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Solan News: आपदा से बेघर हुए लोगों को नहीं मिली जमीन, जंगलों में रहने को मजबूर
Sat, 11 May 2024 11:46 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Sat, 11 May 2024 11:46 PM IST
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-खास खबर-
दून की कई पंचायतों के दर्जनों परिवार अभी भी नहीं लौटे मुख्य धारा में
गर्मियों के दौरान झोपड़ियां बनाकर रह रहे हैं लोग, आ रही हैं दिक्कतें
बीते अगस्तमें हुई बारिश से आ गई थी दून के सैकड़ों घरों में दरारें
संवाद न्यूज एजेंसी
बरोटीवाला(सोलन)। अगस्त में आई आपदा से बेघर हुए लोग अभी जमीन अलॉट न होने पर अभी तक जंगल में ही रातें गुजारने को मजबूर हैं। दून की आधा दर्जन पंचायतों में दर्जनों परिवार आपदा से जमीन नष्ट होने के बाद अपना दोबारा आशियाना नहीं बना पाए हैं।
दून की केंडोल पंचायत के धनयोण, केंडोल, रूग भोगपुर गांव में सबसे अधिक भूमि कटाव हुआ है। यहां पर एक दर्जन के करीब लोग ऐसे हैं जिसके पास खाली मकान थे और यह मकान मलबे में समा गए। ऐसे में यह लोग आज भी जंगल में ही झोपड़ी बना कर रह रहे हैं। इन लोगों को सरकार की ओर से मुआवजा राशि मिल चुकी है लेकिन इनके पास जमीन नहीं है। जमीन न होने से यह लोग अपना घर नहीं बना पा रहे हैं।
कैंडोल के प्रधान अनिल शर्मा ने बताया कि उनकी पंचायत के हरिसिंह, पप्पी राम, जीतराम, लेख राम, गुरनाम सिंह, सुरेंद्र कुमार, लीला देवी, हरी चंद, श्यामलाल, बनवारी लाल, वीर सिंह, मोहनलाल आदि परिवार बेघर हो गए हैं जिनके घर और जमीन पूरी तरह से नष्ट हो गए हैं। सरकार ने इन लोगों को मकान बनाने के लिए कहीं सुरक्षित जगह उपलब्ध नहीं करवाई गई है। इस कारण लोग किराए की झुग्गियों में रहने के लिए मजबूर हैं। केंडोल पंचायत के अलावा पट्टा नाली, पट्टा बाडियां, साई, बुआसनी में भी दर्जनों परिवार अभी भी जंगल में हैं। पट्टा नाली के प्रधान हेमचंद ने बताया कि एक वर्ष बीतने को है और फिर बरसात आने में लगभग एक से डेढ़ महीना बचा है इस कारण लोग सहमे हुए हैं। लोगों ने सरकार से मांग की है कि प्राकृतिक आपदा से बेघर हुए लोगों को जल्द से जल्द मकान बनाने के लिए जमीन उपलब्ध करवाई जाए।
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इनसेट
रिपोर्ट की जा रही तैयार
उधर, नालागढ़ के एसडीएम दिव्यांशु सिंगल ने बताया कि यह मामला सरकार के स्तर पर चला हुआ है। जिन लोगों के पास जमीन नहीं बची है। उनके आवेदन मिले हैं। इन आवेदनों के आधार पर प्रति प्रभावित व्यक्ति की रिपोर्ट तैयार होगी। अगर उक्त व्यक्ति के पास कहीं पर भी जमीन नहीं होगी तो सरकार भूमिहीनों के मकान बनाने के लिए जमीन देगी।
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दून की कई पंचायतों के दर्जनों परिवार अभी भी नहीं लौटे मुख्य धारा में
गर्मियों के दौरान झोपड़ियां बनाकर रह रहे हैं लोग, आ रही हैं दिक्कतें
बीते अगस्तमें हुई बारिश से आ गई थी दून के सैकड़ों घरों में दरारें
संवाद न्यूज एजेंसी
बरोटीवाला(सोलन)। अगस्त में आई आपदा से बेघर हुए लोग अभी जमीन अलॉट न होने पर अभी तक जंगल में ही रातें गुजारने को मजबूर हैं। दून की आधा दर्जन पंचायतों में दर्जनों परिवार आपदा से जमीन नष्ट होने के बाद अपना दोबारा आशियाना नहीं बना पाए हैं।
दून की केंडोल पंचायत के धनयोण, केंडोल, रूग भोगपुर गांव में सबसे अधिक भूमि कटाव हुआ है। यहां पर एक दर्जन के करीब लोग ऐसे हैं जिसके पास खाली मकान थे और यह मकान मलबे में समा गए। ऐसे में यह लोग आज भी जंगल में ही झोपड़ी बना कर रह रहे हैं। इन लोगों को सरकार की ओर से मुआवजा राशि मिल चुकी है लेकिन इनके पास जमीन नहीं है। जमीन न होने से यह लोग अपना घर नहीं बना पा रहे हैं।
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कैंडोल के प्रधान अनिल शर्मा ने बताया कि उनकी पंचायत के हरिसिंह, पप्पी राम, जीतराम, लेख राम, गुरनाम सिंह, सुरेंद्र कुमार, लीला देवी, हरी चंद, श्यामलाल, बनवारी लाल, वीर सिंह, मोहनलाल आदि परिवार बेघर हो गए हैं जिनके घर और जमीन पूरी तरह से नष्ट हो गए हैं। सरकार ने इन लोगों को मकान बनाने के लिए कहीं सुरक्षित जगह उपलब्ध नहीं करवाई गई है। इस कारण लोग किराए की झुग्गियों में रहने के लिए मजबूर हैं। केंडोल पंचायत के अलावा पट्टा नाली, पट्टा बाडियां, साई, बुआसनी में भी दर्जनों परिवार अभी भी जंगल में हैं। पट्टा नाली के प्रधान हेमचंद ने बताया कि एक वर्ष बीतने को है और फिर बरसात आने में लगभग एक से डेढ़ महीना बचा है इस कारण लोग सहमे हुए हैं। लोगों ने सरकार से मांग की है कि प्राकृतिक आपदा से बेघर हुए लोगों को जल्द से जल्द मकान बनाने के लिए जमीन उपलब्ध करवाई जाए।
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रिपोर्ट की जा रही तैयार
उधर, नालागढ़ के एसडीएम दिव्यांशु सिंगल ने बताया कि यह मामला सरकार के स्तर पर चला हुआ है। जिन लोगों के पास जमीन नहीं बची है। उनके आवेदन मिले हैं। इन आवेदनों के आधार पर प्रति प्रभावित व्यक्ति की रिपोर्ट तैयार होगी। अगर उक्त व्यक्ति के पास कहीं पर भी जमीन नहीं होगी तो सरकार भूमिहीनों के मकान बनाने के लिए जमीन देगी।