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Solan News: पुजारी ने प्रशासन को सौंपा त्याग पत्र, अब स्थाई नियुक्ति की तैयारी शुरू
Tue, 27 Jun 2023 12:38 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Tue, 27 Jun 2023 12:38 AM IST
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सोलन। अधिष्ठात्री देवी मां शूलिनी मंदिर के मुख्य पुजारी ने प्रशासन को त्यागपत्र सौंप दिया है। पुजारी का त्यागपत्र मिलने के बाद जिला प्रशासन की ओर से नए पुजारी को नियुक्त करने की तैयारी शुरू हो गई हैं। वहीं जब तक पुजारी की नियुक्ति नहीं होती है तब तक मंदिर की देखरेख जिला प्रशासन के अधिकारी ही करेंगे। वर्तमान में प्रशासनिक अधिकारी की ओर से मंदिर में सेवाएं दी जा रही हैं। इस दौरान अधिकारियों को मंदिर में शिफ्ट के अनुसार लगाया गया है ताकि श्रद्धालु सुविधापूर्वक माता के दर्शन कर सकें। वहीं अधिकारी ही प्रसाद वितरण का कार्य भी कर रहे हैं।
गौर रहे कि राज्य स्तरीय मां शूलिनी मेले के तीसरे दिन मंदिर पुजारी और जिला प्रशासन के बीच विवाद छिड़ गया था। इस दौरान मंदिर पुजारी ने प्रशासन पर मेले की दूसरी रात में माता की विशेष पूजा के दौरान मौजूद न रहने का आरोप लगाया। वहीं चर्चा रही कि पुजारी को 18 साल से वेतन न मिलने पर यह विवाद शुरू हुआ। इसके बाद अंतिम मेले के दौरान मुख्य पुजारी ने सुबह मां शूलिनी मंदिर के कपाट भी नहीं खोलें और चाबियां मंदिर द्वार पर छोड़ दीं। इसके बाद से प्रशासन ने ही मंदिर का मोर्चा संभाला है। वहीं मंदिर पुजारी ने मेले के तीसरी दिन ही पद छोड़ने को लेकर प्रशासन को त्यागपत्र सौंप दिया था। इसके चलते सोमवार को भी मंदिर के कपाट प्रशासनिक अधिकारी द्वारा ही खुलवाए गए। उनके निर्देश पर ही कर्मचारी ने मंदिर आने वाले लोगों को प्रसाद बांटा। मां शूलिनी ने मेला कबूल किया है। फिर भी मेले के दौरान यह विवाद चर्चा का विषय बना रहा। उधर, तहसीलदार सोलन मुल्तान सिंह बनयाल ने कहा कि मंदिर में फिलहाल प्रशासनिक अधिकारी की तैनाती की गई है। जल्द ही मंदिर के लिए स्थाई पुजारी की नियुक्ति की जाएगी। इसके लिए तैयारी शुरू हो गई है।
कल्याणों का जताया अभार
उपमंडलाधिकारी सोलन कविता ठाकुर ने राज्य स्तरीय मेले में विभिन्न पूजा कारज निर्विघ्न संपन्न करने के लिए कल्याणों का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि तीन दिवसीय मेले में सोलन की अधिष्ठात्री मां शूलिनी की विधिवत पूजा-अर्चना, शोभा यात्रा और पुन: वापसी के कार्य में कल्याणों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रहती है। उन्होंने कहा कि मां शूलिनी मंदिर के द्वार निर्धारित समय पर न खुलने का मामला सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझा लिया गया है। मंदिर परिसर में प्रशासन की ओर से पंडितों की वैकल्पिक व्यवस्था कर दी गई है।
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गौर रहे कि राज्य स्तरीय मां शूलिनी मेले के तीसरे दिन मंदिर पुजारी और जिला प्रशासन के बीच विवाद छिड़ गया था। इस दौरान मंदिर पुजारी ने प्रशासन पर मेले की दूसरी रात में माता की विशेष पूजा के दौरान मौजूद न रहने का आरोप लगाया। वहीं चर्चा रही कि पुजारी को 18 साल से वेतन न मिलने पर यह विवाद शुरू हुआ। इसके बाद अंतिम मेले के दौरान मुख्य पुजारी ने सुबह मां शूलिनी मंदिर के कपाट भी नहीं खोलें और चाबियां मंदिर द्वार पर छोड़ दीं। इसके बाद से प्रशासन ने ही मंदिर का मोर्चा संभाला है। वहीं मंदिर पुजारी ने मेले के तीसरी दिन ही पद छोड़ने को लेकर प्रशासन को त्यागपत्र सौंप दिया था। इसके चलते सोमवार को भी मंदिर के कपाट प्रशासनिक अधिकारी द्वारा ही खुलवाए गए। उनके निर्देश पर ही कर्मचारी ने मंदिर आने वाले लोगों को प्रसाद बांटा। मां शूलिनी ने मेला कबूल किया है। फिर भी मेले के दौरान यह विवाद चर्चा का विषय बना रहा। उधर, तहसीलदार सोलन मुल्तान सिंह बनयाल ने कहा कि मंदिर में फिलहाल प्रशासनिक अधिकारी की तैनाती की गई है। जल्द ही मंदिर के लिए स्थाई पुजारी की नियुक्ति की जाएगी। इसके लिए तैयारी शुरू हो गई है।
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कल्याणों का जताया अभार
उपमंडलाधिकारी सोलन कविता ठाकुर ने राज्य स्तरीय मेले में विभिन्न पूजा कारज निर्विघ्न संपन्न करने के लिए कल्याणों का आभार जताया है। उन्होंने कहा कि तीन दिवसीय मेले में सोलन की अधिष्ठात्री मां शूलिनी की विधिवत पूजा-अर्चना, शोभा यात्रा और पुन: वापसी के कार्य में कल्याणों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रहती है। उन्होंने कहा कि मां शूलिनी मंदिर के द्वार निर्धारित समय पर न खुलने का मामला सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझा लिया गया है। मंदिर परिसर में प्रशासन की ओर से पंडितों की वैकल्पिक व्यवस्था कर दी गई है।
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