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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Solan News ›   Leech and cup therapy to be introduced in the district for the first time

Solan News: जिले में पहली बार शुरू होगी लीच और कप थेरेपी

Mon, 19 Oct 2026 11:42 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 19 Oct 2026 11:42 PM IST
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पुराने दर्द और कई बीमारियों के निदान में मिलेगी मदद
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आयुर्वेदिक अस्पताल में नए चिकित्सक की नियुक्ति के बाद उपचार की तैयारी
निशिल मेहता
सोलन। जिले में जोड़ों के दर्द और अन्य समस्याओं से जूझ रहे मरीजों के लिए पंडित दीन दयाल उपाध्याय जिला आयुर्वेदिक अस्पताल सोलन में पहली बार लीच (जोंक) और कप थेरेपी शुरू की जा रही है। अस्पताल प्रशासन ने दोनों उपचार पद्धतियों को शुरू करने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। इससे मरीजों को इन सुविधाओं के लिए दूसरे जिलों या राज्यों में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
अस्पताल में नए विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती के बाद प्रशासन ने ये निर्णय लिया है। लीच थेरेपी में प्रभावित स्थान पर विशेष रूप से पाली गई मेडिकल जोंक का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि कप थेरेपी में त्वचा पर विशेष कप लगाकर सक्शन बनाया जाता है। इन पद्धतियों का उपयोग कुछ स्थितियों में दर्द और सूजन से राहत देने के लिए किया जाता है।
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अस्पताल प्रशासन के अनुसार, दोनों थेरेपी शुरू करने के लिए जरूरी तैयारियां की जा रही हैं। तैयारियां पूरी होने के बाद मरीजों को उपचार के लिए समय दिया जाएगा। फिलहाल अस्पताल में पंचकर्म करवाने के लिए बड़ी संख्या में मरीज पहुंच रहे हैं। इसके लिए वेटिंग लिस्ट करीब दो सप्ताह तक है।
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दिल्ली से मंगवाई मेडिकल जोंक
लीच थेरेपी के लिए अस्पताल प्रशासन ने मेडिकल जोंक दिल्ली से मंगवाई हैं। अस्पताल में एक बार लीच थेरेपी करवाने का शुल्क 140 रुपये निर्धारित है। कप थेरेपी का शुल्क भी तय कर दिया गया है।
क्या है लीच थेरेपी
लीच थेरेपी एक पारंपरिक उपचार पद्धति है, जिसमें मेडिकल जोंक का उपयोग किया जाता है। जोंक की लार में हिरुडिन सहित ऐसे पदार्थ होते हैं, जो रक्त के थक्के बनने की प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं। चिकित्सा में इसका उपयोग कुछ चुनिंदा स्थितियों में किया जाता है। इसे प्रशिक्षित विशेषज्ञ की देखरेख में ही किया जाना चाहिए, क्योंकि इससे रक्तस्राव और संक्रमण जैसे जोखिम भी हो सकते हैं।

क्या है कप थेरेपी
कप थेरेपी में कांच, सिलिकॉन या अन्य सामग्री से बने विशेष कप त्वचा पर लगाए जाते हैं। इनके जरिए त्वचा पर सक्शन बनाया जाता है। कुछ लोगों को इससे मांसपेशियों के दर्द में अस्थायी राहत महसूस हो सकती है, लेकिन सभी समस्याओं में इसकी प्रभावशीलता के पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं। इसे भी प्रशिक्षित विशेषज्ञ की देखरेख में करवाना चाहिए।
अस्पताल में मरीजों को लीच और कप थेरेपी की सुविधा मिलेगी। इसे शुरू करने की तैयारियां चल रही हैं और दोनों के शुल्क तय कर लिए गए हैं।
-डॉ. अनिता गौतम, प्रभारी, जिला आयुर्वेदिक अस्पताल सोलन
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