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Solan News: जिले में लंपी से तीन पशुओं की मौत, 230 का चल रहा इलाज
Sun, 30 Aug 2026 12:20 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Sun, 30 Aug 2026 12:20 AM IST
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दो कुनिहार और एक बरोटीवाला में हुई मौत, 60 हजार पशुओं का टीकाकरण पूरा
विभाग का दावा, स्थिति नियंत्रण में सीमावर्ती क्षेत्रों में तेज किया गया है अभियान
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जिले में लंपी वायरस के प्रसार के बीच अब संक्रमण से पशुओं की मौत का मामला भी सामने आ गया है। सोलन जिले के विभिन्न क्षेत्रों में लंपी से तीन पशुओं की मौत दर्ज की गई है, जिनमें से दो मौतें कुनिहार और एक बरोटीवाला क्षेत्र में हुई हैं। वर्तमान में जिले भर में कुल 230 संक्रमित पशुओं का उपचार चल रहा है।
अचानक बढ़े मामलों और पशुओं की मौत के बाद पशुपालन विभाग ने पूरे जिले, विशेषकर सीमावर्ती इलाकों में टीकाकरण अभियान को बेहद तेज कर दिया है। विभाग के आंकड़ों के अनुसार, अभी तक जिले के बॉर्डर क्षेत्रों में करीब 60 हजार पशुओं को गोटपॉक्स का टीका लगाया जा चुका है। पशुपालन विभाग का दावा है कि संक्रमण के फैलाव पर काफी हद तक नियंत्रण पा लिया गया है और अब नए मामले ज्यादा तेजी से सामने नहीं आ रहे हैं। विभाग की टीमें प्रभावित पंचायतों और गांवों में लगातार नजर बनाए हुए हैं ताकि बीमारी को और आगे बढ़ने से रोका जा सके।
इनसेट
विभाग की अपील
उपनिदेशक पशुपालन विभाग डॉ. विवेक लांबा ने पशुपालकों से सतर्क रहने की अपील की है। अधिकारियों के मुताबिक जिन इलाकों से मामले रिपोर्ट हुए हैं, वहां घर-घर जाकर टीकाकरण और जांच का काम जारी है। यदि किसी भी पशु में तेज बुखार, त्वचा पर गांठें या दूध उत्पादन में कमी जैसे लक्षण दिखें, तो उसे तुरंत स्वस्थ पशुओं से अलग कर नजदीकी पशु चिकित्सा केंद्र में संपर्क करें।
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इनसेट
लंपी रोग के मुख्य लक्षण
पशुओं की त्वचा पर छोटी-बड़ी गांठें या चकत्ते बनने लगते हैं।
संक्रमित पशु को तेज बुखार आता है और वह सुस्त पड़ जाता है।
दुधारू पशुओं के दूध उत्पादन क्षमता में अचानक भारी कमी आती है।
पशु की आंखों और नाक से लगातार पानी बहने लगता है।
पशु खाना-पीना छोड़ देता है, जिससे वह लगातार शारीरिक रूप से कमजोर होने लगता है।
इनसेट
बचाव और रोकथाम के उपाय
रोग के लक्षण दिखते ही संक्रमित पशु को स्वस्थ पशुओं से तुरंत अलग स्थान पर बांधें।
पशुपालन विभाग की सलाह पर अपने पशुओं को गोट पॉक्स टीका अवश्य लगवाएं।
पशुओं के रहने के स्थान पर मक्खी, मच्छर को पनपने से रोकने के लिए नियमित रूप से कीट नाशक दवाइयों का छिड़काव करें।
प्रभावित क्षेत्रों से पशुओं की खरीद-फरोख्त या आवाजाही से फिलहाल परहेज करें।
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विभाग का दावा, स्थिति नियंत्रण में सीमावर्ती क्षेत्रों में तेज किया गया है अभियान
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जिले में लंपी वायरस के प्रसार के बीच अब संक्रमण से पशुओं की मौत का मामला भी सामने आ गया है। सोलन जिले के विभिन्न क्षेत्रों में लंपी से तीन पशुओं की मौत दर्ज की गई है, जिनमें से दो मौतें कुनिहार और एक बरोटीवाला क्षेत्र में हुई हैं। वर्तमान में जिले भर में कुल 230 संक्रमित पशुओं का उपचार चल रहा है।
अचानक बढ़े मामलों और पशुओं की मौत के बाद पशुपालन विभाग ने पूरे जिले, विशेषकर सीमावर्ती इलाकों में टीकाकरण अभियान को बेहद तेज कर दिया है। विभाग के आंकड़ों के अनुसार, अभी तक जिले के बॉर्डर क्षेत्रों में करीब 60 हजार पशुओं को गोटपॉक्स का टीका लगाया जा चुका है। पशुपालन विभाग का दावा है कि संक्रमण के फैलाव पर काफी हद तक नियंत्रण पा लिया गया है और अब नए मामले ज्यादा तेजी से सामने नहीं आ रहे हैं। विभाग की टीमें प्रभावित पंचायतों और गांवों में लगातार नजर बनाए हुए हैं ताकि बीमारी को और आगे बढ़ने से रोका जा सके।
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विभाग की अपील
उपनिदेशक पशुपालन विभाग डॉ. विवेक लांबा ने पशुपालकों से सतर्क रहने की अपील की है। अधिकारियों के मुताबिक जिन इलाकों से मामले रिपोर्ट हुए हैं, वहां घर-घर जाकर टीकाकरण और जांच का काम जारी है। यदि किसी भी पशु में तेज बुखार, त्वचा पर गांठें या दूध उत्पादन में कमी जैसे लक्षण दिखें, तो उसे तुरंत स्वस्थ पशुओं से अलग कर नजदीकी पशु चिकित्सा केंद्र में संपर्क करें।
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लंपी रोग के मुख्य लक्षण
पशुओं की त्वचा पर छोटी-बड़ी गांठें या चकत्ते बनने लगते हैं।
संक्रमित पशु को तेज बुखार आता है और वह सुस्त पड़ जाता है।
दुधारू पशुओं के दूध उत्पादन क्षमता में अचानक भारी कमी आती है।
पशु की आंखों और नाक से लगातार पानी बहने लगता है।
पशु खाना-पीना छोड़ देता है, जिससे वह लगातार शारीरिक रूप से कमजोर होने लगता है।
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बचाव और रोकथाम के उपाय
रोग के लक्षण दिखते ही संक्रमित पशु को स्वस्थ पशुओं से तुरंत अलग स्थान पर बांधें।
पशुपालन विभाग की सलाह पर अपने पशुओं को गोट पॉक्स टीका अवश्य लगवाएं।
पशुओं के रहने के स्थान पर मक्खी, मच्छर को पनपने से रोकने के लिए नियमित रूप से कीट नाशक दवाइयों का छिड़काव करें।
प्रभावित क्षेत्रों से पशुओं की खरीद-फरोख्त या आवाजाही से फिलहाल परहेज करें।