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Una News: 1962 मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों के कर्मियों ने ठप की सेवाएं

Mon, 22 Sep 2025 12:34 AM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 22 Sep 2025 12:34 AM IST
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1962 Mobile Veterinary Unit personnel halt services
डेढ़ माह से नहीं मिला वेतन, पशुपालकों को आने लगीं परेशानियां
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एक साल पहले मुख्यमंत्री ने किया था योजना का शुभारंभ
कर्मियों की चेतावनी, जब तक अधिकार नहीं मिले, नहीं लौटेंगे काम पर
केपी पांजला
ऊना। प्रदेश में आपात स्थिति में गंभीर पशु रोगों के उपचार के लिए शुरू की गई 1962 मोबाइल पशु चिकित्सा सेवा पिछले तीन दिन से ठप पड़ी है। पशुपालक टोल फ्री नंबर 1962 पर कॉल कर रहे हैं, लेकिन उन्हें मोबाइल पशु चिकित्सा एंबुलेंस सुविधा नहीं मिल रही।
आउटसोर्सिंग कंपनी के कर्मचारियों ने डेढ़ माह से वेतन न मिलने और केंद्र सरकार की ओर से तय मानदेय में अनदेखी का आरोप लगाते हुए सेवाएं रोक दी हैं। इसका सीधा असर किसानों और पशुपालकों पर पड़ रहा है, जो उपचार और दवाइयों के लिए इन मोबाइल इकाइयों पर निर्भर हैं।
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मार्च 2024 में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने शिमला से इस सेवा की शुरुआत की थी। पहले चरण में 44 विकास खंडों में एंबुलेंस उपलब्ध करवाई गईं। प्रत्येक एंबुलेंस में एक पशु चिकित्सक और एक फार्मासिस्ट तैनात है। बिलासपुर, ऊना, सोलन और कुल्लू में तीन-तीन, लाहौल-स्पीति में दो, मंडी व शिमला में पांच-पांच, चंबा, सिरमौर और हमीरपुर में चार-चार, किन्नौर में एक और कांगड़ा में सात मोबाइल एंबुलेंस चलाई जा रही हैं।
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योजना के तहत 90 फीसदी खर्च केंद्र सरकार और 10 फीसदी राज्य सरकार वहन करती है लेकिन, कर्मचारियों का कहना है कि मेडिकल लीव का प्रावधान नहीं है। कई जगह बैठने की उचित व्यवस्था तक नहीं है और महीनों से दवाइयों व आवश्यक आपूर्ति का भी अभाव है। उनका कहना है कि जब तक अधिकार और लंबित वेतन नहीं मिलेगा, तब तक वे सेवाओं पर नहीं लौटेंगे।
कंपनी ने मांगी 5.67 करोड़ की बकाया राशि
आउटसोर्सिंग कंपनी पीडीपीएल ने पशुपालन विभाग को पत्र लिखकर 5.67 करोड़ रुपये की लंबित बकाया राशि जारी करने की मांग की है। कंपनी का कहना है कि 11 महीने से बिल लंबित पड़े हैं, जिससे कर्मचारियों को वेतन देना संभव नहीं हो पा रहा।

अधिकारियों और मंत्रियों की प्रतिक्रिया
योजना के तहत 90 फीसदी खर्च केंद्र सरकार और 10 फीसदी राज्य सरकार वहन करती है। केंद्र सरकार को हिस्सा डालने के लिए कहा गया है। जैसे ही केंद्र का अंश आता है, राज्य भी अपनी हिस्सेदारी डाल देगा। जल्द समस्या का समाधान होगा। -डॉ. संजीव धीमान, निदेशक पशुपालन विभाग, हिमाचल प्रदेश

मामला ध्यान में आ गया है। जल्द ही कर्मचारियों का वेतन जारी होगा। सरकार पशुपालकों की समस्याओं को लेकर गंभीर है। -चंद्र कुमार, कृषि एवं पशुपालन मंत्री, हिमाचल प्रदेश
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