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मिड-डे मील वर्करों के मानदेय में 16 साल से बढ़ोतरी नहीं: सीटू
Mon, 26 Oct 2026 02:31 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Mon, 26 Oct 2026 02:31 AM IST
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महंगाई ने तोड़ी कमर, बेहद कम मानदेय पर काम करने को मजबूर वर्कर
1 से 2 दिसंबर को मजदूर विरोधी नीतियों व चार श्रम संहिताओं के खिलाफ दिल्ली घेरेंगे मजदूर
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। मिड-डे मील वर्कर यूनियन सोलन ब्लॉक की बैठक में आगामी 1 और 2 दिसंबर 2026 को दिल्ली में होने वाले घेराव की तैयारियों पर चर्चा की गई। बैठक में केंद्र सरकार की नीतियों, चार श्रम संहिताओं और स्कीम वर्करों की समस्याओं के खिलाफ संघर्ष तेज करने का आह्वान किया गया। साथ ही संगठन की सदस्यता बढ़ाने पर जोर दिया गया।
बैठक को संबोधित करते हुए सीटू के जिला महासचिव मोहित वर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार महिलाओं के सम्मान और सशक्तीकरण की बात करती है, लेकिन मिड-डे मील वर्करों के मानदेय में दिसंबर 2009 के बाद से कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। उनके अनुसार, केंद्रीय मानदेय आज भी 1,000 रुपये प्रतिमाह है।
मोहित वर्मा ने कहा कि 16 साल से अधिक समय बीतने के बावजूद मानदेय में वृद्धि नहीं होना चिंता का विषय है। महंगाई के कारण राशन, रसोई गैस, बच्चों की शिक्षा और रोजमर्रा की जरूरतों पर खर्च लगातार बढ़ रहा है, जबकि मिड-डे मील वर्करों को बेहद कम मानदेय में काम करना पड़ रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से मिड-डे मील वर्करों की समस्याओं का समाधान करने की मांग करते हुए कहा कि उनके अधिकारों और मांगों को लेकर आंदोलन तेज किया जाएगा।
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1 से 2 दिसंबर को मजदूर विरोधी नीतियों व चार श्रम संहिताओं के खिलाफ दिल्ली घेरेंगे मजदूर
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। मिड-डे मील वर्कर यूनियन सोलन ब्लॉक की बैठक में आगामी 1 और 2 दिसंबर 2026 को दिल्ली में होने वाले घेराव की तैयारियों पर चर्चा की गई। बैठक में केंद्र सरकार की नीतियों, चार श्रम संहिताओं और स्कीम वर्करों की समस्याओं के खिलाफ संघर्ष तेज करने का आह्वान किया गया। साथ ही संगठन की सदस्यता बढ़ाने पर जोर दिया गया।
बैठक को संबोधित करते हुए सीटू के जिला महासचिव मोहित वर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार महिलाओं के सम्मान और सशक्तीकरण की बात करती है, लेकिन मिड-डे मील वर्करों के मानदेय में दिसंबर 2009 के बाद से कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। उनके अनुसार, केंद्रीय मानदेय आज भी 1,000 रुपये प्रतिमाह है।
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मोहित वर्मा ने कहा कि 16 साल से अधिक समय बीतने के बावजूद मानदेय में वृद्धि नहीं होना चिंता का विषय है। महंगाई के कारण राशन, रसोई गैस, बच्चों की शिक्षा और रोजमर्रा की जरूरतों पर खर्च लगातार बढ़ रहा है, जबकि मिड-डे मील वर्करों को बेहद कम मानदेय में काम करना पड़ रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से मिड-डे मील वर्करों की समस्याओं का समाधान करने की मांग करते हुए कहा कि उनके अधिकारों और मांगों को लेकर आंदोलन तेज किया जाएगा।
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