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कामगारों ने परिजनों समेत किया थाने का घेराव
Updated Sat, 08 Sep 2018 08:16 PM IST
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कामगारों ने परिजनों समेत थाना घेरा
डीएसपी ने मौके पर पहुंच दिया आश्वासन
प्रभावितों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
भड़के परिजनों की जल्द से जल्द कार्रवाई की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
गगरेट (ऊना)। ल्यूमिनस उद्योग कामगार यूनियन और ट्रक यूनियन के बीच पनपा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। प्रशासन ने उद्योग में धारा 144 तो लगा दी है। इसके बावजूद हालात बेकाबू होते नजर आ रहे हैं।
सैकड़ों लोगों के साथ शनिवार को ल्यूमिनस के कामगारों और उनके परिजनों ने थाने का घेराव किया। इस दौरान प्रभावितों ने प्रशासन के विरुद्ध जमकर नारेबाजी की। लोगों के बढ़ते दबाव को देखते हुए पुलिस प्रशासन को उन्हें शांत करने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ी। मामले की संजीदगी को देखते हुए डीएसपी अंब मौके पर पहुंचे और लोगों को समझाया लेकिन कामगारों के परिजन ट्रक यूनियन के पदाधिकारी की गिरफ्तारी की मांग पर अड़े रहे। पुलिस प्रशासन कामगारों के परिजनों को समझाता रहा कि इस मामले में जो धाराएं लगी हैं, उनमें गिरफ्तारी नहीं हो सकती।
गौरतलब है कि झड़प में उद्योग में कार्यरत लड़कियों के साथ भी हुई मारपीट हुई थी। परिजनों ने रोष जताया कि लड़कियों को क्यों पीटा गया। झड़प में घायल युवतियों ने भी थाने में पहुंच कर आपबीती सुनाई। कामगारों ने आरोप लगाया कि ट्रक यूनियन को पुलिस विभाग ने डंडे दिए थे, जो इस झड़प में प्रयोग किये गए। लोगों ने इस प्रकरण में इल्जाम लगाते हुए रोष प्रकट किया कि पुलिस इस मामले में ट्रक यूनियन और फैक्टरी प्रबंधन के इशारे पर काम कर रही है। लोगों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगते हुए कहा कि पुलिस ने इतने बड़े प्रकरण के बाद भी हल्की धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। हालांकि इस गंभीर मसले में अभी तक पुलिस किसी की भी गिरफ्तारी करने में असमर्थ नजर आ रही है।
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दो जांच अधिकारी तैनात
एसपी दिवाकर शर्मा ने कहा कि मामले की संजीदगी को देखते हुए दो जांच अधिकारी तैनात कर दिए हैं ताकि मामले में पारदर्शिता रहे। एक जांच अधिकारी ट्रक यूनियन की तरफ से की गई एफआईआर की जांच करेगा तो दूसरा कामगारों की तरफ से करवाई एफआईआर की जांच करेगा। ल्यूमिनस कर्मचारियों के मामले की जांच जिला निरीक्षक नंदलाल को सौंपी गई है। पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं 341, 147, 148, 149, 504 व 323 के तहत मामला दर्ज किया है। ट्रक यूनियन के मामले की जांच एएसआई सुरजीत कुमार को सौंपी गई है। पुलिस ने इस मामले में धारा 147, 149, 323 और 427 के तहत मामला दर्ज किया है।
उद्योग में काम को लेकर दहशत में लोग
वीरवार को ट्रक यूनियन और कामगार यूनियन के बीच हुई झड़प के बाद सोशल मीडिया पर दोनों ही पक्ष झड़प के वीडियो और फोटो शेयर कर रहे हैं। जहां किसी वीडियो में खूब सिर-फुटौव्वल हो रही है तो किसी वीडियो में कामगार जख्म दिखा रहे हैं। जब लोग थाने का घेराव कर रहे थे तो एक मां भीड़ से अलग से चुपचाप रो रही थी। पूछने पर महिला ने बताया कि मेरा बेटा दिन-रात मेहनत कर चंद रुपये कंपनी से कमाता है। इससे घर का खर्च चलता है। मुझे अपने बेटे की जान की कीमत पर ऐसे पैसे नहीं चाहिए। इस खूनी झड़प के बाद उन्हें अपने बेटे को उद्योग में काम पर भेजने का डर लग रहा है।
