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मृत्युलोक शिव पूजन का विशेष महत्त्व : पंडित विक्रांत
Wed, 24 Jul 2024 11:45 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Wed, 24 Jul 2024 11:45 PM IST
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कुनिहार में शिव महापुरान कथा का रसपान करवाते हुए। संवाद
कुनिहार में शिव कांवड़ सेवा संघ करवा रहा शिव महापुराण कथा
संवाद न्यूज एजेंसी
कुनिहार(सोलन)। शिव कांवड़ सेवा संघ कुनिहार के सौजन्य से श्रावण मास के पावन अवसर पर शिव महापुराण कथा का शुभारंभ राजदरबार के परिसर में हुआ। प्रथम दिवस पंडित विक्रांत शर्मा ने बताया कि ज्ञान और करुणा का साक्षात स्वरूप शिव है। शिव शिवा संपूर्ण जगत के माता-पिता हैं। सूत जी जो पुराण वक्ता है वह शौनकादि ऋषियों से कहते हैं की प्रयाग तीर्थ से शिव पुराण की अविरल धारा प्रारंभ होती है। शिवलिंग का स्तंभ ब्रह्मा और विष्णु के मध्य हुआ है जो संपूर्ण संसार के लिए पूजनीय है और मृत्युलोक के प्राणियों के लिए शिव पूजन का विशेष महत्त्व है। कहा कि जो कोई भी शिवलिंग पर बेलपत्र, भांग, धतूरा, कमल पुष्प, दूध, दही, शहद व पंचामृत से स्नान कर करवाता है वह आवागमन के चक्कर से बच जाता है। कथा आयोजक कांवड़ संघ के राधा रमन शर्मा व विनोद भारद्वाज ने बताया कि कथा का आयोजन कई वर्षो से किया जा रहा है। कथा में प्रतिदिन पार्थेश्वर शिवलिंग को सुबह की पूजा में पंडित रमेश शर्मा के सहयोग से बनाया जाएगा। वहीं कथा समाप्ति के उपरांत कथा स्थल से गंबर नदी तक ढोल नगाड़ों के साथ पार्थेश्वर शिवलिंग का विसर्जन रोजाना किया जाएगा। कथा में विनोद भारद्वाज, राधा रमन शर्मा, सुरेंद्र कुमार, नीरज शर्मा, हेमंत जोशी, राहुल, मृदुल व आरव सहित कावड़ संघ के सभी सदस्यों सहित कथा प्रेमी मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुनिहार(सोलन)। शिव कांवड़ सेवा संघ कुनिहार के सौजन्य से श्रावण मास के पावन अवसर पर शिव महापुराण कथा का शुभारंभ राजदरबार के परिसर में हुआ। प्रथम दिवस पंडित विक्रांत शर्मा ने बताया कि ज्ञान और करुणा का साक्षात स्वरूप शिव है। शिव शिवा संपूर्ण जगत के माता-पिता हैं। सूत जी जो पुराण वक्ता है वह शौनकादि ऋषियों से कहते हैं की प्रयाग तीर्थ से शिव पुराण की अविरल धारा प्रारंभ होती है। शिवलिंग का स्तंभ ब्रह्मा और विष्णु के मध्य हुआ है जो संपूर्ण संसार के लिए पूजनीय है और मृत्युलोक के प्राणियों के लिए शिव पूजन का विशेष महत्त्व है। कहा कि जो कोई भी शिवलिंग पर बेलपत्र, भांग, धतूरा, कमल पुष्प, दूध, दही, शहद व पंचामृत से स्नान कर करवाता है वह आवागमन के चक्कर से बच जाता है। कथा आयोजक कांवड़ संघ के राधा रमन शर्मा व विनोद भारद्वाज ने बताया कि कथा का आयोजन कई वर्षो से किया जा रहा है। कथा में प्रतिदिन पार्थेश्वर शिवलिंग को सुबह की पूजा में पंडित रमेश शर्मा के सहयोग से बनाया जाएगा। वहीं कथा समाप्ति के उपरांत कथा स्थल से गंबर नदी तक ढोल नगाड़ों के साथ पार्थेश्वर शिवलिंग का विसर्जन रोजाना किया जाएगा। कथा में विनोद भारद्वाज, राधा रमन शर्मा, सुरेंद्र कुमार, नीरज शर्मा, हेमंत जोशी, राहुल, मृदुल व आरव सहित कावड़ संघ के सभी सदस्यों सहित कथा प्रेमी मौजूद रहे।