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Solan News: कृष्ण जन्म की खुशी में खूब झूमे भक्त, भक्तिमय हुआ जालपा मंदिर
Sat, 13 Apr 2024 10:57 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Sat, 13 Apr 2024 10:57 PM IST
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महुआ में पांचवें दिन सुनाई श्रीकृष्ण जन्म की कथा
संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़(सोलन)। नालागढ़ के साथ लगते पहाड़ी क्षेत्र तिरला महुआ स्थित जालपा माता मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन व्यासपीठ गोपाल कृष्ण ने कृष्ण जन्म का प्रसंग सुनाया। कंस ने अपनी बहन देवकी का विवाह अपने मित्र वासुदेव नामक यदुवंशी से किया। जब कंस अपनी बहन देवकी को विदा कर ससुराल पहुंचाने जा रहा था तो रास्ते में आकाशवाणी हुई, हे कंस, जिस देवकी को तू बड़े प्रेम से ले जा रहा है, उसी देवकी का आठवें गर्भ से उत्पन्न बालक तेरा वध करेगा। यह सुनकर कंस वसुदेव को मारने के लिए उद्यत हुआ।
कंस ने वसुदेव और देवकी को कारागृह में डाल दिया और उनके एक-एक करके छह बच्चों को कंस ने मार डाला। सातवें गर्भ को योगमाया ने वसुदेव की दूसरी पत्नी रोहिणी के गर्भ में स्थापित कर दिया था। आठवां बच्चा होने वाला था। जिस समय वासुदेव-देवकी को पुत्र पैदा हुआ, उसी समय संयोग से यशोदा के गर्भ से एक कन्या का जन्म हुआ, जो 'माया' थी। वहीं कारागार में श्रीकृष्ण प्रकट हुए। जिन्हें वासुदेव ने वृंदावन में माता यशोदा के पास छोड़ दिया और वहां से कन्या को कारागार में लाए। अब कंस को सूचना मिली कि वसुदेव-देवकी को बच्चा पैदा हुआ है। उसने बंदीगृह में जाकर देवकी के हाथ से नवजात कन्या को छीनकर पृथ्वी पर पटक देना चाहा, परंतु वह कन्या आकाश में उड़ गई और वहां से कहा- अरे मूर्ख, मुझे मारने से क्या होगा, तुझे मारने वाला तो वृंदावन में जा पहुंचा है। वह जल्द ही तुझे तेरे पापों का दंड देगा। इस अवसर पर मंदिर कमेटी के प्रधान श्री प्रेमलाल भारद्वाज, सचिव मोहिंद्र पाल भारद्वाज , कोषाध्यक्ष हरिराम भारद्वाज सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़(सोलन)। नालागढ़ के साथ लगते पहाड़ी क्षेत्र तिरला महुआ स्थित जालपा माता मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन व्यासपीठ गोपाल कृष्ण ने कृष्ण जन्म का प्रसंग सुनाया। कंस ने अपनी बहन देवकी का विवाह अपने मित्र वासुदेव नामक यदुवंशी से किया। जब कंस अपनी बहन देवकी को विदा कर ससुराल पहुंचाने जा रहा था तो रास्ते में आकाशवाणी हुई, हे कंस, जिस देवकी को तू बड़े प्रेम से ले जा रहा है, उसी देवकी का आठवें गर्भ से उत्पन्न बालक तेरा वध करेगा। यह सुनकर कंस वसुदेव को मारने के लिए उद्यत हुआ।
कंस ने वसुदेव और देवकी को कारागृह में डाल दिया और उनके एक-एक करके छह बच्चों को कंस ने मार डाला। सातवें गर्भ को योगमाया ने वसुदेव की दूसरी पत्नी रोहिणी के गर्भ में स्थापित कर दिया था। आठवां बच्चा होने वाला था। जिस समय वासुदेव-देवकी को पुत्र पैदा हुआ, उसी समय संयोग से यशोदा के गर्भ से एक कन्या का जन्म हुआ, जो 'माया' थी। वहीं कारागार में श्रीकृष्ण प्रकट हुए। जिन्हें वासुदेव ने वृंदावन में माता यशोदा के पास छोड़ दिया और वहां से कन्या को कारागार में लाए। अब कंस को सूचना मिली कि वसुदेव-देवकी को बच्चा पैदा हुआ है। उसने बंदीगृह में जाकर देवकी के हाथ से नवजात कन्या को छीनकर पृथ्वी पर पटक देना चाहा, परंतु वह कन्या आकाश में उड़ गई और वहां से कहा- अरे मूर्ख, मुझे मारने से क्या होगा, तुझे मारने वाला तो वृंदावन में जा पहुंचा है। वह जल्द ही तुझे तेरे पापों का दंड देगा। इस अवसर पर मंदिर कमेटी के प्रधान श्री प्रेमलाल भारद्वाज, सचिव मोहिंद्र पाल भारद्वाज , कोषाध्यक्ष हरिराम भारद्वाज सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।
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