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डीएसपी ने मौके पर पहुंच दिया आश्वासन
प्रभावितों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
भड़के परिजनों की जल्द से जल्द कार्रवाई की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
गगरेट (ऊना)। ल्यूमिनस उद्योग कामगार यूनियन और ट्रक यूनियन के बीच पनपा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। प्रशासन ने उद्योग में धारा 144 तो लगा दी है। इसके बावजूद हालात बेकाबू होते नजर आ रहे हैं।
सैकड़ों लोगों के साथ शनिवार को ल्यूमिनस के कामगारों और उनके परिजनों ने थाने का घेराव किया। इस दौरान प्रभावितों ने प्रशासन के विरुद्ध जमकर नारेबाजी की। लोगों के बढ़ते दबाव को देखते हुए पुलिस प्रशासन को उन्हें शांत करने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ी। मामले की संजीदगी को देखते हुए डीएसपी अंब मौके पर पहुंचे और लोगों को समझाया लेकिन कामगारों के परिजन ट्रक यूनियन के पदाधिकारी की गिरफ्तारी की मांग पर अड़े रहे। पुलिस प्रशासन कामगारों के परिजनों को समझाता रहा कि इस मामले में जो धाराएं लगी हैं, उनमें गिरफ्तारी नहीं हो सकती।
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गौरतलब है कि झड़प में उद्योग में कार्यरत लड़कियों के साथ भी हुई मारपीट हुई थी। परिजनों ने रोष जताया कि लड़कियों को क्यों पीटा गया। झड़प में घायल युवतियों ने भी थाने में पहुंच कर आपबीती सुनाई। कामगारों ने आरोप लगाया कि ट्रक यूनियन को पुलिस विभाग ने डंडे दिए थे, जो इस झड़प में प्रयोग किये गए। लोगों ने इस प्रकरण में इल्जाम लगाते हुए रोष प्रकट किया कि पुलिस इस मामले में ट्रक यूनियन और फैक्टरी प्रबंधन के इशारे पर काम कर रही है। लोगों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगते हुए कहा कि पुलिस ने इतने बड़े प्रकरण के बाद भी हल्की धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। हालांकि इस गंभीर मसले में अभी तक पुलिस किसी की भी गिरफ्तारी करने में असमर्थ नजर आ रही है।
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दो जांच अधिकारी तैनात
एसपी दिवाकर शर्मा ने कहा कि मामले की संजीदगी को देखते हुए दो जांच अधिकारी तैनात कर दिए हैं ताकि मामले में पारदर्शिता रहे। एक जांच अधिकारी ट्रक यूनियन की तरफ से की गई एफआईआर की जांच करेगा तो दूसरा कामगारों की तरफ से करवाई एफआईआर की जांच करेगा। ल्यूमिनस कर्मचारियों के मामले की जांच जिला निरीक्षक नंदलाल को सौंपी गई है। पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं 341, 147, 148, 149, 504 व 323 के तहत मामला दर्ज किया है। ट्रक यूनियन के मामले की जांच एएसआई सुरजीत कुमार को सौंपी गई है। पुलिस ने इस मामले में धारा 147, 149, 323 और 427 के तहत मामला दर्ज किया है।
उद्योग में काम को लेकर दहशत में लोग
वीरवार को ट्रक यूनियन और कामगार यूनियन के बीच हुई झड़प के बाद सोशल मीडिया पर दोनों ही पक्ष झड़प के वीडियो और फोटो शेयर कर रहे हैं। जहां किसी वीडियो में खूब सिर-फुटौव्वल हो रही है तो किसी वीडियो में कामगार जख्म दिखा रहे हैं। जब लोग थाने का घेराव कर रहे थे तो एक मां भीड़ से अलग से चुपचाप रो रही थी। पूछने पर महिला ने बताया कि मेरा बेटा दिन-रात मेहनत कर चंद रुपये कंपनी से कमाता है। इससे घर का खर्च चलता है। मुझे अपने बेटे की जान की कीमत पर ऐसे पैसे नहीं चाहिए। इस खूनी झड़प के बाद उन्हें अपने बेटे को उद्योग में काम पर भेजने का डर लग रहा है।