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Solan News: जंगलों को आग से बचाने के लिए ग्रामीणों को भी लगानी होगी गश्त, उपायुक्त ने जारी किए आदेश
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उपायुक्त ने जारी किए आदेश,15 जुलाई तक जारी रहेगी व्यवस्था, कोताही बरतने पर होगी कार्रवाई
जिला प्रशासन ने सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा के लिए उठाया कदम
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जिले के जंगलों में गर्मियों के दौरान लगने वाली आग की घटनाओं को रोकने और बहुमूल्य वन संपदा की रक्षा के लिए सोलन जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। जिला सोलन में ग्रीष्म ऋतु की तपिश के साथ ही जंगलों में आग लगने का खतरा बढ़ गया है, जिसे देखते हुए उपायुक्त सोलन मनमोहन शर्मा ने विशेष आदेश जारी किए हैं। उपायुक्त ने हिमाचल प्रदेश ग्राम एवं लघु नगर गश्त अधिनियम, 1964 की धारा 3 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह अधिसूचना जारी की है। इन आदेशों के मुताबिक, जिले के समस्त गांवों के निवासी सभी सक्षम पुरुष अपने नजदीकी जंगलों की सुरक्षा के लिए गश्त लगाने के लिए कानूनी रूप से उत्तरदायी होंगे। प्रशासन का मानना है कि स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी से ही आग की घटनाओं पर प्रभावी ढंग से अंकुश लगाया जा सकता है। प्रशासन की ओर से जारी यह आदेश 15 जुलाई 2026 तक प्रभावी रहेंगे। इस अवधि के दौरान ग्रामीणों को जंगलों पर कड़ी नजर रखनी होगी, ताकि आग लगने की किसी भी प्रारंभिक घटना को तुरंत काबू किया जा सके और इसकी सूचना वन विभाग व स्थानीय प्रशासन को दी जा सके। जिला प्रशासन ने सभी पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय निवासियों से अपील की है कि वे इन आदेशों का गंभीरता से पालन करें और पर्यावरण संरक्षण में अपना बहुमूल्य योगदान दें।
सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा प्राथमिकता
उपायुक्त ने कहा कि जंगलों में लगने वाली आग न केवल पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाती है, बल्कि यह सार्वजनिक संपत्ति और वन्यजीवों के लिए भी बड़ा खतरा पैदा करती है। कई बार आग रिहायशी इलाकों तक पहुंच जाती है, जिससे जान-माल का नुकसान होने की संभावना बनी रहती है। इन आदेशों का मुख्य उद्देश्य वनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और आगजनी की घटनाओं को शून्य पर लाना है।
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जिला प्रशासन ने सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा के लिए उठाया कदम
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जिले के जंगलों में गर्मियों के दौरान लगने वाली आग की घटनाओं को रोकने और बहुमूल्य वन संपदा की रक्षा के लिए सोलन जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। जिला सोलन में ग्रीष्म ऋतु की तपिश के साथ ही जंगलों में आग लगने का खतरा बढ़ गया है, जिसे देखते हुए उपायुक्त सोलन मनमोहन शर्मा ने विशेष आदेश जारी किए हैं। उपायुक्त ने हिमाचल प्रदेश ग्राम एवं लघु नगर गश्त अधिनियम, 1964 की धारा 3 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह अधिसूचना जारी की है। इन आदेशों के मुताबिक, जिले के समस्त गांवों के निवासी सभी सक्षम पुरुष अपने नजदीकी जंगलों की सुरक्षा के लिए गश्त लगाने के लिए कानूनी रूप से उत्तरदायी होंगे। प्रशासन का मानना है कि स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी से ही आग की घटनाओं पर प्रभावी ढंग से अंकुश लगाया जा सकता है। प्रशासन की ओर से जारी यह आदेश 15 जुलाई 2026 तक प्रभावी रहेंगे। इस अवधि के दौरान ग्रामीणों को जंगलों पर कड़ी नजर रखनी होगी, ताकि आग लगने की किसी भी प्रारंभिक घटना को तुरंत काबू किया जा सके और इसकी सूचना वन विभाग व स्थानीय प्रशासन को दी जा सके। जिला प्रशासन ने सभी पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय निवासियों से अपील की है कि वे इन आदेशों का गंभीरता से पालन करें और पर्यावरण संरक्षण में अपना बहुमूल्य योगदान दें।
सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा प्राथमिकता
उपायुक्त ने कहा कि जंगलों में लगने वाली आग न केवल पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाती है, बल्कि यह सार्वजनिक संपत्ति और वन्यजीवों के लिए भी बड़ा खतरा पैदा करती है। कई बार आग रिहायशी इलाकों तक पहुंच जाती है, जिससे जान-माल का नुकसान होने की संभावना बनी रहती है। इन आदेशों का मुख्य उद्देश्य वनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और आगजनी की घटनाओं को शून्य पर लाना है।
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