{"_id":"571667734f1c1bbf498b4746","slug":"wine-shop-transferr","type":"story","status":"publish","title_hn":"यहां रंग लाया महिलाओं का संघर्ष, शराब का ठेका बंद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यहां रंग लाया महिलाओं का संघर्ष, शराब का ठेका बंद
ब्यूरो/अमर उजाला, कुठाड़ सोलन
Updated Tue, 19 Apr 2016 11:57 PM IST
विज्ञापन
शराब का ठेका महिलाओं के भारी विरोध के बाद आबकारी विभाग को बंद करना पड़ा।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आखिरकार नौ वर्षों से पटटा-नाली पंचायत के केंडोल गांव में चल रहा शराब का ठेका महिलाओं के भारी विरोध के बाद आबकारी विभाग को बंद करना पड़ा। ठेके के बंद होने के बाद इस पंचायत की महिलाओं ने राहत की सांस ली है।
विज्ञापन
प्रदेश के नंबर वन समाचारपत्र ‘अमर उजाला’ ने विश्व महिला दिवस से ही इस मुद्दे को प्रमुखता के साथ प्रकाशित कर महिलाओं की मांग को प्रशासन तक पहुंचाने का कार्य किया था। अब शराब का ठेका बंद होने से लोगों ने राहत की सांस ली है।
विज्ञापन
पटटा-नाली पंचायत की प्रधान आशा कंवर और कांग्रेस सेवा दल के जिला संगठक घनश्याम कंवर ने बताया कि पिछले कई वर्षों से पंचायत में चल रहे इस ठेके के कारण नशाखोरी को बढ़ावा मिल रहा था। साथ ही चौराहे पर ठेका होने से महिलाओं को इस स्थान से गुजरने में सबसे अधिक दिक्कतें हो रही थीं।
विज्ञापन
महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएं भी अब आम हो गई थीं। विश्व महिला दिवस पर आयोजित विशेष महिला पंचायत के दिन गांव की 80 महिलाओं ने ठेके को बंद करने की शिकायत दर्ज करवाई थी। पंचायत ने प्रस्ताव के माध्यम से डीसी सोलन को इस संबंध में ज्ञापन सौंपा था।
गौरतलब है कि ठेका का विरोध करने उतरी महिलाओं ने लगातार तीन दिन तक सड़क पर पहरेदारी करते हुए शराब की आवक पर पूरी तरह से रोक लगा दी थी। महिलाओं के इस विरोध को दून विधायक राम कुमार चौधरी और भाजपा नेता हंस राज ने भी समर्थन दिया था।
डोरा गांव की कमला देवी, शकुंतला देवी, राम देवी, जयवंती, कल्पना देवी, राम प्रताप, नराता राम, लीला देवी, उर्मिला देवी, देवकी देवी, पुष्प लता, सीता देवी तथा वीर सिंह, प्रेम चंद, नरेश, दिनेश, मुकेश, राम कृूष्ण, मनजीत, करमजीत, हरदेई, सुमन, सरोजबाला इत्यादि महिलाओं ने इस मुहिम में एकजूटता दिखाते हुए अपनी मांग को पूरा किया था। इनका कहना है कि ठेका बंद होने से गांव का माहौल भी शांतिपूर्ण हो चुका है।