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Solan News: प्लांट से आपूर्ति ठप, ढोने पड़ रहे ऑक्सीजन सिलिंडर
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टेंडर खत्म होने से क्षेत्रीय अस्पताल के ऑक्सीजन प्लांट पर लटका ताला
सभी वार्डों को प्लांट से सीधी ऑक्सीजन सप्लाई की थी व्यवस्था
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। क्षेत्रीय अस्पताल के ऑक्सीजन प्लांट का टेंडर खत्म होने के बाद उसे बंद कर दिया गया है। इसके चलते अस्पताल की पाइपलाइन से ऑक्सीजन की आपूर्ति ठप हो गई है। अब सभी वार्डों में मरीजों और तीमारदारों को भारी-भरकम सिलिंडरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
इस प्लांट से अस्पताल के लगभग सभी वार्डों में ऑक्सीजन की सीधी आपूर्ति होती थी। बेड तक पाइपलाइन पहुंचने से आपात स्थिति में मरीजों को तुरंत प्राणवायु उपलब्ध हो जाती थी। प्लांट बंद होने के बाद अस्पताल प्रशासन को दोबारा मैनुअल सिलिंडरों का सहारा लेना पड़ रहा है।
प्लांट बंद होने का सबसे अधिक असर अस्पताल की कार्यप्रणाली पर पड़ा है। वार्डों तक भारी ऑक्सीजन सिलिंडर पहुंचाने में कर्मचारियों और तीमारदारों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। एक वार्ड से दूसरे वार्ड तक सिलिंडर ले जाना न केवल श्रमसाध्य है, बल्कि आपातकालीन स्थिति में समय की बर्बादी भी साबित हो सकता है। सिलिंडर खत्म होने पर बार-बार उन्हें बदलने की प्रक्रिया में मरीजों की जान पर भी जोखिम बना रहता है।
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सूत्रों के अनुसार, प्लांट का संचालन करने वाली कंपनी का टेंडर समय पर नवीनीकृत नहीं किया गया, जिसके चलते यह स्थिति उत्पन्न हुई है। इस संबंध में क्षेत्रीय अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश पंवार ने बताया कि जल्द ही नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
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सभी वार्डों को प्लांट से सीधी ऑक्सीजन सप्लाई की थी व्यवस्था
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। क्षेत्रीय अस्पताल के ऑक्सीजन प्लांट का टेंडर खत्म होने के बाद उसे बंद कर दिया गया है। इसके चलते अस्पताल की पाइपलाइन से ऑक्सीजन की आपूर्ति ठप हो गई है। अब सभी वार्डों में मरीजों और तीमारदारों को भारी-भरकम सिलिंडरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
इस प्लांट से अस्पताल के लगभग सभी वार्डों में ऑक्सीजन की सीधी आपूर्ति होती थी। बेड तक पाइपलाइन पहुंचने से आपात स्थिति में मरीजों को तुरंत प्राणवायु उपलब्ध हो जाती थी। प्लांट बंद होने के बाद अस्पताल प्रशासन को दोबारा मैनुअल सिलिंडरों का सहारा लेना पड़ रहा है।
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प्लांट बंद होने का सबसे अधिक असर अस्पताल की कार्यप्रणाली पर पड़ा है। वार्डों तक भारी ऑक्सीजन सिलिंडर पहुंचाने में कर्मचारियों और तीमारदारों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। एक वार्ड से दूसरे वार्ड तक सिलिंडर ले जाना न केवल श्रमसाध्य है, बल्कि आपातकालीन स्थिति में समय की बर्बादी भी साबित हो सकता है। सिलिंडर खत्म होने पर बार-बार उन्हें बदलने की प्रक्रिया में मरीजों की जान पर भी जोखिम बना रहता है।
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सूत्रों के अनुसार, प्लांट का संचालन करने वाली कंपनी का टेंडर समय पर नवीनीकृत नहीं किया गया, जिसके चलते यह स्थिति उत्पन्न हुई है। इस संबंध में क्षेत्रीय अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राकेश पंवार ने बताया कि जल्द ही नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया पूरी की जाएगी।