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निजी स्कूलों की मनमानी पर लगेगी रोक
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अमर उजाला ब्यूरो
ऊना। गैर सरकारी स्कूलों में गठित होने वाली पीटीए में 75 फीसदी अभिभावकों को सदस्य बनाना होगा। शेष 25 फीसदी सदस्य मात्र अध्यापक होंगे। इसके लिए शिक्षा विभाग ने निजी स्कूलों को निर्देश जारी कर दिए हैं।
इसके साथ शिक्षा विभाग ने निजी स्कूलों को पीटीए कार्यकारिणी के गठन के लिए 12 दिनों का समय दिया है। पीटीए कार्यकारिणी का गठन की रिपोर्ट शिक्षा विभाग को सौंपनी होगी। शिक्षा विभाग के अनुसार कई निजी स्कूल लापरवाही बरतते हुए पीटीए कार्यकारिणी का गठन नहीं करते। अगर करते हैं तो कुछ चुने अभिभावकों को जोड़कर बाकी स्कूल अध्यापकों को ही कमेटी के सदस्य बना लेते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। अब किसी भी कार्य को करने से पहले पीटीए कार्यकारिणी के 75 फीसदी अभिभावकों को सही लगने वाले कार्य को ही अमलीजामा पहनाया जा सकेगा।
अभिभावक अन्य अभिभावकों की समस्याओं को भी जोर-शोर से उठा सकेंगे। प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक संदीप कुमार गुप्ता का कहना है कि गैर सरकारी स्कूलों को निर्देश जारी कर दिए हैं। इसमें अब पीटीए कार्यकारिणी में 75 फीसदी अभिभावकों की सदस्य अनिवार्य है। निर्देशों की अवहेलना करने वाले स्कूलों पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
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मनमानी पर लगेगी लगाम
गैर सरकारी स्कूलों की पीटीए कार्यकारिणी में अभिभावकों की संख्या को विभिन्न मुद्दे को ध्यान में रखते हुए बढ़ाई गई है। इसमें फीस वृद्धि,फंडों के नाम पर वसूलने वाले पैसे, स्कूल की विभिन्न रिपोर्टों को सार्वजनिक करने के लिए स्कूल वेब साइट और डिस्पले बोर्ड सहित स्कूल बसों की खस्ताहाल हालत और गैर जिम्मेदाराना चालकों की मनमानी को रोकने के लिए पीटीए में अभिभावकों की ज्यादा संख्या अपनी एक अलग आवाज स्कूल प्रबंधन के खिलाफ बुलंद कर सकती है। यही शिक्षा विभाग का मुख्य उद्देश्य है।
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ऊना। गैर सरकारी स्कूलों में गठित होने वाली पीटीए में 75 फीसदी अभिभावकों को सदस्य बनाना होगा। शेष 25 फीसदी सदस्य मात्र अध्यापक होंगे। इसके लिए शिक्षा विभाग ने निजी स्कूलों को निर्देश जारी कर दिए हैं।
इसके साथ शिक्षा विभाग ने निजी स्कूलों को पीटीए कार्यकारिणी के गठन के लिए 12 दिनों का समय दिया है। पीटीए कार्यकारिणी का गठन की रिपोर्ट शिक्षा विभाग को सौंपनी होगी। शिक्षा विभाग के अनुसार कई निजी स्कूल लापरवाही बरतते हुए पीटीए कार्यकारिणी का गठन नहीं करते। अगर करते हैं तो कुछ चुने अभिभावकों को जोड़कर बाकी स्कूल अध्यापकों को ही कमेटी के सदस्य बना लेते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। अब किसी भी कार्य को करने से पहले पीटीए कार्यकारिणी के 75 फीसदी अभिभावकों को सही लगने वाले कार्य को ही अमलीजामा पहनाया जा सकेगा।
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अभिभावक अन्य अभिभावकों की समस्याओं को भी जोर-शोर से उठा सकेंगे। प्रारंभिक शिक्षा उपनिदेशक संदीप कुमार गुप्ता का कहना है कि गैर सरकारी स्कूलों को निर्देश जारी कर दिए हैं। इसमें अब पीटीए कार्यकारिणी में 75 फीसदी अभिभावकों की सदस्य अनिवार्य है। निर्देशों की अवहेलना करने वाले स्कूलों पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
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मनमानी पर लगेगी लगाम
गैर सरकारी स्कूलों की पीटीए कार्यकारिणी में अभिभावकों की संख्या को विभिन्न मुद्दे को ध्यान में रखते हुए बढ़ाई गई है। इसमें फीस वृद्धि,फंडों के नाम पर वसूलने वाले पैसे, स्कूल की विभिन्न रिपोर्टों को सार्वजनिक करने के लिए स्कूल वेब साइट और डिस्पले बोर्ड सहित स्कूल बसों की खस्ताहाल हालत और गैर जिम्मेदाराना चालकों की मनमानी को रोकने के लिए पीटीए में अभिभावकों की ज्यादा संख्या अपनी एक अलग आवाज स्कूल प्रबंधन के खिलाफ बुलंद कर सकती है। यही शिक्षा विभाग का मुख्य उद्देश्य है।