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नालागढ़ कृषि उपज मंडी में होगी धान की खरीद
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बद्दी(सोलन)। गेहूं के बाद अब धान की फसल भी नालागढ़ कृषि उपज मंडी में खरीदी जाएगी। सरकार और विभाग ने धान खरीदने का भी फैसला लिया है। अब किसानों को अपनी धान बेचने के लिए भी दर-दर की ठोकरें नहीं खानी पड़ेंगी। 20 दिन पहले नालागढ़ में गेहूं खरीद केंद्र खुला जिसमें अभी तक 8 हजार क्विंटल गेहूं खरीदी जा चुकी है।
अगर समय रहते यहां पर खरीद केंद्र खुल जाता तो 25 हजार क्विंटल गेहूं खरीदी जा सकती थी। खरीद केंद्र में 30 मई तक गेहूं खरीदने की अंतिम तिथि रखी गई है। यहां से खरीदा गेहूं भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) को भेज दिया है। गेहूं की रिकार्ड खरीद को देखते हुए यहां पर अब विभाग व सरकार ने धान की फसल को भी खरीदने का निर्णय लिया है। अब बीबीएन के किसानों को धान के लिए पंजाब की मंडियों में नहीं भटकना पड़ेगा।
बीबीएन में 3750 हेक्टेयर जमीन पर धान उगाई जाती है जिस पर करीब 18 हजार मीट्रिक टन उत्पादन हो जाता है। यहां के किसान अपनी धान की फसल को बेचने के लिए पंजाब की मंडियों पर निर्भर रहते हैं। अब नालागढ़ में की धान की खरीद शुरू होने से किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।
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कृषि उपज मंडी सोलन के सचिव रविंद्र शर्मा ने बताया कि खरीफ के सीजन में विभाग ने धान खरीदने की योजना बनाई है। जिले के किसानों को पंजाब की मंडियों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। सरकार जो भी एमएसपी निर्धारित करेगी, उसी हिसाब से किसानों से धान खरीदा जाएगा।
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अगर समय रहते यहां पर खरीद केंद्र खुल जाता तो 25 हजार क्विंटल गेहूं खरीदी जा सकती थी। खरीद केंद्र में 30 मई तक गेहूं खरीदने की अंतिम तिथि रखी गई है। यहां से खरीदा गेहूं भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) को भेज दिया है। गेहूं की रिकार्ड खरीद को देखते हुए यहां पर अब विभाग व सरकार ने धान की फसल को भी खरीदने का निर्णय लिया है। अब बीबीएन के किसानों को धान के लिए पंजाब की मंडियों में नहीं भटकना पड़ेगा।
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बीबीएन में 3750 हेक्टेयर जमीन पर धान उगाई जाती है जिस पर करीब 18 हजार मीट्रिक टन उत्पादन हो जाता है। यहां के किसान अपनी धान की फसल को बेचने के लिए पंजाब की मंडियों पर निर्भर रहते हैं। अब नालागढ़ में की धान की खरीद शुरू होने से किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।
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कृषि उपज मंडी सोलन के सचिव रविंद्र शर्मा ने बताया कि खरीफ के सीजन में विभाग ने धान खरीदने की योजना बनाई है। जिले के किसानों को पंजाब की मंडियों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। सरकार जो भी एमएसपी निर्धारित करेगी, उसी हिसाब से किसानों से धान खरीदा जाएगा।