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मां सिद्धिदात्री की पूजा से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं : हरिचेतनानंद
Wed, 17 Apr 2024 10:59 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Wed, 17 Apr 2024 10:59 PM IST
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नालागढ़ के मित्तिया में नौवें दिन की कथा श्रवण करते भक्तजन। संवाद
रामलला के जन्मोत्सव पर दुर्गा मंदिर में लगे जयकारे
मितियां में श्रीमददेवी भागवत पुराण कथा का समापन
संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़(सोलन)। स्वयं प्रकट श्री दुर्गा मंदिर मितियां में 9 अप्रैल से शुरू हुई श्रीमद्देवीभागवत पुराण कथा का बुधवार को व्यासपीठ स्वामी हरिचेतनानंद ने कथा के अंतिम दिन देवी के नवम स्वरूप मां सिद्धिदात्री के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि मां सिद्धिदात्री की पूजा से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इनकी पूजा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। कलियुग में भगवती का प्रसिद्ध नाम दुर्गा है। इसी के साथ पूर्णाहुति हुई और कथा विश्राम हो गया।
कथा को गति देते हुए उन्होंने कहा कि दुर्गम नाम के दैत्य ने तपस्या करके पहले अमरता मांगी, फिर वेद मांगे, ब्रह्मा जी ने वेद दे दिए। इसके बाद ब्राह्मण वेद भूल गए, यज्ञ बंद हो गए सब पशुवत हो गया। दुर्गम दैत्य अन्याय और अत्याचार करने लगा फिर देवताओं ने सताक्षी देवी का स्मरण किया। सताक्षी देवी के साथ दुर्गम दैत्य का 11 दिन तक युद्ध हुआ। दुर्गम नाम के दैत्य का वध करने से भगवती का नाम दुर्गा पड़ा। इससे पहले सबसे पहले सुबह 7:30 बजे हवन शुरू हुआ इसमें कमेटी के सदस्यों और दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
इसके अलावा मंदिर में राम नवमी के अवसर पर रामजन्म काउत्सव मनाया गया। स्वामी जी ने कहा भगवान राम जन्म अवधपुरी में हुआ। प्रभु श्रीराम आज अवधपुरी में दिव्य भव्य मंदिर में विराजमान हैं। स्वामी जी ने भक्तों से आग्रह किया एक बार अवधपुरी में राम लला का दर्शन करने जरूर जाएं। कथा समापन के अवसर पर मंदिर प्रबंध कमेटी के प्रधान दुर्गा राम सहित सभी सदस्यों ने व्यास पूजन कर आशीर्वाद लिया।
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कथा में नंद लाल शर्मा, आरपी चंदेल, मुनीश शर्मा, कमेटी के प्रधान दुर्गा दास, सचिव तेजपाल चौहान, सुमति सिंघल, शिवानी सिंघल, कैप्टन कमल कुमार, जगदेव चंद धीमान, कुंज बिहारी, निशा राम, सहित अनेक लोग उपस्थित थे। कथा के बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया गया जिसमे सभी भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।
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मितियां में श्रीमददेवी भागवत पुराण कथा का समापन
संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़(सोलन)। स्वयं प्रकट श्री दुर्गा मंदिर मितियां में 9 अप्रैल से शुरू हुई श्रीमद्देवीभागवत पुराण कथा का बुधवार को व्यासपीठ स्वामी हरिचेतनानंद ने कथा के अंतिम दिन देवी के नवम स्वरूप मां सिद्धिदात्री के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि मां सिद्धिदात्री की पूजा से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इनकी पूजा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। कलियुग में भगवती का प्रसिद्ध नाम दुर्गा है। इसी के साथ पूर्णाहुति हुई और कथा विश्राम हो गया।
कथा को गति देते हुए उन्होंने कहा कि दुर्गम नाम के दैत्य ने तपस्या करके पहले अमरता मांगी, फिर वेद मांगे, ब्रह्मा जी ने वेद दे दिए। इसके बाद ब्राह्मण वेद भूल गए, यज्ञ बंद हो गए सब पशुवत हो गया। दुर्गम दैत्य अन्याय और अत्याचार करने लगा फिर देवताओं ने सताक्षी देवी का स्मरण किया। सताक्षी देवी के साथ दुर्गम दैत्य का 11 दिन तक युद्ध हुआ। दुर्गम नाम के दैत्य का वध करने से भगवती का नाम दुर्गा पड़ा। इससे पहले सबसे पहले सुबह 7:30 बजे हवन शुरू हुआ इसमें कमेटी के सदस्यों और दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
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इसके अलावा मंदिर में राम नवमी के अवसर पर रामजन्म काउत्सव मनाया गया। स्वामी जी ने कहा भगवान राम जन्म अवधपुरी में हुआ। प्रभु श्रीराम आज अवधपुरी में दिव्य भव्य मंदिर में विराजमान हैं। स्वामी जी ने भक्तों से आग्रह किया एक बार अवधपुरी में राम लला का दर्शन करने जरूर जाएं। कथा समापन के अवसर पर मंदिर प्रबंध कमेटी के प्रधान दुर्गा राम सहित सभी सदस्यों ने व्यास पूजन कर आशीर्वाद लिया।
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कथा में नंद लाल शर्मा, आरपी चंदेल, मुनीश शर्मा, कमेटी के प्रधान दुर्गा दास, सचिव तेजपाल चौहान, सुमति सिंघल, शिवानी सिंघल, कैप्टन कमल कुमार, जगदेव चंद धीमान, कुंज बिहारी, निशा राम, सहित अनेक लोग उपस्थित थे। कथा के बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया गया जिसमे सभी भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।