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Solan News: 100 किसानों को मशरूम की खेती के आधुनिक गुर सिखाए
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किसान दिवस के उपलक्ष्य में खुंब अनुसंधान निदेशालय सोलन में कार्यक्रम आयोजित, प्रगतिशील किसान परस राम सम्मानित
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। खुंब अनुसंधान एवं निदेशालय सोलन में मंगलवार को किसान दिवस के उपलक्ष्य में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मशरूम एक पौष्टिक आहार थीम पर आधारित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता निदेशालय के कार्यकारी निदेशक डॉ. बृज लाल अत्री ने की। इस दौरान सोलन और आसपास के गांवों से आए लगभग 100 किसानों को मशरूम की खेती के आधुनिक गुर सिखाए गए। इस अवसर पर मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए सोलन के प्रगतिशील मशरूम उत्पादक परस राम को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। तकनीकी सत्र में वैज्ञानिकों ने किसानों को विकसित भारत जी-राम-जी योजना के बारे में विस्तार से जागरूक किया। विशेषज्ञों ने बताया कि इस योजना के तहत कृषि और मशरूम खेती जैसी संबद्ध गतिविधियों के लिए सरकार की ओर से क्या-क्या लाभ और सहायता प्रदान की जा रही है। उन्होंने जोर दिया कि मशरूम न केवल पोषण और औषधीय गुणों से भरपूर है, बल्कि यह ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका का एक स्थायी स्रोत भी बन सकता है।
प्रदर्शनी में दिखीं मशरूम की विभिन्न किस्में
कार्यक्रम के दौरान एक प्रदर्शनी भी आयोजित की गई, जिसमें बटन, ऑयस्टर, शिटाके, टर्की टेल, कॉर्डिसेप्स और एनोकी मशरूम के नमूनों को प्रदर्शित किया गया। इसके अलावा, मशरूम का बीज (स्पॉन) और इससे बनने वाले वैल्यू-एडेड उत्पादों की जानकारी भी दी गई।
कोट
इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य किसानों को मशरूम की खेती को एक पर्यावरण अनुकूल और आय बढ़ाने वाले उद्यम के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित करना है। वैज्ञानिक और किसानों के बीच सीधा संवाद होने से नई तकनीक खेतों तक पहुंचेगी। -डॉ. बृज लाल अत्री, कार्यकारी निदेशक
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संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। खुंब अनुसंधान एवं निदेशालय सोलन में मंगलवार को किसान दिवस के उपलक्ष्य में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मशरूम एक पौष्टिक आहार थीम पर आधारित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता निदेशालय के कार्यकारी निदेशक डॉ. बृज लाल अत्री ने की। इस दौरान सोलन और आसपास के गांवों से आए लगभग 100 किसानों को मशरूम की खेती के आधुनिक गुर सिखाए गए। इस अवसर पर मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए सोलन के प्रगतिशील मशरूम उत्पादक परस राम को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। तकनीकी सत्र में वैज्ञानिकों ने किसानों को विकसित भारत जी-राम-जी योजना के बारे में विस्तार से जागरूक किया। विशेषज्ञों ने बताया कि इस योजना के तहत कृषि और मशरूम खेती जैसी संबद्ध गतिविधियों के लिए सरकार की ओर से क्या-क्या लाभ और सहायता प्रदान की जा रही है। उन्होंने जोर दिया कि मशरूम न केवल पोषण और औषधीय गुणों से भरपूर है, बल्कि यह ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका का एक स्थायी स्रोत भी बन सकता है।
प्रदर्शनी में दिखीं मशरूम की विभिन्न किस्में
कार्यक्रम के दौरान एक प्रदर्शनी भी आयोजित की गई, जिसमें बटन, ऑयस्टर, शिटाके, टर्की टेल, कॉर्डिसेप्स और एनोकी मशरूम के नमूनों को प्रदर्शित किया गया। इसके अलावा, मशरूम का बीज (स्पॉन) और इससे बनने वाले वैल्यू-एडेड उत्पादों की जानकारी भी दी गई।
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इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य किसानों को मशरूम की खेती को एक पर्यावरण अनुकूल और आय बढ़ाने वाले उद्यम के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित करना है। वैज्ञानिक और किसानों के बीच सीधा संवाद होने से नई तकनीक खेतों तक पहुंचेगी। -डॉ. बृज लाल अत्री, कार्यकारी निदेशक
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