने कहा के पंजाब में कार्यकर्ताओं को 5600 रुपये तो हरियाणा में 8500 रुपये मानदेय दिया जा रहा है। वहीं विषय भौगोलिक परिस्थितियों वाले राज्य हिमाचल में काम के बोझ तले दबी महिलाओं को 1450 और 600 रुपये देकर काम चलाया जा रहा है। ऐसे में महिला दिवस या महिला सशक्तीकरण का महिलाओं के लिए कोई मतलब नहीं रह जाता।
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