{"_id":"5c6ae694bdec22738e36b79e","slug":"121550509716-una-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मौसम की मार से फिर धुला आलू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मौसम की मार से फिर धुला आलू
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
ऊना। जिले की मुख्य फसल आलू एक बार फिर खराब मौसम की चपेट में आ गई है। करीब दो सप्ताह से खराब मौसम और भारी बारिश के चलते किसानों को फिर से भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
जिले में लगातार बारिश से कई किसानों के आलू की फसल बर्बाद हो गई है। खराब मौसम के कारण झुलसा रोग ने भी दस्तक दे दी है। इससे किसानों में हड़कंप है। मौसम की बेरुखी के चलते जिला के किसानों को लगातार तीसरी बार नुकसान उठाना पड़ रहा है। जिले में करीब 2000 हेक्टेयर भूमि में आलू की फसल की बिजाई होती है। इसमें से करीब ढाई हजार मीट्रिक टन आलू की फसल पैदावार हर वर्ष होती है। इसे खरीदने के लिए हर वर्ष हिमाचल सहित पंजाब, दिल्ली, हरियाणा व राजस्थान और मुंबई से व्यापारी आते हैं। इस बार फिर से उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। हरोली ब्लॉक किसान मोर्चा के अध्यक्ष अजय कुमार लवली ने बताया कि खराब मौसम और बारिश के कारण आलू की फसल खराब हो रही है।
ऐसे होगा रोग का निदान
कृषि उपनिदेशक डॉ. सुरेश कपूर ने कहा कि झुलसा का प्रकोप ऊपर की पत्तियों से शुरू होता है। शुरू में किनारे की पत्तियां काली होती हैं। तेजी से इसका प्रकोप पत्तियों और तने से होता हुआ कंद तक पहुंच जाता है। छिड़काव करने के लिए 15 लीटर पानी में 35 ग्राम मैंकोजेब, 20 ग्राम सल्फर और 20 ग्राम बोरान (20 फीसद) मिलाकर छिड़काव करें। इससे रोग के साथ ठंड से भी बचाव होगा। इसके साथ साथ किसान टिल्ट नामक दवाई का भी इस्तेमाल नियमानुसार कर सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
ऊना। जिले की मुख्य फसल आलू एक बार फिर खराब मौसम की चपेट में आ गई है। करीब दो सप्ताह से खराब मौसम और भारी बारिश के चलते किसानों को फिर से भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
जिले में लगातार बारिश से कई किसानों के आलू की फसल बर्बाद हो गई है। खराब मौसम के कारण झुलसा रोग ने भी दस्तक दे दी है। इससे किसानों में हड़कंप है। मौसम की बेरुखी के चलते जिला के किसानों को लगातार तीसरी बार नुकसान उठाना पड़ रहा है। जिले में करीब 2000 हेक्टेयर भूमि में आलू की फसल की बिजाई होती है। इसमें से करीब ढाई हजार मीट्रिक टन आलू की फसल पैदावार हर वर्ष होती है। इसे खरीदने के लिए हर वर्ष हिमाचल सहित पंजाब, दिल्ली, हरियाणा व राजस्थान और मुंबई से व्यापारी आते हैं। इस बार फिर से उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। हरोली ब्लॉक किसान मोर्चा के अध्यक्ष अजय कुमार लवली ने बताया कि खराब मौसम और बारिश के कारण आलू की फसल खराब हो रही है।
विज्ञापन
ऐसे होगा रोग का निदान
कृषि उपनिदेशक डॉ. सुरेश कपूर ने कहा कि झुलसा का प्रकोप ऊपर की पत्तियों से शुरू होता है। शुरू में किनारे की पत्तियां काली होती हैं। तेजी से इसका प्रकोप पत्तियों और तने से होता हुआ कंद तक पहुंच जाता है। छिड़काव करने के लिए 15 लीटर पानी में 35 ग्राम मैंकोजेब, 20 ग्राम सल्फर और 20 ग्राम बोरान (20 फीसद) मिलाकर छिड़काव करें। इससे रोग के साथ ठंड से भी बचाव होगा। इसके साथ साथ किसान टिल्ट नामक दवाई का भी इस्तेमाल नियमानुसार कर सकते हैं।
विज्ञापन