{"_id":"5b0442da4f1c1beb7e8b5086","slug":"11527005914-una-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सीबीएसई की तर्ज पर स्पोट्र्स परीरियड हो अनिवार्य","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सीबीएसई की तर्ज पर स्पोट्र्स परीरियड हो अनिवार्य
Updated Tue, 22 May 2018 10:17 PM IST
विज्ञापन
teacher shimla
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
ऊना। हिमाचल प्रदेश डीपीई संघ ऊना ने सीबीएसई बोर्ड की तर्ज पर प्रदेश में स्पोर्ट्स पीरियड को अनिवार्य करने के साथ ही सभी स्कूलों में शारीरिक शिक्षकों को नियुक्त करने की मांग उठाई है। संघ के महासचिव राजेंद्र बैंस ने कहा कि सीबीएसई बोर्ड ने अपने सभी स्कूलों के लिए नए दिशानिर्देशों में हर दिन स्पोर्ट्स पीरियड को अनिवार्य कर दिया है। उन्होंने कहा कि इस पहल का मकसद छात्रों को बैठने की आदत वाली जीवनशैली और दिनभर बैठकर टीवी देखने में तबदील होने से बचाना है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में शारीरिक शिक्षा को समाप्त किया जा रहा है। नए स्कूलों में डीपीई की नियुक्तियां नहीं की जा रही हैं, जिससे बच्चों की खेल के प्रति रुचि नहीं बढ़ रही। वहीं, छात्रों का संपूर्ण विकास नहीं हो पा रहा है। प्रदेश में शारीरिक शिक्षकों के दर्जनों पद रिक्त चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक तरफ प्रदेश सरकार खेलों को बढ़ावा देना चाहती है और दूसरी ओर स्कूलों में शारीरिक शिक्षकों की नियुक्तियां नहीं की जा रही हैं। वहीं, विभाग के निशा निर्देश के मुताबिक नए अपग्रेड स्कूलों में यदि छात्रों की कुल संख्या 30 होगी, तभी डीपीई की पोस्ट दी जाएगी। लेकिन ऐसे स्कूल भी हैं जहां छात्रों की संख्या कहीं ज्यादा है, लेकिन वहां डीपीई का पद नहीं भरा जा रहा है।
विज्ञापन
ऊना। हिमाचल प्रदेश डीपीई संघ ऊना ने सीबीएसई बोर्ड की तर्ज पर प्रदेश में स्पोर्ट्स पीरियड को अनिवार्य करने के साथ ही सभी स्कूलों में शारीरिक शिक्षकों को नियुक्त करने की मांग उठाई है। संघ के महासचिव राजेंद्र बैंस ने कहा कि सीबीएसई बोर्ड ने अपने सभी स्कूलों के लिए नए दिशानिर्देशों में हर दिन स्पोर्ट्स पीरियड को अनिवार्य कर दिया है। उन्होंने कहा कि इस पहल का मकसद छात्रों को बैठने की आदत वाली जीवनशैली और दिनभर बैठकर टीवी देखने में तबदील होने से बचाना है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में शारीरिक शिक्षा को समाप्त किया जा रहा है। नए स्कूलों में डीपीई की नियुक्तियां नहीं की जा रही हैं, जिससे बच्चों की खेल के प्रति रुचि नहीं बढ़ रही। वहीं, छात्रों का संपूर्ण विकास नहीं हो पा रहा है। प्रदेश में शारीरिक शिक्षकों के दर्जनों पद रिक्त चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक तरफ प्रदेश सरकार खेलों को बढ़ावा देना चाहती है और दूसरी ओर स्कूलों में शारीरिक शिक्षकों की नियुक्तियां नहीं की जा रही हैं। वहीं, विभाग के निशा निर्देश के मुताबिक नए अपग्रेड स्कूलों में यदि छात्रों की कुल संख्या 30 होगी, तभी डीपीई की पोस्ट दी जाएगी। लेकिन ऐसे स्कूल भी हैं जहां छात्रों की संख्या कहीं ज्यादा है, लेकिन वहां डीपीई का पद नहीं भरा जा रहा है।