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Una News: बडूही बाजार में 20 क्विंटल जलेबी और 12 क्विंटल पकौड़े की ब्रिकी
Wed, 15 Apr 2026 12:52 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Wed, 15 Apr 2026 12:52 AM IST
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बडूही (ऊना)। क्षेत्र में मंगलवार को बैसाखी का पर्व उत्साह के साथ मनाया गया। सुबह की पहली किरण के साथ ही लोगों में त्योहार को लेकर विशेष उमंग देखने को मिली। घरों में जहां पारंपरिक व्यंजन तैयार किए गए, वहीं बाजारों में भी रौनक देखते ही बन रही थी। बडूही बाजार में एक ही दिन में 20 क्लिंटल जलेबी और 12 क्विंटल पकौड़े की बिक्री हुई। 140 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से जलेबी और 200 रुपये किलोग्राम के हिसाब से पकौड़े की बिक्री हुई। बडूही बाजार पूरी तरह से सज-धज कर त्योहार के रंग में रंगा नजर आया। मिठाई की दुकानों पर सुबह से ही लोगों की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। खासकर गरमा-गरम जलेबी और ताजे पकौड़ों की खुशबू ने लोगों को दुकानों तक खींच लिया। जलेबी की खरीद को लेकर लोगों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला और कई दुकानों पर तो ग्राहकों को अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा।
बाजार में चहल-पहल का आलम ऐसा था कि हर ओर सिर्फ खुशियां ही नजर आ रही थीं। बच्चे नए कपड़ों में इठलाते दिखे, युवा मित्रों के साथ त्योहार का आनंद लेते नजर आए जबकि बुजुर्ग भी इस पारंपरिक पर्व की मिठास में शामिल होते दिखाई दिए। कई जगह पर लोगों ने एक-दूसरे को बैसाखी की शुभकामनाएं दीं और सामाजिक सौहार्द का परिचय दिया।
स्थानीय निवासी सरवन सिंह ने बताया कि बैसाखी का पर्व हमारी संस्कृति, परंपरा और भाईचारे का प्रतीक है। यह सिर्फ फसल कटाई की खुशी नहीं बल्कि आपसी प्रेम और एकता को मजबूत करने का अवसर भी है। हम हर साल इस दिन को पूरे उत्साह और परिवार के साथ मिलकर मनाते हैं।
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बडूही बाजार के हलवाई दुकानदार सुरम सिंह ने कहा कि बैसाखी के मौके पर मिठाइयों की बिक्री में काफी इजाफा हुआ है। सुबह से ही ग्राहकों की भीड़ लगी। खासकर जलेबी की मांग सबसे ज्यादा है। लोग ताजी और गरमा-गरम जलेबी के साथ पकौड़े भी खूब पसंद कर रहे हैं, जिससे कारोबार में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।
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बाजार में चहल-पहल का आलम ऐसा था कि हर ओर सिर्फ खुशियां ही नजर आ रही थीं। बच्चे नए कपड़ों में इठलाते दिखे, युवा मित्रों के साथ त्योहार का आनंद लेते नजर आए जबकि बुजुर्ग भी इस पारंपरिक पर्व की मिठास में शामिल होते दिखाई दिए। कई जगह पर लोगों ने एक-दूसरे को बैसाखी की शुभकामनाएं दीं और सामाजिक सौहार्द का परिचय दिया।
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स्थानीय निवासी सरवन सिंह ने बताया कि बैसाखी का पर्व हमारी संस्कृति, परंपरा और भाईचारे का प्रतीक है। यह सिर्फ फसल कटाई की खुशी नहीं बल्कि आपसी प्रेम और एकता को मजबूत करने का अवसर भी है। हम हर साल इस दिन को पूरे उत्साह और परिवार के साथ मिलकर मनाते हैं।
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बडूही बाजार के हलवाई दुकानदार सुरम सिंह ने कहा कि बैसाखी के मौके पर मिठाइयों की बिक्री में काफी इजाफा हुआ है। सुबह से ही ग्राहकों की भीड़ लगी। खासकर जलेबी की मांग सबसे ज्यादा है। लोग ताजी और गरमा-गरम जलेबी के साथ पकौड़े भी खूब पसंद कर रहे हैं, जिससे कारोबार में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।