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Solan News: शुकदेव को माता के गर्भ में ही हरि चिंतन से मिल गया था वैराग्य-आचार्य
Wed, 10 Apr 2024 11:50 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Wed, 10 Apr 2024 11:50 PM IST
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बैहमंडी में भागवत कथा के दूसरे दिन सुनाया शुकदेव का प्रसंग
संवाद न्यूज एजेंसी
बरोटीवाला (सोलन)। ग्राम पंचायत सौड़ी के गांव बैहमड़ी के मां दुर्गा मंदिर में श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के दूसरे दिन शुकदेव प्रसंग का रसपान भक्तों को करवाया गया। कथा के दूसरे दिन आचार्य धर्मवीर शास्त्री ने बताया कि शुकदेव ने अपनी माता के गर्भ में हरि चिंतन करते-करते संसार के प्रपंच से वैराग्य हो गया था और प्रकट होते ही वन की ओर भाग गये थे।
पुत्र मोह से ग्रस्त पीछे भागते हुए अपने पूज्य पिता को भी जीवन मुक्ति का उपदेश दिया। अभिमन्यु पुत्र परीक्षित का उद्धार मात्र साप्ताहिक विधि से भागवत की अमृतमय कथा का रसास्वादन कराकर ही करा दिया। इसलिए शुकदेव भागवत के आदि वक्ता हैं।
यदि श्रोता वक्ता उत्तम लक्षणों से युक्त हों तो सात दिनों में ही भागवत की कथा कल्याण कर मंगल करने वाली तथा जीवन मरण दोनों को सार्थक करती है। भगवान के भक्तों को सदा ही कथा सत्संग करते रहना चाहिए। इस अवसर पर जोगिंदर ठाकुर, भाग सिंह चंदेल, मानसिंह, गोपालचंद, रामजी दास, रामगोपाल, वीरेंद्र कुमार, बंतराम, गुरुदेव सिंह, नरेश कुमार, रणजीतसिंह, बंत राम समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बरोटीवाला (सोलन)। ग्राम पंचायत सौड़ी के गांव बैहमड़ी के मां दुर्गा मंदिर में श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के दूसरे दिन शुकदेव प्रसंग का रसपान भक्तों को करवाया गया। कथा के दूसरे दिन आचार्य धर्मवीर शास्त्री ने बताया कि शुकदेव ने अपनी माता के गर्भ में हरि चिंतन करते-करते संसार के प्रपंच से वैराग्य हो गया था और प्रकट होते ही वन की ओर भाग गये थे।
पुत्र मोह से ग्रस्त पीछे भागते हुए अपने पूज्य पिता को भी जीवन मुक्ति का उपदेश दिया। अभिमन्यु पुत्र परीक्षित का उद्धार मात्र साप्ताहिक विधि से भागवत की अमृतमय कथा का रसास्वादन कराकर ही करा दिया। इसलिए शुकदेव भागवत के आदि वक्ता हैं।
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यदि श्रोता वक्ता उत्तम लक्षणों से युक्त हों तो सात दिनों में ही भागवत की कथा कल्याण कर मंगल करने वाली तथा जीवन मरण दोनों को सार्थक करती है। भगवान के भक्तों को सदा ही कथा सत्संग करते रहना चाहिए। इस अवसर पर जोगिंदर ठाकुर, भाग सिंह चंदेल, मानसिंह, गोपालचंद, रामजी दास, रामगोपाल, वीरेंद्र कुमार, बंतराम, गुरुदेव सिंह, नरेश कुमार, रणजीतसिंह, बंत राम समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
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